वातावरण के लिए सबसे बड़ी दुश्मन पॉलीथिन का कैंट बोर्ड के इंजीनियर्स ने तोड़ निकाला है। पॉलिथीन और ईंट-पत्थर के कूड़े को तारकोल में मिलाकर लालकुर्ती में स्काउट भवन के बाहर 93 मीटर और जुबली गंज में 42 मीटर सड़क बनाई गई है। यह दोनों सैंपल रोड हैं।
खुशखबर: मेरठ कैंट में प्लास्टिक से बना दीं सड़कें, वातावरण की दुश्मन पॉलिथीन का निकाला तोड़
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दरअसल, दुनिया भर में पॉलिथीन बड़ी समस्या बनती जा रही है। वर्षों तक भी पॉलिथीन के नहीं गलने की वजह से इसका कचरा फैलता जा रहा है। शहर का कोई कोना नहीं बचा है जहां पर पॉलिथीन के कचरे का ढेर न लगा हो। लेकिन देश को सबसे स्वच्छ कैंट बनाने की कवायद में जुटे मेरठ कैंट बोर्ड के इंजीनियर्स ने नई पद्धति को अपनाया है। जिसके चलते प्लास्टिक के कचरे से सड़क और इंटर लॉकिंग टाइल्स बनाने का काम चल रहा था। इसके सैंपल की लगातार जांच कराई जा रही थी।
टेस्टिंग पास हो जाने के बाद मंगलवार को लालकुर्ती में स्काउट भवन के बाहर और जुबली गंज में सड़क बनाई गई। इस दौरान एडम कमांडेंट रोहित पंत, सदस्य रिनी जैन, बुशरा कमाल, मंजू गोयल, नीरज राठौर, अनिल जैन, धर्मेंद्र सोनकर और विपिन सोढ़ी, सीईई अनुज सिंह, एई पीयूष गौतम, जेई अवधेश यादव समेत स्थानीय लोग मौजूद रहे।
ऐसे किया गया काम
एई पीयूष गौतम ने बताया कि सबसे पहले कूड़े से प्लास्टिक के कचरे को अलग किया। इसके बाद इसे साफ कराकर छोटे-छोटे टुकड़े किए गए। हॉट मिक्स प्लांट में रोड़ी में मिक्स करके करीब 140-150 डिग्री पर गर्म किया गया। हॉट ड्रम मिलाने के बाद इसमें इसमे बिटुमन मिलाया गया। तैयार मिश्रण को साइट पर बिछाकर रोलिंग की गई। स्वच्छ भारत अभियान के तहत दो सड़कों को चुना गया है, जिन पर पानी भरने की समस्या से सड़कें टूट जाती हैं।
स्काउट भवन रोड की निर्माण लागत 1.64 लाख रुपये और जुबलीगंज रोड की लागत 94 हजार रुपये आई है। दोनों सड़कों में 238 किलोग्राम पॉलीथिन खप गई। इन पॉलीथिन को ले जाने के लिए तीन ट्रॉलियों की जरूरत पड़ी।
इंटर लॉकिंग टाइल्स लगेंगी
पॉलीथिन के कचरे से टाईल्स भी तैयार की गई हैं। पॉलीथिन और घर से निकलने वाले ईंट-पत्थर के वेस्ट के साथ स्टोन डस्ट मिक्स करके बनाया गया है। एक टाइल्स में 150 से 200 प्लास्टिक के बैग इस्तेमाल में आ जाते हैं। 85 डिग्री तक गर्म करके स्टोन डस्ट में मिक्स करके टाईल्स के सांचे में डाला जाता है।
कैंट में दूसरी जगहों पर भी इस प्रयोग को किया जाएगा। इससे खर्चा तो कम होगा ही, प्लास्टिक को खपाकर हम कैंट को और भी सुंदर बना सकेंगे। -प्रसाद चव्हाण, सीईओ
कैंट बोर्ड लगातार आगे बढ़ रहा है। किस तरह से कैंट को और आगे ले जा सकते हैं इसको लेकर बोर्ड बैठक में सदस्यों के प्रस्ताव लिए जाएंगे। -ब्रि. अनमोल सूद, अध्यक्ष कैंट बोर्ड
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