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घुड़सवारों ने दिलाया सिल्वर मेडल, श्वान कर रहे सरहद की रखवाली

Tue, 15 Dec 2020 01:53 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 15 Dec 2020 01:53 AM IST
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Horsemen get silver medal, guarding the frontier by dog
मेरठ। छावनी स्थित आर्मी रिमाउंट कोर की स्थापना हुए सोमवार को 242 वर्ष पूरे हो गए। हालांकि कोविड-19 के चलते इस बार कार्यक्रम बेहद सादगी से हुआ। आरवीसी सेंटर के घुड़सवारों ने जहां एशियन खेलों में देश को सिल्वर मेडल दिलाया है, वहीं यहां ट्रेनिंग लेने वाले बहादुर श्वान सरहद पर रखवाली कर रहे हैं।
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आरवीसी का अस्तित्व वर्ष 1779 से है। ब्रिटिश सेना में पहले अश्वों का विभाग कोलकाता में गठित हुआ था। आर्मी रिमाउंट डिपार्टमेंट का गठन सन 1875 में सहारनपुर में किया गया। 14 दिसंबर 1920 को आर्मी वेटनरी कोर बनाई गई। साल 1950 में रिमाउंट वेटनरी और फार्म कोर गठित हुई। मई 1960 में आरवीसी और मिलिट्री फार्म को अलग कर दिया गया।
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आरवीसी ने सेना, पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस को भी उच्च नस्ल के प्रशिक्षित श्वान और अश्व दिए हैं। यहां प्रशिक्षित श्वानों ने पिछले कई सालों में कितने ही आतंकियों को पकड़ने में अहम भूमिका निभाई है। लद्दाख में बादल फटने पर आरवीसी के श्वान ने 35 लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद की थी। सेना के पशुओं की चिकित्सा के क्षेत्र में भी आरवीसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
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देशी नस्ल के श्वान को भी किया जा रहा है ट्रेंड
आरवीसी में पहले जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर जैसी नस्लों के श्वान को ट्रेंड किया जाता था। अब भारतीय नस्ल के श्वान मुधोल को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। छह महीने से नौ महीने की उम्र के श्वान को कठोर ट्रेनिंग दी जाती है। इन श्वान की दिनचर्या सुबह चार बजे से शुरू हो जाती है। स्पेशल ट्रेनिंग के बाद उनका पूरा टेस्ट होता है। जो इस टेस्ट में फेल हो जाते हैं, उनको फिर से कठोर मेहनत करनी होती है। देशभर में यहां के ट्रेंड करीब एक हजार श्वान है।
घुड़सवारों ने किया नाम रोशन
आरवीसी के अश्व की मांग भारत ही नहीं विदेशों में भी है। इन अश्वों के दम पर आरवीसी के जांबाज घुड़सवारों ने साल 2018 में जर्काता में हुए एशियन खेलों में सिल्वर मेडल हासिल किया था।

पूर्व राष्ट्रपति कर चुके हैं सम्मानित
मेरठ में कोठावाला पोलो ग्राउंड पर 21 दिसंबर 1989 को तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने प्रजेंटेशन ऑफ द कलर से आरवीसी को सम्मानित किया था। इसके अलावा यहां के श्वान को जीओसी इन सी कमेंडेशन कार्ड 158, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन 48, वाइस चीफ कमेंडेशन कार्ड 01 और बेस्ट आर्मी एनिमल अवॉर्ड 01 मिल चुका है।
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