#हिंदीहैंहम: हिंदी को लेकर आईएएस अधिकारी से पूछे ये 17 सवाल, पढ़िए जीवन में बहुत काम आएंगे
हिंदी को घृणा की दृष्टि से न देखें, बल्कि सम्मान दें। जो भी विद्यार्थी हिंदी माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं वे स्वयं को कमतर न आंकें, बल्कि आत्मविश्वासी बनें। हिंदी को अपनी मजबूरी नहीं मजबूती बनाएं। हिंदी में भी रोजगार की हजार राहें खुलती हैं। अमर उजाला हिंदी हैं हम अभियान के तहत रविवार को हिंदी में रोजगार की संभावनाएं, चुनौतियां विषय पर संवाद हुआ। हिंदी दिवस की स्वागत बेला में आयोजित लाइव संवाद में 2015 बैच के प्रशासनिक अधिकारी निशांत जैन ने युवाओं के सवालों के जवाब दिए। वर्चुअल संवाद का सजीव प्रसारण अमर उजाला के सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर हुआ। देशभर के युवाओं ने संवाद से जुड़कर निशांत जैन से प्रश्न पूछे।
हिंदी में रोजगार के प्रमुख क्षेत्र
प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, बॉलीवुड गीत, संवाद, कहानी लेखन, अनुवाद, प्रशासनिक सेवाएं, सोशल मीडिया, कंटेंट राइटर, शिक्षक, लेखक, यूट्यूबर, भाषा अधिकारी, विसापनों के जिंगल लेखन, डिजिटल मार्केटिंग, प्रूफ रीडिंग, कविता लेखन, सामाजिक संस्थाओं, दलों के लिए कंटेंट लेखक बन सकते हैं। राज्य व केंद्र सरकार की विभिन्न सरकारी नौकरियों में आवेदन कर सकते हैं।
नियमित पढ़ें हिंदी अखबार
निशांत जैन ने कहा कि प्रशासनिक परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए नियमित रूप से हिंदी का अखबार अवश्य पढ़ें। मैं स्वयं अमर उजाला को बचपन से पढ़ता आया हूं। परीक्षा की तैयारी के लिए भी मैंने नियमित अखबार पढ़ा। आज भी मेरी सुबह की शुरुआत अखबार के साथ ही होती है।
हिंदी में आठ लाख छात्र फेल क्यों
निशांत ने कहा कि यूपी बोर्ड में हिंदी में युवाओं का फेल होना आश्चर्य की बात है। अभिभावक बचपन से ही बच्चों को हिंदी से दूर कर देते हैं, निजी स्कूलों में हिंदी नहीं पढ़ाते। परिवार, आम बोलचाल में हिंदी भी सिखाएं।
पाठकों के सवाल और जवाब
प्रश्न: हिंदी में लेखन की गति कैसे बढ़ाएं? - राहुल
उत्तर: नियमित अभ्यास से लेखन की गति बढ़ेगी। रोमन के बजाय हिंदी को हिंदी में लिखें।
प्रश्न: हिंदी में वेतन कम क्यों है? - निधि
उत्तर: यह एक मिथ है, हिंदी के सभी क्षेत्र में अच्छी आय है।
प्रश्न: नई शिक्षा नीति से क्या हिंदी का स्तर सुधरेगा? - संजीव कुमार
उत्तर: नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में शिक्षा की बात है, जो यकीनन हिंदी को बढ़ावा देगी। इसका मनोवैज्ञानिक असर भी पड़ेगा।
प्रश्न: आर्थिक रूप से पिछड़े युवा प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी कैसे करें? अर्तिका
उत्तर: कोचिंग के बजाय आप सभी विषयों की प्रमाणित किताब, नवीं से बारहवीं की एनसीईआरटी की किताबें, जीएस की किताब लेकर पढ़ें। सोशल माडिया से भी अच्छा कंटेंट ले सकते हैं। टेस्ट सीरीज ले सकती हैं।
प्रश्न: प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में बदलना ठीक है? - राजरानी शर्मा
उत्तर: पढ़ाई का हर माध्यम अच्छा है, बशर्ते अन्य भाषा के साथ हिंदी को भी पूरा पढ़ाएं।
प्रश्न : प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सबसे ज्यादा क्या महत्व रखता है? - माही
उत्तर : अंग्रेजी, मैथ्स रीजनिंग का ज्ञान जरूरी है। आप अंग्रेजी से भाग नहीं सकते। एक या दो अखबार को दिन में अवश्य पढ़ें। दैनिक रूप से एक मासिक पत्रिका पढ़ें, ताकि देश और दुनिया की तमाम जानकारियां आपको मिल सकें।
प्रश्न : आज जब युवा ऐसी नौकरी चाहते हैं कि सफलता जल्दी मिले, ऐसे में भाषा के माध्यम से अपना जीवन सफल बनाना कितना उपयुक्त है? - निधि भाकुनी
उत्तर : हिंदी लेखन में काफी संभावनाएं बढ़ी हैं। अनुवाद में काफी काम है। एडिटिंग, प्रूफ रीडिंग आदि में काफी विकल्प हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें अब हिंदी में आ रही हैं और इसका बहुत विशाल बाजार है। जिसमें आप थोड़ी मेहनत के साथ ही अपनी पहचान बना सकते हैं। इसके अलावा पढ़ाई में रिसर्च के क्षेत्र में अपना जीवन सफल बना सकते हैं।
प्रश्न : बच्चों में हिंदी भाषा के विकास के लिए क्या करना चाहिए? - संजीव
उत्तर : माता पिता वर्तमान में बच्चे को शुरुआत से ही हिंदी से दूर करने लगते हैं। हम उन्हें काऊ पढ़ाना सिखाते हैं न कि गाय बताएंगे। इसी तरह वह स्कूल में सीखते हैं और इस तरह अंग्रेजी की महत्ता बढ़ जाती है। यदि आपको बच्चे को हिंदी सिखानी है तो आपको हिंदी की पुस्तक उन्हें लाकर दें, कहानियों की किताबें उन्हें लाकर दें। इससे उनका शब्दकोष मजबूत होगा। नए चरित्रों से वे परिचित होंगे।
प्रश्न : अक्सर देखा जाता है कि प्रशिक्षु शिक्षक जो अंग्रेजी मीडियम से आते हैं वह बच्चों को हिंदी पढ़ाने में असहज महसूस करते हैं। उन्हें दोनों भाषाओं के लिए कैसे कुशल बनाया जाना चाहिए? -अर्तिका गुप्ता
उत्तर : हिंदी आत्मा की भाषा है, हिंदी सम्मान की भाषा है। इसके इस्तेमाल में शर्म नहीं होनी चाहिए। लेकिन लोगों के साथ ये समस्या है कि कई बार वह हिंदी का अखबार भी ठीक से नहीं पढ़ पाते। ऐसे में यदि हिंदी कमजोर है तो पत्रिकाएं मंगाकर पढ़ें, यदि कोई प्रशिक्षु शिक्षक हिंदी पढ़ाने में कतराते हैं तो यह उनकी मन की धारणा है। उन्हें इससे उबरना चाहिए।
प्रश्न : हिंदी बोलने में लोग शर्म महसूस क्यों करते हैं? - पीयूष गोयल
उत्तर : हिंदी के प्रति हीन भावना से हमें उबरना होगा। दक्षिण भारत में देखेंगे तो वहां के लोग तीन भाषाएं सीखते हैं, ऐसे में हमें कम से कम दो भाषाओं का तो ज्ञान होना ही चाहिए। अंग्रेजी को बढ़ावा दें, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि आप हिंदी को नजरअंदाज करें। हिंदी आत्मा की भाषा है, हिंदी सम्मान की भाषा है।
प्रश्न: अधिकांश आयोजनों की एंकरिंग अंग्रेजी में क्यों? - सावन कनौजिया
उत्तर: हिंदी में एंकरिंग, संवाद, भाषण अधिक प्रभावी होता है, इसलिए संचालन में हिंदी को प्राथमिकता दें।
प्रश्न: हिंदी के दो तीन उपन्यास या लेखक बताएं, जिन्हें हम पढ़ सकें? - संतोष सरोकारी
जवाब : प्रेमचंद का कोई एक उपन्यास, मोहन राकेश के नाटक, धर्मवीर भारती का गुनाहों का देवता, श्रीलाल शुक्ल का राग दरबारी, नीलोत्पल मृणाल, दिव्यप्रकाश दुबे को पढ़ सकते हैं।
प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी शहर में अंग्रेजी पढ़ने जाते हैं, तो हिंदी कैसे मजबूत होगी? - प्रीति त्यागी
उत्तर: अंग्रेजी पढ़ाना गलत नहीं हैं, लेकिन हिंदी भी सिखाएं।
प्रश्न: नौकरी के साथ तैयारी को कैसे मजबूत करूं ? - दीपक कुमार, सीसीएसयू
जवाब - हिंदी में लगातार नहीं लिखा जाता, कलम बार-बार उठाना पड़ता है। इसलिए रफ्तार नहीं बन पाती। निरंतर अभ्यास करें और नौकरी के साथ तैयारी के लिए वक्त निकालें। छुट्टी के दिन वक्त निकालें, चार से पांच घंटे पढ़ाई पढ़ाई करें।
प्रश्न: ‘रुक जाना नहीं’ के बाद आपकी अगली पुस्तक कब पढ़ने को मिलेगी? नैमिष
उत्तर: फिलहाल अपनी पहली नियुक्ति के अनुभवों का संस्मरण लिख रहा हूं, जो जल्द आपको मिलेगी।
प्रश्न: बारहवीं में हिंदी में 95 फीसदी अंक मिले हैं, क्या इनसे कोई लाभ मिलेगा? सावन कनौजिया
उत्तर: सीधा लाभ फिलहाल नहीं मिलेगा, लेकिन हिंदी में रोजगार बनाने पर इसका लाभ मिलेगा।
प्रश्न: आजादी के सत्तर सालों बाद भी हिंदी देश में दोयम दर्जे की भाषा क्यों हैं?
उत्तर: संविधान सभा में 14 सितंबर को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया, इसलिए हम हिंदी दिवस मनाते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों ने हिंदी में आजादी की लड़ाई लड़ी। आगे चलकर कुछ राज्यों में हिंदी का विरोध होने से इसका प्रयोग कम होना लगा। आज हिंदी महज अनुवाद की भाषा रह गई है।
नैमिष के निवेदन पर सुनाई मेरठ पर लिखी कविता
शहर मेरे तू मेरी मोहब्ब्त, तू है मेरी जान
शहर मेरे तू मेरी मोहब्ब्त, तू है मेरी जान
गंगा-जमुनी आन बान की तू सच्ची पहचान
शहर छावनी में सोया है सदियों का इतिहास
महाभारत से जंग-ए-आजादी तक का अहसास
सन सत्तावन की क्त्रसंति की तूने छेड़ी तान
गंगा-जमुनी आन बान की तू सच्ची पहचान
हिंदी- उर्दू के लफ्जों में तेरी महक समाई
मंत्र, अजान या गुरुबानियां तूने सदा सुनाई
गंगा-जमुनी आन बान की तू सच्ची पहचान
सफलता के दिए जरूरी टिप्स
निशांत जैन ने कहा कि कवि बालकृष्ण ने लिखा है जिनका अपनी मां से ही संवाद नहीं हैं, वे क्या अपनाएंगे अपनी मां की भाषा। इसलिए हिंदी से विमुख न हों। अंग्रेजी सीखें मगर हिंदी न छोड़ें। गदर फिल्म के संवादों से हिंदी का महत्व बताया। मोबाइल की भाषा सेटिंग में जाकर हिंदी का विकल्प चुनें और हिंदी में लिखने की आदत डालें। हिंदी का बाजार गर्म है इसलिए हिंदी में देखना, पढ़ना, सुनना दर्शकों को पसंद है।
अमर उजाला में छपी थी पहली कविता
आठवीं कक्षा में था तो अमर उजाला में एक कॉलम शुरू हुआ था हैलो बच्चा पार्टी। उसमें गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को अपनी कविता लिखकर भेजनी थी। तब मेरी पहली रचना अमर उजाला में ही प्रकाशित हुई थी। एकेडमी में भी मुझे हिंदी साहित्य की वजह से काफी सम्मान मिला।
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