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कांवड़ यात्रा: दावे बडे़ और तैयारियां अभी अधूरी   

Sat, 21 Jul 2018 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 21 Jul 2018 12:58 AM IST
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kaavar yaatra daave bade, par taiyaari aduri
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कांवड़ यात्रा की सुरक्षा के मद्देनजर इंतजाम होने के शुक्रवार को प्रमुख सचिव (गृह) और डीजीपी के सामने बड़े-बडे़े दावे किए गए। लेकिन धरातल पर सब शून्य है। पुलिस प्रशासन की तैयारी अभी अधूरी है। सच्चाई है कि पुलिस ने अभी तक पुरानी व्यवस्था तक नहीं देखी। शायद यही वजह कि पुलिस और प्रशासन अधिकारियों ने प्रमुख सचिव (गृह) और डीजीपी को कांवड़ मार्ग का निरीक्षण नहीं कराया।
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कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार और डीजीपी ओपी सिंह ने की। छह राज्यों और तीन मंडलों के अधिकारियों के साथ कांवड़ यात्रा की सुरक्षा का प्लान देखा। सभी जिलों के अधिकारियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजार करने के दावे किए। लेकिन धरातल पर अभी पुलिस प्रशासन की कोई तैयारी नहीं है। कांवड़ मार्ग पर कितनी तैयारी है, इसका पता तो आम लोगों को भी है। 
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प्रमुख सचिव (गृह) ने प्रेसवार्ता में कांवड़ मार्ग पर जाकर निरीक्षण करने की बात कही तो पुलिस-प्रशासन के होश उड़ गए। स्थानीय अधिकारियों में चर्चा होने लगी कि आज बारिश होने के चलते कांवड़ मार्ग की हालत खराब हो गई होगी। ऐसे में प्रमुख सचिव और डीजीपी कांवड़ मार्ग का निरीक्षण करेंगे तो परिणाम क्या होगा। अधिकारियों ने मौसम खराब होने की बात कहकर प्रमुख सचिव व डीजीपी को मना लिया। 
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कांवड़ सेेल तक नहीं बना
कांवड़ यात्रा में कितनी फोर्स लगेगी, कहां-कहां प्वाइंट बनेंगे और संवेदनशील इलाके में पुलिस व पीएसी बल तैनात होगा। पुलिस के ऐसे दावे दोनों आला अधिकारियों के सामने रखे गए। लेकिन पुलिस ने अभी न कोई कांवड़ सेल बनाया व न किसी की ड्यूटी निर्धारित की। कांवड़ यात्रा में पुरानी व्यवस्था तक अभी पुलिस अधिकारियों ने नहीं देखी। इसको लेकर अभी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। 


संवेदनशील प्वाइंट नहीं बनाए 
पिछले साल कांवड़ यात्रा में कई अतिरिक्त संवेदनशील प्वाइंटों को बनाया गया था। लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में वह अभी शामिल नहीं हुए। ऐसा ही हाल प्रशासन और अन्य विभागों का है। कांवड़ मार्ग का प्रमुख सचिव और डीजीपी निरीक्षण कर लेते तो शायद पुलिस प्रशासन के दावों और व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती। लेकिन स्थानीय अधिकारी हर बार प्रमुख सचिव और डीजीपी को कांवड़ मार्ग पर नहीं जाने देते। 
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