Nikay Chunav 2023 : चुनाव में हारा, कोर्ट पहुंचा तो पांच साल बाद मिली जीत, फैसले में देरी से नहीं मिली कुर्सी
Nikay Chunav 2023: दौराला नगर पंचायत को वर्ष 1988 में नगर पंचायत का दर्जा मिला था और पहली बार निकाय चुनाव हुए, लेकिन विवाद के कारण मामला कोर्ट में पहुंच गया। पांच साल तक कोर्ट में सुनवाई चली। फैसला आया तो उप विजेता रहे प्रत्याशी नगर पंचायत के पहले चेयरमैन बनने से वंछित रहे गए।
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दौराला गांव को चरण सिंह की चक्की से लेकर काला महादेव तक सन् 1988 में नगर पंचायत का दर्जा मिला। निकाय चुनाव हुए और चौधरी रघुराज सिंह व ओमबीर पधान आमने सामने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़े। इस चुनाव में चौधरी रघुराज सिंह को विजेता घोषित किया गया। इसके खिलाफ ओमबीर ने मतगणना सही तरीके से न करने का आरोप लगाते हुए हाइकोर्ट में याचिका दायर की। चौधरी रघुराज सिंह ने भी पैरवी के लिए अपना वकील खड़ा किया। लगातार पांच साल तक इस केस पर कोर्ट में सुनवाई हुई।
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दोबारा मतगणना में 110 वोट से जीते थे ओमबीर
कोर्ट में पांच साल तक सुनवाई के बाद दोबारा मतगणना के आदेश जारी किए गए। कोर्ट के आदेश पर हुई दोबारा मतगणना में ओमबीर 110 वोटों से विजयी हुए। कोर्ट ने ओमबीर पधान के पक्ष में फैसला तो सुना दिया लेकिन तब तक दौराला नगर पंचायत का पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका था और अगले चुनाव के लिए आचार संहिता भी लगा दी गई थी।
कोर्ट का फैसला आने से पहले ही चेयरमैन का कार्यकाल समाप्त हो जाने के कारण प्रशासक तैनात किए जा चुके थे। जिसकारण दौराला का पहला चेयरमैन बनने की ओमबीर पधान की उम्मीद टूट गई जबकि चौधरी रघुराज सिंह ने दौराला नगर पंचायत के पहले चेयरमैन का अपना कार्यकाल पूरा किया।
देरी से आया फैसला
कोर्ट का फैसला उनके पिता के हक में आया था लेकिन पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका था और अगले चुनाव के लिए आचार संहिता लग गई थी। यहीं कारण रहा कि उनके पिता कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके। कोर्ट से उनके पक्ष में फैसला आने के बाद भी उनके पिता अध्यक्ष नहीं बन पाए।
संजय पधान, स्व. ओमबीर पधान के बेटे
कार्यकाल हो चुका था पूरा
ओमबीर ने वार्डो में एक व्यक्ति की दो-दो वोट होने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में याचिका दायर की थी। कार्यकाल पूरा हो गया था और प्रशासक तैनात कर दिए गए थे। बाद में ओमबीर के पक्ष में कोर्ट का फैसला आया। -चौधरी रघुराज सिंह, पूर्व चेयरमैन दौराला