फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Know, what do you say about the three divorce cases?

देवबंदी उलमा ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में लिए निर्णयों का किया समर्थन

Tue, 18 Apr 2017 08:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ सहारनपुर Updated Tue, 18 Apr 2017 08:25 PM IST
विज्ञापन
Know, what do you say about the three divorce cases?
तीन तलाक मुद्दे पर बोले देवबंदी उलमा

देवबंद में ट्रिपल तलाक के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों का देवबंदी उलमा ने समर्थन किया है। उलमा का कहना है कि तीन तलाक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लेकर बोर्ड ने बेवजह इस मुद्दे को तूल देने वालों को करारा जवाब दिया है।

विज्ञापन


सोमवार को दारुल उलूम चौक स्थित कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता में अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी और उत्तर प्रदेश राब्ता कमेटी के सचिव डॉक्टर उबैद इकबाल आसिम ने संयुक्त रुप से कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को जिस तरीके से बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है इसका तथ्य से कोई संबंध नहीं है। सच बात यह है कि गए गुजरे दौर में भी मुस्लिम समाज में तलाक फीसद दूसरे धर्मों के मुकाबले बहुत कम है और जहां कहीं मजबूरी के रुप में इस मामले को अपनाना पड़ता है तो उसके लिए तीन तलाक जरूरी नहीं है। दोनों विद्वानों ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार मुसलमानों तथा देश के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर पूरा जोर इस बात पर लगा रही है जैसे मुसलमानों के लिए कोई और दूसरी समस्या नहीं है और हर मुसलमान तीन तलाक का उपयोग आवश्यक समझता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सिफारिशों और वर्तमान सत्र में पारित किए गए संकल्प पत्र में इस बात को स्पष्ट कर दिया गया है कि तीन तलाक किसी भी हालत में कभी भी पसंदीदा नहीं रही। जो मुसलमान इसका उपयोग करता है उन्हें मुस्लिम समाज में पसंदीदगी की दृष्टि से न देखना चाहिए। बल्कि ऐसे लोग मिल्लते इस्लामिया के लिए एक कलंक हैं जिनका सामाजिक बहिष्कार किया जाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने सभी मदरसा संचालकों से आह्वान किया कि वह इदारों में दारुल कजा स्थापित करें।

विज्ञापन

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों का किया समर्थन

Know, what do you say about the three divorce cases?
तीन तलाक मुद्दा

वहीं, दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन के प्रभारी मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि एक साथ तीन तलाक का इस्तेमाल करने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का बोर्ड का फैसला एकदम दुरुस्त है। तमाम मस्जिदों के इमामों को चाहिए कि वह इसके बारे में लोगों को जागरूक करें। इसके साथ ही मुफ्ती अरशद फारुकी ने बेटियों को शादी में दहेज की जगह जायदाद में हिस्सा देने के बोर्ड के फैसले पर भी मुहर लगाते हुए कहा कि कुरआन में भी इसका हुक्म दिया गया है, लेकिन लोग इसको नजर अंदाज कर जायदाद के मालिक बने बैठे हैं। बेटी या बहन का हक मारकर जो लोग उस जायदाद से रोटी खा रहे वो सरासर हराम है। ट्रिपल तलाक के मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों का देवबंदी उलमा ने समर्थन किया है। उलमा का कहना है कि तीन तलाक के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला लेकर बोर्ड ने बेवजह इस मुद्दे को तूल देने वालों को करारा जवाब दिया है।

सोमवार को दारुल उलूम चौक स्थित कार्यालय पर पत्रकारों से वार्ता में अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी और उत्तर प्रदेश राब्ता कमेटी के सचिव डॉक्टर उबैद इकबाल आसिम ने संयुक्त रुप से कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को जिस तरीके से बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जा रहा है इसका तथ्य से कोई संबंध नहीं है। सच बात यह है कि गए गुजरे दौर में भी मुस्लिम समाज में तलाक फीसद दूसरे धर्मों के मुकाबले बहुत कम है और जहां कहीं मजबूरी के रुप में इस मामले को अपनाना पड़ता है तो उसके लिए तीन तलाक जरूरी नहीं है। दोनों विद्वानों ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार मुसलमानों तथा देश के मूल मुद्दों से ध्यान हटाकर पूरा जोर इस बात पर लगा रही है जैसे मुसलमानों के लिए कोई और दूसरी समस्या नहीं है और हर मुसलमान तीन तलाक का उपयोग आवश्यक समझता है, जबकि वास्तविकता यह है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सिफारिशों और वर्तमान सत्र में पारित किए गए संकल्प पत्र में इस बात को स्पष्ट कर दिया गया है कि तीन तलाक किसी भी हालत में कभी भी पसंदीदा नहीं रही। जो मुसलमान इसका उपयोग करता है उन्हें मुस्लिम समाज में पसंदीदगी की दृष्टि से न देखना चाहिए। बल्कि ऐसे लोग मिल्लते इस्लामिया के लिए एक कलंक हैं जिनका सामाजिक बहिष्कार किया जाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने सभी मदरसा संचालकों से आह्वान किया कि वह इदारों में दारुल कजा स्थापित करें। वहीं, दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद एवं फतवा ऑनलाइन के प्रभारी मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि एक साथ तीन तलाक का इस्तेमाल करने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का बोर्ड का फैसला एकदम दुरुस्त है। तमाम मस्जिदों के इमामों को चाहिए कि वह इसके बारे में लोगों को जागरूक करें। इसके साथ ही मुफ्ती अरशद फारुकी ने बेटियों को शादी में दहेज की जगह जायदाद में हिस्सा देने के बोर्ड के फैसले पर भी मुहर लगाते हुए कहा कि कुरआन में भी इसका हुक्म दिया गया है, लेकिन लोग इसको नजर अंदाज कर जायदाद के मालिक बने बैठे हैं। बेटी या बहन का हक मारकर जो लोग उस जायदाद से रोटी खा रहे वो सरासर हराम है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed