गुदड़ी बाजार तिहरा हत्याकांड: तीन बेटों के लहू को इंसाफ की आस, हाई कोर्ट ने निचली अदालत से मांगा स्टेटस
मई 2008 को थाना कोतवाली क्षेत्र के गुदड़ी बाजार में तीन छात्रों की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई थी। तीनों के शव को कार की डिग्गी में डालकर हत्यारोपियों ने बिनौली नहर के पास फेंक दिए थे। इस हत्याकांड ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मुकदमे का स्टेटस मांगा है।
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इन तीन परिवारों की पीड़ा को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। दर्द इतना है कि 16 बरस से कोई दिन ऐसा नहीं बीता जब इन घरों में अपनों को याद करके सिसकियां नहीं सुनाई दी हों।
गुदड़ी बाजार में कत्ल किए गए सुनील ढाका, सुधीर उज्ज्वल और पुनीत गिरी के परिजनों के आंसू इतने सालों बाद भी सूखे नहीं हैं। तीनों का नाम लेते ही परिजनों का गला भर्रा जाता है। वे इतना ही कहते हैं कि अदालत के फैसले का इंतजार है। वे इंसाफ चाहते हैं। उनके बच्चों को जानवरों की तरह बेरहमी से कत्ल करने वाले हत्यारोपियों को सख्त से सख्त सजा चाहते हैं। बेकसूर बेटों का लहू इंसाफ मांग रहा है।
16 बरस से नहीं थम रहे आंसू
27 साल के सुनील ढाका के घर में सबकुछ अच्छा चल रहा था। सुनील को बेटा हुआ तो घर में खुशियां दोगुनी हो गईं। इसी बीच सुनील के पिता राजपाल सिंह का देहांत हो गया। परिवार अभी इसी गम से उबर भी नहीं पाया था कि सुनील की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
बड़े भाई दिल्ली पुलिस में कार्यरत अनिल ढाका बताते हैं कि पलभर में सबकुछ बदल गया। सुनील परिवार की जिम्मेदारी संभालने लगा था, लेकिन इस घटना ने परिवार का सुख-चैन ही छीन लिया। सुनील का नाम लेते ही उनकी माता जगवती देवी की आंखें नम हो जाती हैं। गला भर्रा जाता है।
बार-बार बस इतना ही कहती हैं कि 16 साल से कोई दिन ऐसा नहीं बीता जब मेरे बेटे की याद न आई हो। वे कहती हैं कि हमें कानून पर पूरा भरोसा है। जिस तरह से मेरे बच्चे की जान ली गई, उसी तरह से कानून हत्यारोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दे। भाभी बबीता कहती हैं कि सुनील उनके बच्चे की तरह था। हमें इंसाफ चाहिए। भाई सुनील ढाका कहते हैं कि हमें कानून हत्यारोपियों को उनके किए की सजा देगा।
22 साल का पुनीत गिरी मेरठ कॉलेज में एमए का छात्र था। परिजनों ने बहुत से सपने बुन रखे थे। चार बहन-भाइयों में पुनीत सबसे छोटा था। पुनीत के बड़े भाई सतीश गिरी कहते हैं कि इस घटना ने परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया। पुनीत के चाचा एसके गिरी (दिल्ली पुलिस में एडिशनल डीसी पद से रिटायर्ड) कहते हैं कि उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है। हमारे बच्चे के साथ ऐसी दरिंदगी करने वालों को कानून सख्त से सख्त सजा देगा। पुनीत के पिता राधे किशन गिरी और माता धर्मवती देवी की आंखें नम हैं। वे बस इतना ही बोल पा रहे हैं बेटे के खून का इंसाफ चाहिए।
23 साल का सुधीर उज्जवल मेरठ कॉलेज में प्रोफेसर चाचा पूरन सिंह उज्जवल के पास रहकर बीबीए की पढ़ाई कर रहा था। दो भाइयों में सुधीर बड़ा था। उसकी हत्या के बाद परिवार के सारे सपने टूट गए। पिता सुरेश और माता सुरेशी ने गांव से मेरठ में इसलिए भेजा था कि बेटा पढ़-लिखकर बुढ़ापे का सहारा बनेगा लेकिन इस घटना ने परिवारों की उम्मीदों का भी कत्ल कर दिया। बेटे की हत्या के बाद से परिजन बुरी तरह से टूट गए। वे कहते हैं कि उनके बेटे को बड़ी क्रूरता के साथ मारा गया। ऐसे करने वालों को कानून सख्त से सख्त सजा दे।
23 मई 2008, बागपत और मेरठ जिले की सीमा पर बालैनी नदी के किनारे तीन युवकों के शव पड़े मिले। इनकी पहचान सुनील ढाका(27) निवासी जागृति विहार, पुनीत गिरि(22) निवासी परीक्षितगढ़ रोड और सुधीर उज्जवल(23) निवासी गांव सिरसली, बागपत के रूप में हुई। पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि 22 मई की रात तीनों का गुदड़ी बाजार में हाजी इजलाल कुरैशी के साथ झगड़ा हुआ था।
कुल 14 आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हुई है। इनमें हाजी इजलाल कुरैशी, परवेज और अफजाल पुत्रगण स्वर्गीय इकबाल, मेहराज पुत्र मेहताब, इसरार पुत्र रशीद, कल्लू उर्फ कलुआ पुत्र हाजी अमानत, इजहार, मुन्नू ड्राइवर उर्फ देवेंद्र आहूजा पुत्र विजय, वसीम पुत्र नसरुद्दीन, रिजवान पुत्र स्वर्गीय उस्मान और बदरुद्दीन पुत्र इलाहीबख्श, शम्मी और माजिद के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मुकदमे में बहस पूरी हो गई है। आज इस मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मुकदमे का स्टेट्स मांगा है।