{"_id":"5fe78cf88ebc3e3bb274e7c7","slug":"insas-no-training-spear-guard-in-police-stations-city-news-mrt5175746101","type":"story","status":"publish","title_hn":"थानों में थ्री नॉट थ्री राइफल की विदाई के बाद भाले के सहारे पहरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
थानों में थ्री नॉट थ्री राइफल की विदाई के बाद भाले के सहारे पहरा
विज्ञापन
मेरठ। पुलिस महकमे से थ्री नॉट थ्री राइफल की विदाई के बाद थानों में भाले से पहरा दिया जा रहा है। बात कुछ अजीब सी लगती है, लेकिन सच है। सिपाही और होमगार्ड के हाथ में भाला दिखने के बाद ब्रिटिश हुकूमत की याद ताजा हो गई है, जहां भाले से पहरा दिया जाता था। अब थ्री नॉट थ्री की जगह इंसास ने ले तो ली लेकिन ट्रेनिंग न मिल पाने के कारण उनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है।
पुलिस में अंग्रेजी हुकूमत के समय थ्री नॉट थ्री राइफल का अपना रुतबा रहा है। समय के साथ अत्याधुनिक हथियार पुलिस का हिस्सा बन गए। इसी के चलते लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाने वाली थ्री नॉट थ्री को भी 26 जनवरी को विदाई दे दी गई। आखिरी समय में यह होमगार्ड विभाग का हिस्सा रहीं। इसके बाद इंसास को शामिल किया गया। लेकिन इंसास अभी भी होमगार्ड की पहुंच से दूर है। इसके चलते मालखाने में रखे भाले के जरिए थानों में पहरा दिया जा रहा है।
ट्रेनिंग न मिलना भी बड़ी वजह
होमगार्ड को थ्री नॉट थ्री राइफल की जगह इंसास दी जानी थीं। इसके लिए सभी थानों को इंसास राइफल उपलब्ध भी करा दी गईं। लेकिन होमगार्ड को इंसास चलाने का अनुभव नहीं था, इसलिए वह उन्हें नही दी गई। सुपुर्दगी से पहले इनकी ट्रेनिंग होमगार्ड को दी जानी है, जिसका कार्यक्रम अभी तक तय नहीं हुआ है।
विज्ञापन
डंडों के सहारे हो रही ड्यूटी
जनपद में करीब 1900 होमगार्ड ड्यूटी देते हैं। इनमें करीब 800 ऐसे हैं जो थानों पर ड्यूटी देते हैं और इनमें से काफी के पास थ्री नॉट थ्री राइफल ड्यूटी का हिस्सा रही है। फिलहाल यह होमगार्ड खाली हाथ हैं और केवल डंडों के सहारे ड्यूटी दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि होमगार्ड को ट्रेनिंग देने वाले खुद अभी लखनऊ में इंसास की ट्रेनिंग ले रहे हैं, फिर वह होमगार्डों को इसकी ट्रेनिंग देंगे।
नए सत्र में होगा प्रशिक्षण
करीब 400 होमगार्ड थ्री नॉट थ्री का प्रयोग करते थे, जिन्हें इंसास राइफल दी जानी हैं। कुछ ही राइफल मिली हैं, जो प्रशिक्षण के लिए हैं। कोरोना के चलते प्रशिक्षण नहीं हो सका। संभवत: नए सत्र में प्रशिक्षण होगा। - अशोक चौधरी, एडीसी होमगार्ड, मेरठ
विज्ञापन
पुलिस में अंग्रेजी हुकूमत के समय थ्री नॉट थ्री राइफल का अपना रुतबा रहा है। समय के साथ अत्याधुनिक हथियार पुलिस का हिस्सा बन गए। इसी के चलते लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाने वाली थ्री नॉट थ्री को भी 26 जनवरी को विदाई दे दी गई। आखिरी समय में यह होमगार्ड विभाग का हिस्सा रहीं। इसके बाद इंसास को शामिल किया गया। लेकिन इंसास अभी भी होमगार्ड की पहुंच से दूर है। इसके चलते मालखाने में रखे भाले के जरिए थानों में पहरा दिया जा रहा है।
विज्ञापन
ट्रेनिंग न मिलना भी बड़ी वजह
होमगार्ड को थ्री नॉट थ्री राइफल की जगह इंसास दी जानी थीं। इसके लिए सभी थानों को इंसास राइफल उपलब्ध भी करा दी गईं। लेकिन होमगार्ड को इंसास चलाने का अनुभव नहीं था, इसलिए वह उन्हें नही दी गई। सुपुर्दगी से पहले इनकी ट्रेनिंग होमगार्ड को दी जानी है, जिसका कार्यक्रम अभी तक तय नहीं हुआ है।
विज्ञापन
डंडों के सहारे हो रही ड्यूटी
जनपद में करीब 1900 होमगार्ड ड्यूटी देते हैं। इनमें करीब 800 ऐसे हैं जो थानों पर ड्यूटी देते हैं और इनमें से काफी के पास थ्री नॉट थ्री राइफल ड्यूटी का हिस्सा रही है। फिलहाल यह होमगार्ड खाली हाथ हैं और केवल डंडों के सहारे ड्यूटी दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि होमगार्ड को ट्रेनिंग देने वाले खुद अभी लखनऊ में इंसास की ट्रेनिंग ले रहे हैं, फिर वह होमगार्डों को इसकी ट्रेनिंग देंगे।
नए सत्र में होगा प्रशिक्षण
करीब 400 होमगार्ड थ्री नॉट थ्री का प्रयोग करते थे, जिन्हें इंसास राइफल दी जानी हैं। कुछ ही राइफल मिली हैं, जो प्रशिक्षण के लिए हैं। कोरोना के चलते प्रशिक्षण नहीं हो सका। संभवत: नए सत्र में प्रशिक्षण होगा। - अशोक चौधरी, एडीसी होमगार्ड, मेरठ