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जयंत ने समझाया, पहले की गलती मत दोहराना
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जयंत ने समझाया, पहले की गलती मत दोहराना
भैंसा गांव (मवाना)। किसान महापंचायत के बहाने जयंत चौधरी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव पर भी बात की। कहा, हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र से जो जीतता है, वहीं प्रदेश में राज करता है। आपको देखना है कि किससे पक्ष में रहना है। आपने फैसला ले लिया होगा। भाजपा के लोग आपको समझाने आएंगे। इनके मन में कालापन है, इसी वजह से ये राज कर रहे हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिले के सोरम गांव का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग फिर उसी रास्ते पर चल पड़े हैं। क्या तुम पिटना बर्दाश्त करोगे? खेती करने वाले लोगों को अपनी राजनीतिक धार तेज करनी है। पहले जो गलती की, अगली बार मत दोहराना। भाजपा सरकार सब कुछ प्राइवेट करती जा रही है। इसके बाद सरकारी नौकरियों और आरक्षण का कोई मायने नहीं रह जाएगा।
महापंचायत में उन्होंने पहले फैसले में कहा कि हम इन तीन कृषि कानूनों को नहीं मानते हैं। ये असांविधानिक हैं। न्यायालय इस ओर ध्यान दे। दूसरे फैसले में उन्होंने कहा कि सरकार एमएसपी पर कानून बनाए और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करे। तीसरे फैसले में कहा कि आंदोलन में शामिल 80 साल के किसानों को जेलों में बंद किया जा रहा है। गांव-गांव आंदोलन में शामिल होने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है। तुरंत बंद किया जाए। साथ ही आंदोलन में शहीद किसानों को सम्मान दिया जाए।
फूल रोते रहे, शूल हंसते रहे...
जयंत ने 27 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा। कहा, एक ओर अडानी एक ओर अंबानी और स्टेडियम का नाम मोदी। ऐसे ही मूर्ति लगवाने का काम बसपा ने किया था। जो दोबारा नहीं आई। उप्र के मुख्यमंत्री को मुगल इतिहास का प्रोफेसर बताया। संबोधन का अंत उन्होंने कुलदीप सिंह की कविता से किया। पढ़ा- ‘फूल रोते रहे, शूल हंसते रहे, आत्मा चाहे मरे, ऐसा उत्थान हमें नहीं चाहिए, अपने दुख से दुखी, अपने सुख से सुखी, पूंजीपतियों के अलावा न दिखता कोई, देश बिक जाए, उनको कुछ गम नहीं, ऐसा सुल्तान हमको नहीं चाहिए।’
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जाट और मुस्लिम का दिखा गठबंधन
महापंचायत में जाट और मुस्लिम समुदाय का गठबंधन साफ नजर आया। हालांकि पंचायत में 36 बिरादरी के लोगोें के शामिल होने का दावा किया गया था लेकिन बहुतायत में जाट और मुस्लिम का गठबंधन दिखा। समुदाय विशेष के लोगों ने अपनी उपस्थित और ताकत दिखाने के लिए विशेष टोपी लगाई हुई थी।
भैंसा बुग्गी से पहुंचे जयंत चौधरी
जयंत महापंचायत स्थल से दो सौ मीटर पहले कार से उतरकर भैंसा बुग्गी पर सवार होकर महापंचायत में पहुंचे। मंच पर पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया गया। मेहरपाल ने उन्हें हैंडपंप भेंट किया।
सोशल मीडिया पर छाए हरेंद्र ताऊ भी पहुंचे
दिल्ली के गाजीपुर बोर्डर से सोशल मीडिया पर छाए गांव मसूरी निवासी हरेंद्र ताऊ भी पंचायत में पहुंचे। उन्होंने कहा कि जो गन्ने की कीमत दे नहीं रहा, वह जान की कीमत क्या जाने। कहा कि गर्दन कटा देना, बीजेपी को वोट मत देना।
निजी चैनल के पत्रकार ने छोड़ी नौकरी
महापंचायत में एक निजी चैनल के पत्रकार रक्षित चौधरी ने कहा कि आज सच्चाई को दिखाने नहीं दिया जा रहा है। इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने कहा कि हो सकता है मुझ पर मुकदमे दर्ज हों, सोशल मीडिया पर मेरा चरित्र हनन किया जाए, लेकिन मैं सच के साथ रहूंगा।
मीडियाकर्मी से हाथापाई का आरोप
महापंचायत में मेरठ से एक चैनल के मीडियाकर्मी ने पंचायत में कुछ लोगों पर हाथापाई तथा कैमरा छीनने का प्रयास का आरोप लगाया। आयोजक रालोद नेता चौधरी रतन सिंह ने आरोप को निराधार बताया। कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह राठौर ने भी ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया।
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भैंसा गांव (मवाना)। किसान महापंचायत के बहाने जयंत चौधरी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव पर भी बात की। कहा, हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र से जो जीतता है, वहीं प्रदेश में राज करता है। आपको देखना है कि किससे पक्ष में रहना है। आपने फैसला ले लिया होगा। भाजपा के लोग आपको समझाने आएंगे। इनके मन में कालापन है, इसी वजह से ये राज कर रहे हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिले के सोरम गांव का जिक्र करते हुए कहा कि ये लोग फिर उसी रास्ते पर चल पड़े हैं। क्या तुम पिटना बर्दाश्त करोगे? खेती करने वाले लोगों को अपनी राजनीतिक धार तेज करनी है। पहले जो गलती की, अगली बार मत दोहराना। भाजपा सरकार सब कुछ प्राइवेट करती जा रही है। इसके बाद सरकारी नौकरियों और आरक्षण का कोई मायने नहीं रह जाएगा।
महापंचायत में उन्होंने पहले फैसले में कहा कि हम इन तीन कृषि कानूनों को नहीं मानते हैं। ये असांविधानिक हैं। न्यायालय इस ओर ध्यान दे। दूसरे फैसले में उन्होंने कहा कि सरकार एमएसपी पर कानून बनाए और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करे। तीसरे फैसले में कहा कि आंदोलन में शामिल 80 साल के किसानों को जेलों में बंद किया जा रहा है। गांव-गांव आंदोलन में शामिल होने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है। तुरंत बंद किया जाए। साथ ही आंदोलन में शहीद किसानों को सम्मान दिया जाए।
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फूल रोते रहे, शूल हंसते रहे...
जयंत ने 27 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा। कहा, एक ओर अडानी एक ओर अंबानी और स्टेडियम का नाम मोदी। ऐसे ही मूर्ति लगवाने का काम बसपा ने किया था। जो दोबारा नहीं आई। उप्र के मुख्यमंत्री को मुगल इतिहास का प्रोफेसर बताया। संबोधन का अंत उन्होंने कुलदीप सिंह की कविता से किया। पढ़ा- ‘फूल रोते रहे, शूल हंसते रहे, आत्मा चाहे मरे, ऐसा उत्थान हमें नहीं चाहिए, अपने दुख से दुखी, अपने सुख से सुखी, पूंजीपतियों के अलावा न दिखता कोई, देश बिक जाए, उनको कुछ गम नहीं, ऐसा सुल्तान हमको नहीं चाहिए।’
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जाट और मुस्लिम का दिखा गठबंधन
महापंचायत में जाट और मुस्लिम समुदाय का गठबंधन साफ नजर आया। हालांकि पंचायत में 36 बिरादरी के लोगोें के शामिल होने का दावा किया गया था लेकिन बहुतायत में जाट और मुस्लिम का गठबंधन दिखा। समुदाय विशेष के लोगों ने अपनी उपस्थित और ताकत दिखाने के लिए विशेष टोपी लगाई हुई थी।
भैंसा बुग्गी से पहुंचे जयंत चौधरी
जयंत महापंचायत स्थल से दो सौ मीटर पहले कार से उतरकर भैंसा बुग्गी पर सवार होकर महापंचायत में पहुंचे। मंच पर पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया गया। मेहरपाल ने उन्हें हैंडपंप भेंट किया।
सोशल मीडिया पर छाए हरेंद्र ताऊ भी पहुंचे
दिल्ली के गाजीपुर बोर्डर से सोशल मीडिया पर छाए गांव मसूरी निवासी हरेंद्र ताऊ भी पंचायत में पहुंचे। उन्होंने कहा कि जो गन्ने की कीमत दे नहीं रहा, वह जान की कीमत क्या जाने। कहा कि गर्दन कटा देना, बीजेपी को वोट मत देना।
निजी चैनल के पत्रकार ने छोड़ी नौकरी
महापंचायत में एक निजी चैनल के पत्रकार रक्षित चौधरी ने कहा कि आज सच्चाई को दिखाने नहीं दिया जा रहा है। इस्तीफा देने के साथ ही उन्होंने कहा कि हो सकता है मुझ पर मुकदमे दर्ज हों, सोशल मीडिया पर मेरा चरित्र हनन किया जाए, लेकिन मैं सच के साथ रहूंगा।
मीडियाकर्मी से हाथापाई का आरोप
महापंचायत में मेरठ से एक चैनल के मीडियाकर्मी ने पंचायत में कुछ लोगों पर हाथापाई तथा कैमरा छीनने का प्रयास का आरोप लगाया। आयोजक रालोद नेता चौधरी रतन सिंह ने आरोप को निराधार बताया। कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह राठौर ने भी ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया।