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गंगाजल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की सेहत खराब, महापौर फिर करेंगी निरीक्षण
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गंगाजल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की सेहत खराब, महापौर फिर करेंगी निरीक्षण
मेरठ। जेएनएनयूआरएम योजना के तहत 400 करोड़ रुपये की लागत से भोला की झाल पर बने गंगाजल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की सेहत खराब हो चुकी है। लंबे समय से अनुभवहीन हाथों में चल रही प्लांट के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था से प्लांट जर्जर अवस्था में पहुुंच गया है। करीब चार महीने पहले महापौर के निरीक्षण में मिली 24 खामियां अभी भी जस की तस हैं। इसे संभाल रही जल निगम की नागर इकाई को खामियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे। नाराज महापौर ने फिर से प्लांट का निरीक्षण करने की बात कही है।
जेएनएनयूआरएम योजना से अपर गंग नहर स्थित भोला की झाल पर गंगाजल परियोजना स्थापित की गई है। यहां 100 एमएलडी क्षमता का गंगाजल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है। शहरवासियों तक पानी पहुंचाने के लिए 24.4 किमी लंबी पानी की मुख्य लाइन डाली गई है। नौ भूमिगत जलाशय बनाए गए हैं। लेकिन प्लांट से 35 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो रही है। प्लांट के संचालन और रखरखाव का अधिकार जल निगम की यांत्रिकी शाखा के पास है। लेकिन कार्यदायी संस्था जल निगम की नागर इकाई ही इस पर कुंडली मारे बैठी है, जिसे प्लांट के संचालन और रखरखाव का अनुभव नहीं है। नगर निगम इस संस्था को 27 लाख रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान कर रही है। अमर उजाला में प्लांट के जर्जर होने का खुलासा होने के बाद गत पांच सितंबर को महाप्रबंधक जलकल रतन लाल के निरीक्षण में प्लांट की खामियां जस की तस मिली हैं।
यांत्रिकी शाखा से मांगा प्रस्ताव
महाप्रबंधक जलकल रतन लाल ने प्लांट को जल निगम की यांत्रिकी शाखा को सौंपने की तैयारी की है। उन्होंने यांत्रिकी शाखा को पत्र भेजकर प्लांट के संचालन ओर रखरखाव का प्रस्ताव मांगा है। शाखा ने प्रस्ताव पर हामी भरते हुए जर्जर प्लांट को ठीक कराकर देने या इस पर होने वाला खर्च मिलने पर ही लेने की बात कही है।
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क्या बोली महापौर
महापौर सुनीता वर्मा का कहना है कि मई में किए निरीक्षण में ट्रीटमेंट प्लांट की हालत 24 बिंदुओं पर खराब मिली थी। इन्हें दुरुस्त करने को कहा गया था। लेकिन नागर इकाई ने अभी तक इस पर ध्यान नहीं दिया। अब जल्द ही प्लांट का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। जनता के पैसे को इस तरह बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।
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मेरठ। जेएनएनयूआरएम योजना के तहत 400 करोड़ रुपये की लागत से भोला की झाल पर बने गंगाजल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की सेहत खराब हो चुकी है। लंबे समय से अनुभवहीन हाथों में चल रही प्लांट के संचालन और रखरखाव की व्यवस्था से प्लांट जर्जर अवस्था में पहुुंच गया है। करीब चार महीने पहले महापौर के निरीक्षण में मिली 24 खामियां अभी भी जस की तस हैं। इसे संभाल रही जल निगम की नागर इकाई को खामियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे। नाराज महापौर ने फिर से प्लांट का निरीक्षण करने की बात कही है।
जेएनएनयूआरएम योजना से अपर गंग नहर स्थित भोला की झाल पर गंगाजल परियोजना स्थापित की गई है। यहां 100 एमएलडी क्षमता का गंगाजल वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है। शहरवासियों तक पानी पहुंचाने के लिए 24.4 किमी लंबी पानी की मुख्य लाइन डाली गई है। नौ भूमिगत जलाशय बनाए गए हैं। लेकिन प्लांट से 35 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो रही है। प्लांट के संचालन और रखरखाव का अधिकार जल निगम की यांत्रिकी शाखा के पास है। लेकिन कार्यदायी संस्था जल निगम की नागर इकाई ही इस पर कुंडली मारे बैठी है, जिसे प्लांट के संचालन और रखरखाव का अनुभव नहीं है। नगर निगम इस संस्था को 27 लाख रुपये प्रतिमाह की दर से भुगतान कर रही है। अमर उजाला में प्लांट के जर्जर होने का खुलासा होने के बाद गत पांच सितंबर को महाप्रबंधक जलकल रतन लाल के निरीक्षण में प्लांट की खामियां जस की तस मिली हैं।
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यांत्रिकी शाखा से मांगा प्रस्ताव
महाप्रबंधक जलकल रतन लाल ने प्लांट को जल निगम की यांत्रिकी शाखा को सौंपने की तैयारी की है। उन्होंने यांत्रिकी शाखा को पत्र भेजकर प्लांट के संचालन ओर रखरखाव का प्रस्ताव मांगा है। शाखा ने प्रस्ताव पर हामी भरते हुए जर्जर प्लांट को ठीक कराकर देने या इस पर होने वाला खर्च मिलने पर ही लेने की बात कही है।
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क्या बोली महापौर
महापौर सुनीता वर्मा का कहना है कि मई में किए निरीक्षण में ट्रीटमेंट प्लांट की हालत 24 बिंदुओं पर खराब मिली थी। इन्हें दुरुस्त करने को कहा गया था। लेकिन नागर इकाई ने अभी तक इस पर ध्यान नहीं दिया। अब जल्द ही प्लांट का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा। जनता के पैसे को इस तरह बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा।