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यूपी: सरकारी विद्यालयों पर पड़ रहे भारी फर्जी स्कूल...विद्यार्थियों की संख्या करीब डेढ़ लाख

Mon, 15 Jul 2019 10:57 AM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 15 Jul 2019 10:57 AM IST
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Invalid schools in UP takes over Government Schools
स्कूलों में विद्यार्थी - फोटो : अमर उजाला
सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने और बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन सच्चाई यही है कि फर्जी (अमान्य) स्कूल सरकारी स्कूलों पर भारी पड़ रहे हैं। जिले के 1342 विद्यालयों में करीब 1.23 लाख बच्चे पढ़ते हैं, जबकि करीब 500 फर्जी स्कूलों में ही विद्यार्थियों की संख्या करीब डेढ़ लाख है। 
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सरकारी स्कूलों में पढ़ाई से लेकर यूनिफार्म तक सब कुछ फ्री है, फिर भी बच्चों की संख्या कम है। जबकि फर्जी स्कूलों में मोटी फीस भी भरनी पड़ती है। इससे साफ है कि कहीं न कहीं सरकारी स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता का अंतर है। हालांकि सरकार ने सभी गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए हुए हैं। माना जा रहा है कि फर्जी स्कूलों के बंद होने से सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में सुधार आएगा। 
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फर्जी बनाम सरकारी
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के 1342 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.23 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। जबकि 500 से ज्यादा गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में डेढ़ लाख से अधिक बच्चे पढ़ रहे हैं। हर मोहल्ले या कॉलोनी में ऐसे स्कूल आपको मिल जाएंगे, जहां का भवन बहुत सुंदर होगा। बच्चों के लिए सहूलियत देने के दावे होंगे। लेकिन इन स्कूलों को सरकार की मंशा के अनुरूप बंद कर दिया जाए, तो सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या ढाई लाख से अधिक पहुंच जाएगी। वहीं निजी स्कूलों में फीस और किताबों के नाम पर लुटना भी नहीं पड़ेगा। 

संसाधन हैं, गुणवत्ता नहीं
सवाल उठता है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षा मुफ्त है और अब संसाधन भी बेहतर हैं तो क्यों अभिभावक अपने बच्चों को महंगी शिक्षा दिला रहे हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि सरकारी स्कूलों में संसाधन तो उपलब्ध करा दिए गए। लेकिन शैक्षिक गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षक अभी भी उपस्थिति और कक्षा में पढ़ाने के प्रति लापरवाह बने हुए हैं। 

सरकारी से बहुत कम वेतन
सरकारी स्कूलों में विशिष्ट बीटीसी भर्ती से आए काफी शिक्षक-शिक्षिकाएं अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हैं और अंग्रेजी जानते भी हैं। ऐसे में सरकारी विद्यालयों में व्यवस्था और शिक्षा का स्तर सुधरे तो अभिभावकों का ध्यान स्वत: ही इन स्कूलों की तरफ होना शुरू हो जायेगा। इन सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का औसत वेतन करीब 50 हजार रुपये प्रति माह है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में शिक्षक का औसत वेतन तीन हजार रुपये मासिक है। फिर भी इन स्कूलों के शिक्षक बेहतर शिक्षा का माहौल बनाकर सरकारी स्कूलों को आइना दिखा रहे हैं। 

अभियान का असर, बढ़े छात्र 
सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने शारदा, प्रेरणा और स्कूल चलो अभियान चलाया है। जिसके तहत शिक्षकों ने डोर-टू-डोर पहुंचकर स्कूल न आने वाले बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इसका असर रहा कि पिछले साल से छात्र-छात्राओं की संख्या 1,21,503 से बढ़कर 1.23 लाख पहुंच गई है।    

जिले में स्कूलों का ब्योरा
सरकारी प्राथमिक स्कूल     910
सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूल     432 
मान्यता प्राप्त स्कूल     1200
गैर मान्यता स्कूल     500
(गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या बीएसए दफ्तर के सूत्रों के अनुसार है।)

ये है फर्जी स्कूलों का खेल
जनपद में 1200 से ज्यादा स्कूल मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन इन्हें सरकारी स्तर पर कोई भी सहायता प्राप्त नहीं होती है। ऐसे में ये मान्यता प्राप्त स्कूल अपने यहां गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में आने वाले बच्चों के प्रवेश दर्शाकर उनसे एकमुश्त शुल्क वसूलते हैं। इस खेल में कुछ तो मान्यता प्राप्त स्कूल ऐसे हैं, जो अब पूरी तरह हवा में चल रहे हैं। इनकी मान्यता के आधार पर कई फर्जी स्कूल जनपद में संचालित हैं। इन्हीं मान्यता प्राप्त स्कूलों की शह पर जनपद में बड़ी संख्या में गली मोहल्लों में फर्जी स्कूलों की बाढ़ सी आ गई है।

2 माह में बंद कराएंगे फर्जी स्कूल
स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कई अभियान चल रहे हैं। कुछ गैर मान्यता प्राप्त स्कूल बंद भी किए गए हैं, जिसके चलते छात्र संख्या बढ़ी है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का वातावरण बेहतर करने के लिए सख्ती की जाएगी। गैर मान्यता स्कूलों को दो माह में बंद करा दिया जाएगा। - सतेंद्र ढाका, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
 
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