होमवर्क अधूरा, पढ़ाई में नहीं लगता बच्चों का मन, ऑनलाइन कक्षाओं से आलसी हुए बच्चे
- स्कूल खुले तो सामने आ रहे ऑनलाइन कक्षाओं के नुकसान
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प्रोजेक्ट वर्क, होमवर्क भी नहीं पूरा
पहले छात्र स्कूल की डायरी व्यवस्थित करने के साथ समय पर होमवर्क, प्रोजेक्ट वर्क सब करते थे। अब छात्रों का समय पर कोई प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता। कक्षा में 30 से 45 मिनट लगकर छात्र बैठ नहीं पाते। बीच में खड़े हो जाते हैं। सीट बदलते हैं। बार-बार बाहर जाने की अनुमति मांगते हैं। छोटी कक्षा में तो बच्चे बीच में ही सो जाते हैं।
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धीरे-धीरे बदलेगी आदत
ऑनलाइन पढ़ाई एक तरह से बच्चों को व्यस्त रखने का साधन थी। जिसमें बच्चे इच्छानुसार शामिल हो रहे थे। इससे आलस की आदत बच्चों में आ गई है जो समय के साथ ही जाएगी। -डॉ. पूनम देवदत्त, मनोवैज्ञानिक
छोटी कक्षाओं में अधिक दिक्कत
कक्षा में बैठकर पढ़ाई के दौरान जो अनुशासन या एकाग्रता बच्चों में आती है वो ऑनलाइन पढ़ाई में काफी घटे हैं। नर्सरी से नवमीं कक्षा के छात्रों में ये बदलाव ज्यादा आए हैं।
-एके दूबे प्रिंसिपल दीवान पब्लिक स्कूल
लिखने, याद करने की क्षमता प्रभावित
ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चों की लिखने की गति घटी है। जो छात्र पहले बोर्ड पर कांसेप्ट देखकर समझ जाते थे वो अब तीन से चार बार मे ंसमझाना पड़ता है। -राहुल केसरवानी सहोदय सचिव
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