{"_id":"60df7fdd8ebc3ec30a3989d1","slug":"kawad-yatra-cancle-in-this-year-meerut-news-mrt5455959161","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़कों पर नहीं गूंजेंगे बोल बम के जयकारे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़कों पर नहीं गूंजेंगे बोल बम के जयकारे
विज्ञापन
सड़कों पर नहीं गूंजेंगे बोल बम के जयकारे
मेरठ। कोरोना महामारी के चलते दूसरे वर्ष भी शहर की जनता केसरिया सैलाब को देखने से वंचित रहेगी। चार धाम यात्रा पर प्रतिबंध के बाद अब कांवड़ यात्रा पर भी रोक लगा दी गई है। इसके चलते सड़कों पर बोल बम के जयकारे नहीं गूंजेंगे। बाबा औघड़नाथ मंदिर सहित शिवालयों में भक्त गंगाजल से जलाभिषेक नहीं कर पाएंगे। बाबा औघड़नाथ मंदिर में 2.5 लाख श्रद्धालु अभिषेक करते हैं। वे लोग भी प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अपनी कांवड़ का जोड़ा पूरा करना है।
हर साल लाखों की संख्या में दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश के साथ गुजरात के भी श्रद्धालु गंगा जल लेकर मेरठ से गुजरते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान हर तरफ बोल बम के जयकारे गूंजते हैं और सड़कें केसरिया रंग से पट जाती है। महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर महेंद्र दास जी महाराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा स्थगित होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु निराश हुए हैं।
वहीं, कांवड़ सेवा शिविर लगाने वाले भक्त भी इस बार शिवभक्तों की सेवा नहीं कर पाएंगे। शिव कांवड़ सेवा संघ के संचालक सुधीर रस्तोगी ने बताया कि दूसरी बार कांवड़ियों की सेवा से वंचित रह गए हैं। कांवड़ियों की सेवा के लिए मोदीपुरम और रुड़की रोड पर शिविर लगाया जाता रहा है। संयुक्त व्यापार संघ के उपाध्यक्ष नीरज मित्तल ने बताया कि विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठन के जुझारू कार्यकर्ताओं के सहयोग से खिर्वा बाईपास पर 20 वर्ष से निर्बाध सेवा शिविर लगाया जा रहा था।
विज्ञापन
---
गोमुख से जल लाने से वंचित
- सदर निवासी विजय गोयल विज्जी ने बताया कि गोमुख से लंबे समय से 14 सदस्यों की टीम गोमुख और गंगोत्री से जल ला रही हैं। दो वर्ष से गोमुख से जल लाने से वंचित रह गए हैं। गंगानगर निवासी अजय शर्मा ने बताया कि 30 वर्ष से निर्बाध कांवड़ ला रहे हैं। चार बार साइकिल पर भी कांवड़ लाए। दो वर्ष से यात्रा से वंचित हैं। बागपत गेट शिव मंदिर के सेवादार अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि दो वर्ष से झांकी कांवड़ लाने से वंचित हैं।
---
25 जुलाई से शुरू होगा श्रावण मास
- 25 जुलाई को श्रावण मास शुरू होगा। यदि कांवड़ यात्रा की अनुमति होती तो एक सप्ताह पहले से ही बाहरी राज्यों से शिवभक्त पहुंचना शुरू हो जाते। इसके बाद छह अगस्त को शिवरात्रि पर भगवान भोले नाथ को जलाभिषेक करते, मगर इस बार शिवभक्त ऐसा नहीं कर पाएंगे।
--
विज्ञापन
मेरठ। कोरोना महामारी के चलते दूसरे वर्ष भी शहर की जनता केसरिया सैलाब को देखने से वंचित रहेगी। चार धाम यात्रा पर प्रतिबंध के बाद अब कांवड़ यात्रा पर भी रोक लगा दी गई है। इसके चलते सड़कों पर बोल बम के जयकारे नहीं गूंजेंगे। बाबा औघड़नाथ मंदिर सहित शिवालयों में भक्त गंगाजल से जलाभिषेक नहीं कर पाएंगे। बाबा औघड़नाथ मंदिर में 2.5 लाख श्रद्धालु अभिषेक करते हैं। वे लोग भी प्रभावित हुए हैं, जिन्हें अपनी कांवड़ का जोड़ा पूरा करना है।
हर साल लाखों की संख्या में दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश के साथ गुजरात के भी श्रद्धालु गंगा जल लेकर मेरठ से गुजरते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान हर तरफ बोल बम के जयकारे गूंजते हैं और सड़कें केसरिया रंग से पट जाती है। महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर महेंद्र दास जी महाराज ने बताया कि कांवड़ यात्रा स्थगित होने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु निराश हुए हैं।
विज्ञापन
वहीं, कांवड़ सेवा शिविर लगाने वाले भक्त भी इस बार शिवभक्तों की सेवा नहीं कर पाएंगे। शिव कांवड़ सेवा संघ के संचालक सुधीर रस्तोगी ने बताया कि दूसरी बार कांवड़ियों की सेवा से वंचित रह गए हैं। कांवड़ियों की सेवा के लिए मोदीपुरम और रुड़की रोड पर शिविर लगाया जाता रहा है। संयुक्त व्यापार संघ के उपाध्यक्ष नीरज मित्तल ने बताया कि विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठन के जुझारू कार्यकर्ताओं के सहयोग से खिर्वा बाईपास पर 20 वर्ष से निर्बाध सेवा शिविर लगाया जा रहा था।
विज्ञापन
---
गोमुख से जल लाने से वंचित
- सदर निवासी विजय गोयल विज्जी ने बताया कि गोमुख से लंबे समय से 14 सदस्यों की टीम गोमुख और गंगोत्री से जल ला रही हैं। दो वर्ष से गोमुख से जल लाने से वंचित रह गए हैं। गंगानगर निवासी अजय शर्मा ने बताया कि 30 वर्ष से निर्बाध कांवड़ ला रहे हैं। चार बार साइकिल पर भी कांवड़ लाए। दो वर्ष से यात्रा से वंचित हैं। बागपत गेट शिव मंदिर के सेवादार अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि दो वर्ष से झांकी कांवड़ लाने से वंचित हैं।
---
25 जुलाई से शुरू होगा श्रावण मास
- 25 जुलाई को श्रावण मास शुरू होगा। यदि कांवड़ यात्रा की अनुमति होती तो एक सप्ताह पहले से ही बाहरी राज्यों से शिवभक्त पहुंचना शुरू हो जाते। इसके बाद छह अगस्त को शिवरात्रि पर भगवान भोले नाथ को जलाभिषेक करते, मगर इस बार शिवभक्त ऐसा नहीं कर पाएंगे।
--