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Kapsad Case: कपसाड़ में शांति बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती, सियासत के बीच पसरा तनाव, कई नेता नजरबंद

Mon, 12 Jan 2026 01:59 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Mon, 12 Jan 2026 01:59 PM IST
सार

कपसाड़ गांव की घटना के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक दबाव के बीच प्रशासन के सामने शांति व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। गांव में बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक जारी है।

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Kapsad Case: Maintaining Peace in Kapsad Becomes Major Challenge Amid Political Pressure
कपसाड़ में तैनात पुलिस बल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ से सटे सरधना थानाक्षेत्र के कपसाड़ गांव की घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो ने के बाद प्रशासन पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि गांव में शांति बनाए रखना पुलिस-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

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नेताओं की सक्रियता, लेकिन गांव में एंट्री पर रोक
घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पीड़ित परिवार से मिलने की घोषणा कर रहे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन ने किसी भी बाहरी व्यक्ति के गांव में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा रखी है।
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यह भी पढ़ें: कपसाड़ कांड: गांव में अघोषित कर्फ्यू, पड़ोसी भी नजरबंद, छावनी बना क्षेत्र, आज घर जा सकती है रूबी 

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ग्रामीण बोले-दर्द को राजनीति न बनाया जाए
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई राजनीतिक दल पीड़ित परिवार के दर्द को राजनीतिक मंच पर भुनाने में लगे हैं। किसी ने सहायता राशि की घोषणा की, तो किसी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर सरकार और प्रशासन को घेरा।

ठोस कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि राजनीतिक दल वास्तव में पीड़ित परिवार के साथ हैं, तो उन्हें सिर्फ बयानबाजी और फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और गांव में स्थायी शांति बहाली के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए।

पुलिस ने नेताओं को घर में नजरबंद किया
कपसाड़ गांव आने की तैयारी कर रहे नेताओं की बागपत पुलिस ने रात में ही घेराबंदी कर ली। पुलिस ने रात को ही सपा जिलाध्यक्ष रविंद्र यादव, आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष ओमवीर सिंह को पुलिस ने घर में नजरबंद कर लिया। 

बसपा जिलाध्यक्ष विक्रम भाटी से भी पूछताछ कर पुलिसकर्मी वापस लौट गए। घर में नजरबंद किए गए सपा जिलाध्यक्ष रविंद्र यादव ने कहा कि घटना में आरोपियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोप लगाया कि विपक्ष को पीड़ितों की आवाज उठाने से रोकने के लिए तानाशाही दिखाई जा रही है।

कपसाड़ प्रकरण को लेकर पुलिसकर्मी पिलाना गांव में कांग्रेस जिलाध्यक्ष लव कश्यप के घर पहुंचे लेकिन लव कश्यप बाहर होने के कारण नहीं मिले। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने फोन पर जिलाध्यक्ष से बात की और फिर वापस चले गए।

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