बागपत में ‘चौधराहट’ की लड़ाई, मुद्दों के तराजू पर प्रत्याशियों को परख रहे मतदाता
1998 में भाजपा के सोमपाल शास्त्री और 2014 में भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह ने चौधरी अजित सिंह को हराया है। स्थानीय मुद्दों में बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है, लेकिन यहां कई समीकरण बदल गए हैं। चौधरी चरण सिंह की तीसरी पीढ़ी यानी पौत्र जयंत चौधरी मैदान में हैं। सपा-बसपा-रालोद के बीच गठबंधन है और कांग्रेस मैदान में नहीं है। भाजपा से केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह दूसरी बार चुनाव मैदान में है।
बड़ौत बागपत संसदीय क्षेत्र की सियासत का केंद्रबिंदु है। यहां दिल्ली बस स्टैंड पर पुरुषोत्तम गर्ग के प्रतिष्ठान पर बहस छिड़ी है। गर्ग कहते हैं कि स्थानीय मुद्दे तो गौण है, इस बार चुनाव में मुद्दा देश है और चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। हरिओम गोयल भी हां में हां मिलाते हैं। लेकिन दुकान पर बैठे गुराना गांव के सत्यवीर उर्फ भूरा सवाल उठाते हैं कि 2014 में जिन वादों को लेकर भाजपा सत्ता में आई, उनमें कितने पूरे किए गए। गन्ने के भाव और भुगतान का क्या हुआ। गोवंश किसान के लिए नई समस्या है।
जयपाल सिंह कहते हैं कि सरकार स्थानीय मुद्दों के तराजू पर खुद को पूरी तरह से खरा साबित नहीं कर पाई। सरूरपुर से निकलते ही दिल्ली रोड पर खेत में बैठे किसान रोहताश और राममेहर कहते हैं कि गोवंश तो नया और बड़ा मुद्दा है। किसान को फिर से रखवाली के लिए छोड़ दिया गया है।
भाजपा के रणनीतिकार जानते हैं कि जब-जब भाजपा की हवा चलती है तो जाटलैंड में कमल खिला है। उनका मानना है कि पीएम मोदी का मैजिक यहां कम नहीं है। उम्मीदवार से ज्यादा लोगों के बीच मोदी की बातें हैं। प्रत्याशी बनाए गए केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह विकास के मुद्दे पर जनता के बीच हैं।
बागपत लोकसभा क्षेत्र में मतदाता कुल 1592290 मतदाता हैं। इनमें सर्वाधिक 4.35 हजार जाट मतदाता हैं। उसके बाद 3.25 लाख मुस्लिम और 2.25 लाख अनुसूचित जाति,2.70 लाख स्वर्ण और बाकी पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के मतदाता हैं।
यहां ये हैं मुद्दे
बागपत संसदीय क्षेत्र में किसान और उसकी समस्याएं सबसे बड़ा मुद्दा है। गन्ना भुगतान, समय पर इंडेंट, गोवंश से फसलों को हो रहा नुकसान, यमुना नदी पर पुल, दिल्ली-सहारनपुर हाईवे, मेरठ-सोनीपत मार्ग, बड़ौत-बुढ़ाना मार्ग, मेरठ-पानीपत रेललाइन, दिल्ली-सहारनपुर रेल लाइन का दोहरीकरण, शिक्षा, बेरोजगारी, खेल की ट्रेनिंग की व्यवस्था नहीं होना। महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था।
क्या कहती है छपरौली
रालोद का सबसे सुरक्षित किला है, छपरौली विधानसभा सीट । साल 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां जीता रालोद था, लेकिन भाजपा ने जबरदस्त बढ़त हासिल की। किरठल गांव के प्रदीप चौहान कहते हैं कि विकास पर वोट देंगे। ओमवीर डायरेक्टर कहते हैं कि भाजपा ने वादे तोड़े हैं, इसलिए इस बार लोग रालोद के साथ हैं। सुरेश डायरेक्टर कहते हैं कि भाजपा यहां बढ़त बनाएगी। टांड़ा के शकील अहमद कहते हैं कि भाजपा के पास गठबंधन का कोई तोड़ नहीं है।