कारगिल विजय दिवस: मुजफ्फरनगर के लाल ने छुड़ाए थे दुश्मनों के छक्के, शहादत को सलाम करता है पूरा देश
यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में गांव बेलड़ा के अमरेश पाल की कारगिल की लड़ाई में शहादत की दास्तां सुनते हुए उनके बच्चे बड़े हो गए हैं। बूढ़े हो चुके माता-पिता की यादें धुंधला रही हैं, लेकिन बेटे का गम आज भी नहीं भूलता। पिता फूल सिंह कहते हैं कि देश में कहीं भी किसी के शहीद होने की खबर पता लगती है, तो ऐसा लगता है कि उनका अपना बेटा ही था।
शहर के गांव बेलड़ा निवासी अमरेश पाल 28 जून 1999 को कारगिल लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनके पिता फूल सिंह पेशे से किसान हैं। दो बेटों में अमरेश पाल बड़े थे, जबकि नेत्रपाल छोटा हैं। अमरेश पाल ने जनता इंटर कॉलेज भोपा से इंटर की परीक्षा पास की थी। वह स्कूल के होनहार छात्रों में थे। इंटर के बाद उनका चयन आर्मी में हो गया था। वे महार रेजीमेंट में थे। 1999 में कारगिल की पहाड़ियों पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए वह 28 जून 1999 को शहीद हो गए थे। अमरेश पाल के घर में दो बच्चे हैं। इनमें बड़ा बेटा बंटी बीएससी की पढ़ाई कर रहा है, जबकि छोटी बेटी ज्योति कंप्यूटर की पढ़ाई कर रही है। अमरेश पाल के शहीद होने के बाद सरकार ने उनकी पत्नी उमाकांता के नाम गैस एजेंसी का आवंटन किया था, जिसे वह जानसठ में संचालित कर रही हैं।
पिता फूल सिंह और माता अतर कली का कहना है कि जब भी उनके कानों में किसी सैनिक के शहीद होने की आवाज आती है, तो उन्हें लगता है कि शहीद होने वाला उनका अपना बेटा अमरेश पाल ही है। शहीद की पत्नी उमाकांता ने बताया कि कारगिल लड़ाई के दौरान उनके पति को छुट्टी से वापस बुलाया गया था। वह बीच रास्ते में ही थे, तब उनकी बेटी ज्योति का जन्म हुआ था। वह अपनी बेटी से भी नहीं मिल पाए थे।
वहीं ग्राम प्रधान संसार सिंह, मास्टर सुरेंद्र सिंह, पूर्व प्रधान नरेश कुमार, मोहम्मद अलीजान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रभात तोमर उर्फ गुड्डू का कहना है कि अमरेश पाल मिलनसार वह कर्मठ व्यक्ति थे। गांव में शहीद अमरेश पाल के नाम से जूनियर हाई स्कूल बना हुआ है, जिसमें सैकड़ों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। शहीद अमरेश पाल के परिवार सहित पूरा बेलड़ा गांव उनकी शहादत को सलाम करता है।
पूरा नहीं हुआ वादा
बेलड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने नहर पुल भोपा पर शहीद अमरेश पाल द्वार बनाने का वादा किया गया था, लेकिन यह आज तक पूरा नहीं हुआ। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि शहीद की पुण्यतिथि हो या कारगिल शहीद दिवस, प्रशासन की और से कोई भी व्यक्ति शहीद की समाधि तक नहीं आता।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/