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Meerut News: कथा में राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। इंदिरानगर छोटा शिव मंदिर में चल रही भागवत कथा में राधा चेतन महाराज ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित को श्राप मिला कि वे सात दिन में मृत्यु को प्राप्त होंगे, तब उन्होंने गंगा तट पर बैठकर शुकदेव जी से भागवत कथा सुनी। उसी कथा के श्रवण से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
उन्होंने परीक्षित और सुखदेव जन्म का विस्तार से वर्णन करते हुए माता पार्वती को सुनाई गई अमर कथा का भी वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित, अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र थे। जब महाभारत युद्ध समाप्त हुआ तब अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर ब्रह्मास्त्र चलाया। इससे उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु परीक्षित का नाश हो गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से उस मृत शिशु को पुनः जीवित कर दिया। इस प्रकार परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित नाम इसलिए पड़ा क्योंकि वे जन्म के बाद हर व्यक्ति में भगवान श्रीकृष्ण को खोजते थे। इस दौरान सुखदेव कथा का भी वर्णन किया। इस अवसर पर सुशील, प्रवेश पालीवाल, सुरेंद्र, संदीप, संजय वर्मा, गीता वर्मा, आशु आदि रहे।
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मेरठ। इंदिरानगर छोटा शिव मंदिर में चल रही भागवत कथा में राधा चेतन महाराज ने राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित को श्राप मिला कि वे सात दिन में मृत्यु को प्राप्त होंगे, तब उन्होंने गंगा तट पर बैठकर शुकदेव जी से भागवत कथा सुनी। उसी कथा के श्रवण से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
उन्होंने परीक्षित और सुखदेव जन्म का विस्तार से वर्णन करते हुए माता पार्वती को सुनाई गई अमर कथा का भी वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया कि राजा परीक्षित, अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र थे। जब महाभारत युद्ध समाप्त हुआ तब अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर ब्रह्मास्त्र चलाया। इससे उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु परीक्षित का नाश हो गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से उस मृत शिशु को पुनः जीवित कर दिया। इस प्रकार परीक्षित का जन्म हुआ। परीक्षित नाम इसलिए पड़ा क्योंकि वे जन्म के बाद हर व्यक्ति में भगवान श्रीकृष्ण को खोजते थे। इस दौरान सुखदेव कथा का भी वर्णन किया। इस अवसर पर सुशील, प्रवेश पालीवाल, सुरेंद्र, संदीप, संजय वर्मा, गीता वर्मा, आशु आदि रहे।
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