फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Muzaffarnagar riots- government prepare to withdraw trial from BJP leaders

मुजफ्फरनगर दंगा: भाजपा नेताओं से मुकदमे वापस लेने की तैयारी में योगी सरकार

Sun, 21 Jan 2018 06:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 21 Jan 2018 06:10 AM IST
विज्ञापन
Muzaffarnagar riots- government prepare to withdraw trial from BJP leaders

योगी सरकार साढ़े चार वर्ष पहले कवाल कांड को लेकर नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की तैयारी में है।

विज्ञापन


इस संबंध में शासन ने जिला प्रशासन से भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज हुए नौ मुकदमों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि नेताओं पर दर्ज मुकदमों की क्या स्थिति है। क्या ये मुकदमे वापस लिए जा सकते हैं। जल्द ही प्रशासन की ओर से इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी जानी है।
विज्ञापन


जिले में 27 अगस्त 2013 को जानसठ थाना क्षेत्र के गांव कवाल में शाहनवाज की मौत के बाद मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। अगले दिन कवाल गांव में आगजनी हुई थी, जिसके विरोध में मुस्लिमों ने शहर के खालापार में एकत्र होकर तत्कालीन डीएम और एसएसपी को ज्ञापन दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके विरोध में हिंदू संगठनों ने 31 अगस्त 2013 को नंगला मंदौड़ में पंचायत की थी। बाद में 7 सितंबर 2013 को नंगला मंदौड़ में फिर से महापंचायत हुई। महापंचायत खत्म होने के बाद जिले में दंगा भड़क गया था।

तत्कालीन सपा सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने सिखेड़ा थाने पर पंचायतों में भाग लेने वाले भाजपा नेताओं थानाभवन के विधायक एवं राज्यमंत्री सुरेश राणा, सरधना विधायक संगीत सोम, पूर्व मंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, बिजनौर सांसद भारतेंद्र सिंह, विधायक उमेश मलिक, साध्वी प्राची, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह, श्यामपाल चेयरमैन, जयप्रकाश शास्त्री, राजेश्वर आर्य, मोनू, सचिन आदि के खिलाफ पाबंदी के बावजूद पंचायत करने, भड़काऊ भाषण देने के आरोप में दो मुकदमे दर्ज कराए गए थे, जो वर्तमान में कोर्ट में विचाराधीन हैं। इसके अलावा बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक के खिलाफ भी दंगे से पहले और बाद के सात मुकदमे शाहपुर, फुगाना थानों में दर्ज  हैं।

इस संबंध में विशेष सचिव न्याय राज सिंह ने जिला प्रशासन को पत्र भेजा है, जिसमें भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज नौ मुकदमों की वर्तमान स्थिति की जानकारी के अलावा यह भी पूछा गया है कि क्या ये मुकदमे वापस हो सकते हैं।

प्रशासनिक अधिकारी शासन का पत्र आने से इंकार कर रहे हैं। एडीएम प्रशासन हरीशचंद का कहना है कि उन्हें अभी ऐसा कोई शासन का पत्र नहीं मिला है, मिलेगा तो उसका जवाब दिया जाएगा।

उधर, जिला शासकीय अधिवक्ता दुष्यंत त्यागी ने शासन का पत्र मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शासन ने दंगों के संबंध में मुकदमों के बारे में जानकारी मांगी है। न्यायिक अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद जवाब जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा जाएगा।
 

शासन ने दी थी धारा बढ़ाने की मंजूरी

Muzaffarnagar riots- government prepare to withdraw trial from BJP leaders

कवाल कांड से लेकर दंगे तक दर्ज हुए तमाम मुकदमों की जांच शासन ने एसआईसी से कराई थी। एसआईसी ने तब महापंचायत के आरोपी भाजपा नेताओं के खिलाफ धारा 188, 353, 147, 7 क्रिमनल लॉ एमेंडमेंट एक्ट में चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी।  धारा 153 (ए) बढ़ाने के लिए शासन को प्रार्थना पत्र लिखा था। शासन ने अगस्त 2017 में भाजपा नेताओं के खिलाफ यह धारा बढ़ाने की मंजूरी दी थी।

मुकदमों की कोर्ट में मौजूदा स्थिति
मुजफ्फरनगर। हाईप्रोफाइल कवाल कांड को लेकर 31 अगस्त 2013 को नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के संबंध में पुलिस की ओर से सिखेड़ा थाने पर दर्ज मुकदमे वर्तमान में कोर्ट में विचाराधीन हैं।

सिखेड़ा थाने पर दर्ज अपराध संख्या 173/13 के मुकदमे में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा सांसद डॉ संजीव बालियान, बुढ़ाना से बीजेपी विधायक उमेश मलिक भी आरोपी हैं। इस मुकदमे में दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए थे।

गत दिवस शुक्रवार को ही दोनों ने कोर्ट में सरेंडर कर वारंट रिकॉल कराए हैं। अदालत ने दोनों पर आरोप निर्धारण के लिए 29 जनवरी की तारीख नियत की है। महापंचायत के ही दर्ज मुकदमा संख्या 178/13 में पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र सिंह, श्यामपाल चेयरमैन और भैंसी के पूर्व प्रधान जयप्रकाश शास्त्री आदि ने भी शुक्रवार को अदालत में सरेंडर होकर वारंट रिकॉल कराए हैं। अदालत ने इस मामले को सेशन सुपुर्द करने के लिए 22 जनवरी की तारीख लगाई है।

क्या था पंचायत का मामला
मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 की 27 अगस्त को जानसठ थाना क्षेत्र के गांव कवाल में हुई मलिकपुरा के ममेरे-फुफेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के विरोध में हिंदू संगठनों ने नंगला मंदौड़ गांव में 31 अगस्त और फिर सात सितंबर को महापंचायत की थी।

सात सितंबर की महापंचायत से लौटते लोगों पर हमला होने के बाद जिले में दंगा भड़क गया था। दंगा होने पर सपा सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने सिखेड़ा थाने में इन महापंचायतों में भाग लेने वाले थानाभवन के विधायक सुरेश राणा, सरधना के विधायक संगीत सोम, डॉ संजीव बालियान, भारतेंद्र सिंह, उमेश मलिक, साध्वी प्राची, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह, श्यामपाल चेयरमैन, जयप्रकाश शास्त्री, राजेश्वर आर्य, मोनू, सचिन आदि के खिलाफ पाबंदी के बावजूद पंचायत करना, भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमे दर्ज कराए गए थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed