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Meerut News: बुजुर्गों के नाम लिखे पत्र, साझा कीं भावनाएं
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दौराला - दादरी गांव स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। दादरी गांव स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को समाज कल्याण विभाग के निर्देशानुसार अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य प्रो. यज्ञदेव शर्मा के निर्देशन में किया गया। छात्राओं ने अपने दादा-दादी और परिवार के अन्य बुजुर्गों के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हुए पत्र लिखे।
छात्राओं ने पत्रों के माध्यम से अपने परिवार के बुजुर्गों से जुड़ी यादों और भावनाओं को शब्दों में पिरोया। बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा कशिश ने अपने दादाजी से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान कई छात्राएं भावुक हो गईं। छात्राओं को ऐसे खेल भी खिलाए गए, जिनसे उन्हें अपने बुजुर्गों के साथ बिताए बचपन के समय की यादें ताजा हुईं। डॉ. शरद भटनागर ने कहा कि जिन परिवारों में बच्चों को बुजुर्गों का स्नेह मिलता है, वह भाग्यशाली होते हैं। हमें उनके साथ बिताए पलों को संजोकर रखना चाहिए, क्योंकि उनके चले जाने के बाद इन पलों का महत्व और अधिक महसूस होता है।
डॉ. दीप्ति चौधरी ने कहा कि व्यस्त जीवनशैली के कारण लोग बुजुर्गों को समय नहीं दे पा रहे हैं। आने वाली पीढ़ियां शायद इससे भी अधिक व्यस्त होंगी, इसलिए हमें अपने बड़ों के साथ सम्मानपूर्वक रहते हुए उन्हें समय देना चाहिए। डॉ. कुसुमलता ने कहा कि बुजुर्गों के साथ बिताया हर पल उनके प्रेम और आशीर्वाद से जुड़ा होता है। ऐसे आयोजन भारतीय परंपराओं और संस्कारों से जुड़े रहने का अवसर देते हैं। इस दौरान प्रो. विशाल कुमार, प्रो. विजेंद्र सिंह, प्रो. मनीष कुमार, डॉ. गजेंद्र कुमार, संगीता तोमर, राहुल मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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दौराला। दादरी गांव स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को समाज कल्याण विभाग के निर्देशानुसार अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य प्रो. यज्ञदेव शर्मा के निर्देशन में किया गया। छात्राओं ने अपने दादा-दादी और परिवार के अन्य बुजुर्गों के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हुए पत्र लिखे।
छात्राओं ने पत्रों के माध्यम से अपने परिवार के बुजुर्गों से जुड़ी यादों और भावनाओं को शब्दों में पिरोया। बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा कशिश ने अपने दादाजी से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान कई छात्राएं भावुक हो गईं। छात्राओं को ऐसे खेल भी खिलाए गए, जिनसे उन्हें अपने बुजुर्गों के साथ बिताए बचपन के समय की यादें ताजा हुईं। डॉ. शरद भटनागर ने कहा कि जिन परिवारों में बच्चों को बुजुर्गों का स्नेह मिलता है, वह भाग्यशाली होते हैं। हमें उनके साथ बिताए पलों को संजोकर रखना चाहिए, क्योंकि उनके चले जाने के बाद इन पलों का महत्व और अधिक महसूस होता है।
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डॉ. दीप्ति चौधरी ने कहा कि व्यस्त जीवनशैली के कारण लोग बुजुर्गों को समय नहीं दे पा रहे हैं। आने वाली पीढ़ियां शायद इससे भी अधिक व्यस्त होंगी, इसलिए हमें अपने बड़ों के साथ सम्मानपूर्वक रहते हुए उन्हें समय देना चाहिए। डॉ. कुसुमलता ने कहा कि बुजुर्गों के साथ बिताया हर पल उनके प्रेम और आशीर्वाद से जुड़ा होता है। ऐसे आयोजन भारतीय परंपराओं और संस्कारों से जुड़े रहने का अवसर देते हैं। इस दौरान प्रो. विशाल कुमार, प्रो. विजेंद्र सिंह, प्रो. मनीष कुमार, डॉ. गजेंद्र कुमार, संगीता तोमर, राहुल मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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