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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Lok Sabha Elections 2024: ten MPs from the West will not be part of the 18th Lok Sabha

लाेकसभा चुनाव 2024: पश्चिम के 10 सांसद नहीं होंगे 18वीं लोकसभा का हिस्सा, नया प्रतिनिधि चुनेंगे मतदाता

Tue, 09 Apr 2024 08:45 AM IST
Dimple Sirohi सैयद यासिर रजा, अमर उजाला, मेरठ
सैयद यासिर रजा, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 09 Apr 2024 08:45 AM IST
सार

Lok Sabha Elections 2024: पश्चिम के दस सांसद 18वीं लोकसभा का हिस्सा नहीं होंगे। दस सीटों पर सांसद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इनमें से छह सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन जीता था जबकि चार पर भाजपा का कब्जा था।

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Lok Sabha Elections 2024: ten MPs from the West will not be part of the 18th Lok Sabha
india election vote voting new - फोटो : istock

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दस सीटें ऐसी हैं जहां के मतदाता लोकसभा में नुमाइंदगी के लिए अपना नया प्रतिनिधि चुनेंगे। इन सीटों पर पिछले लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले सांसद इस बार मैदान में ही नहीं हैं। पहले चरण में ऐसी सीटों की संख्या 8 में से 6 है। इसमें सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत के सांसद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। सिर्फ मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान और कैराना के सांसद प्रदीप चौधरी ही बतौर सांसद चुनावी मैदान में हैं।

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जिन 6 सीटों पर नया सांसद चुना जाएगा उनमें तीन सीट बसपा के पास थीं। दो सीट सपा और एक सीट भाजपा के पास थी। इसी तरह दूसरे चरण की जिन 8 सीटों में से तीन सीटों पर सांसद मैदान में नहीं हैं उसमें मेरठ, गाजियाबाद और बागपत की सीट शामिल हैं। संभल के मौजूदा सांसद समाजवादी पार्टी के शफीकुर्रहमान बर्क का निधन हो चुका है। अब उनके पौत्र मैदान में हैं। संभल में तीसरे चरण में मतदान होगा।
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सहारनपुर- सहारनपुर में पिछले चुनाव में बसपा के टिकट पर फजलुर्रहमान ने लगभग 23 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। इस बार वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। बसपा ने इस बार माजिद अली को अपना प्रत्याशी बनाया है। 2014 में राघव लखनपाल सांसद चुने गए थे।

बिजनौर- पिछले चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही थीं। बिजनौर और नगीना दोनों सीटें बसपा के खाते में थीं। बिजनौर में बसपा के मलूक नागर ने लगभग 71 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। उन्हें 51 फीसदी वोट मिले थे। इस बार बसपा ने मलूक नागर के स्थान पर विजेंद्र को टिकट दिया है। 2014 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा का कब्जा था और कुंवर भारतेंद्र सांसद चुने गए थे। मलूक नागर तब भी बसपा के प्रत्याशी थे और वह तीसरे नंबर पर रहे थे। दूसरे नंबर पर सपा के शाहनवाज राणा थे।

नगीना- नगीना सुरक्षित सीट है। यह सीट भी 2019 के चुनाव में बसपा ने डेढ़ लाख के अधिक के अंतर से जीती थी। गिरीश चंद्र 56 फीसदी वोट हासिल कर संसद में पहुंचे थे। इस बार वह मैदान में नहीं हैं। गिरीश को बसपा ने बुलंदशहर से टिकट दिया है। 2014 के चुनाव में इस सीट को भाजपा के यशवंत सिंह ने कब्जा किया था और बसपा तीसरे नंबर पर थी।

 

मुरादाबाद- 2019 के चुनाव में इस सीट पर सपा ने डॉक्टर एसटी हसन को मैदान में उतारा था। उन्होंने एक लाख के अंतर से यह सीट जीती थी। इस बार सपा ने उनका टिकट काट कर आजम खां की करीबी मानी जाने वाली रूचिवीरा को अपना प्रत्याशी बनाया है। हालांकि एसटी हसन को सपा ने पहले टिकट दिया था, लेकिन आखरी वक्त पर टिकट बदल दिया था। 2014 में भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार सांसद चुने गए थे।

रामपुर- सपा के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खां इस सीट से 2019 में सपा के प्रत्याशी थे और 52 प्रतिशत वोट हासिल कर भाजपा की जया प्रदा को 1 लाख 11 हजार वोटों से हराया था। 2022 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए तो आजम खां ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। सीट खाली होने पर उपचुनाव हुआ तो भाजपा ने सपा से यह सीट छीन ली और घनश्याम लोधी लोकसभा पहुंच गए। हालांकि भाजपा ने एक बार फिर घनश्याम पर भरोसा किया है। लेकिन 2019 में सांसद चुने गए आजम खां इस बार जेल में हैं और वह चुनाव में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। सपा ने मोहिबुल्लाह को अपना प्रत्याशी बनाया है।
 

पीलीभीत- यह सीट भाजपा के वरुण गांधी के पास थी। इस बार भाजपा ने वरुण का टिकट काट दिया है। यानी सांसद वरुण चुनावी मैदान से बाहर हैं। अब यहां की जनता नया सांसद चुनेगी। वरुण गांधी ने 2014 का चुनाव भी पीलीभीत से ही जीता था।

मेरठ-2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल को इस सीट पर जीत दर्ज करने में पसीने आ गए थे। बड़ी मुश्किल से वह 4729 वोटों से बसपा के हाजी मोहम्मद याकूब से जीत पाए थे। राजेंद्र अग्रवाल इससे पहले 2014 और 2009 में भी मेरठ से सांसद चुने गए थे। इस बार भाजपा ने उनका टिकट काटकर रामायण के राम अरुण गोविल को दिया है। यानी डेढ़ दशकों से लोकसभा में मेरठ का प्रतिनिधित्व कर रहे राजेंद्र अग्रवाल इस बार मैदान से बाहर हैं।

 

गाजियाबाद- इस सीट पर दो बार जनरल वीके सिंह भाजपा के टिकट पर जीत कर संसद पहुंचे थे। इस बार भाजपा ने उनके स्थान पर अतुल गर्ग को अपना प्रत्याशी बनाया है।

बागपत- 2019 में इस सीट पर मुंबई के कमिश्नर रहे सत्यपाल सिंह भाजपा से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए थे। जयंत चौधरी से समझौते के बाद ये सीट रालोद के हिस्से में चली गई। रालोद ने राजकुमार सांगवान को अपना प्रत्याशी बनाया है। सत्यपाल सिंह मैदान में नहीं हैं।
पहले बसपा से जीते अब कांग्रेस से मैदान में

अमरोहा- सीट पर 2019 में बसपा के दानिश अली चुनाव जीत कर 17वीं लोकसभा का हिस्सा बने थे। लेकिन बाद में बसपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। दानिश अली ने कांग्रेस का दामन थामा और अब वह कांग्रेस के टिकट पर इसी सीट से चुनावी मैदान में हैं।

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