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फेफड़ों में पानी भरे तो पहले सही जांच कराएं: डॉ. वीरोत्तम तोमर
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। छाती व सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर में कहा कि फेफड़ों में पानी कई कारणों से भरता है। पहले इसकी सही जांच कराएं, तब इलाज शुरू करें। उन्होंने थोरकोस्कोपी जैसे अत्याधुनिक जांच के महत्व पर भी जोर दिया। इसमें एक बारीक दूरबीन के माध्यम से फेफड़े की झिल्ली का सीधे निरीक्षण और सफाई की जा सकती है।
डॉ. तोमर को आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (एएफएमसी) पुणे में आयोजित त्रिदिवसीय नेशनल पल्मोनरी कांफ्रेंस में व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया गया था। डॉ. तोमर ने बताया कि इस कांफ्रेंस में देशभर से 700 से अधिक चिकित्सक व छाती रोग विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने व्याख्यान में फेफड़ों में पानी भरने यानी प्लूरल इफ्यूजन की समस्या पर विस्तार से जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि फेफड़ों की झिल्ली में पानी आमतौर पर क्षयरोग (टीबी), संक्रमण या निमोनिया से आता है। इसके साथ ही कैंसर, हार्ट फेलियर, किडनी व लिवर फेलियर, खून की कमी, प्रोटीन की कमी, थायराइड रोग, गठिया तथा अन्य कई वजहों से भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी का सही कारण पता लगाए बिना दी जाने वाली केवल दवाओं से कई बार स्थिति बिगड़ जाती है। यदि समय रहते पानी को विशेष प्रक्रिया से बाहर न निकाला जाए तो यह मवाद में बदलकर फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को बड़ी सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है। सुन्न करने की दवा देकर बिना कष्ट के फेफड़ों से पानी निकाला जा सकता है।
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