{"_id":"69c490a974f43b56180291fb","slug":"ghaziabad-spying-case-network-operated-from-nepal-dubai-and-the-us-hindu-names-used-to-conceal-identities-2026-03-26","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: नेपाल, दुबई और अमेरिका से नेटवर्क का संचालन, पहचान छिपाने को हिंदू नाम इस्तेमाल; तीन किस्तों में मिले रुपए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: नेपाल, दुबई और अमेरिका से नेटवर्क का संचालन, पहचान छिपाने को हिंदू नाम इस्तेमाल; तीन किस्तों में मिले रुपए
Thu, 26 Mar 2026 08:06 AM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला, नेटवर्क, शामली
अमर उजाला, नेटवर्क, शामली
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 26 Mar 2026 08:06 AM IST
सार
जासूसी कांड में आईएसआई के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
नेपाल, दुबई और अमेरिका से नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और आईएसआई हैंडलर सरफराज, सरदार के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़ा गया था।
विज्ञापन
Ghaziabad Spying Case
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गाजियाबाद पुलिस द्वारा जासूसी के आरोप में पकड़े गए बुटराड़ा गांव निवासी समीर और अन्य से पूछताछ में आईएसआई के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, यह नेटवर्क नेपाल, दुबई, अमेरिका और बांग्लादेश जैसे देशों से संचालित हो रहा था, जहां बैठे एजेंट भारत के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे थे।
पुलिस के अनुसार, समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और आईएसआई हैंडलर सरफराज, सरदार के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़ा गया था। इन ग्रुपों के जरिए देश-विदेश में रह रहे युवाओं को जोड़कर उन्हें अलग-अलग काम दिए जाते थे। दुबई में बैठे एजेंटों को शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, बिजनौर, हरियाणा और बिहार के अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, ग्रुपों में तबलीगी जमात और अन्य धार्मिक गतिविधियों से संबंधित वीडियो शेयर की जाती थीं ताकि युवाओं को प्रभावित कर उनका ब्रेनवाश किया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि आईएसआई हैंडलर पहचान छिपाने के लिए हिंदू नाम इस्तेमाल कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस के अनुसार, समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और आईएसआई हैंडलर सरफराज, सरदार के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़ा गया था। इन ग्रुपों के जरिए देश-विदेश में रह रहे युवाओं को जोड़कर उन्हें अलग-अलग काम दिए जाते थे। दुबई में बैठे एजेंटों को शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, बिजनौर, हरियाणा और बिहार के अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
विज्ञापन
जांच एजेंसियों के अनुसार, ग्रुपों में तबलीगी जमात और अन्य धार्मिक गतिविधियों से संबंधित वीडियो शेयर की जाती थीं ताकि युवाओं को प्रभावित कर उनका ब्रेनवाश किया जा सके। जांच में यह भी सामने आया है कि आईएसआई हैंडलर पहचान छिपाने के लिए हिंदू नाम इस्तेमाल कर रहे हैं।
विज्ञापन
जांच में यह भी सामने आया है कि इन ग्रुपों को गैंगस्टरों के नाम पर इसलिए बनाया गया ताकि पुलिस को इन पर शक न हो और गतिविधियां आसानी से संचालित होती रहें। ग्रुप में जुड़े युवाओं को धार्मिक स्थलों और सेना से जुड़े स्थानों की फोटो और वीडियो जुटाने के निर्देश दिए जाते थे।
इसके बाद हर तीसरे दिन जूम मीटिंग के जरिए इनकी समीक्षा की जाती थी, जिसमें विदेशों में बैठे सरगना शामिल होते थे। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इन ग्रुपों से जुड़े 250 से लोग पुलिस के रडार पर हैं। मामले की जांच गाजियाबाद पुलिस के साथ मिलकर आगे बढ़ाई जा रही है।
तीन किस्तों में मिले रुपये
एसपी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि समीर को गिरोह की ओर से तीन बार में कुल पांच हजार रुपये दिए गए थे। पहली और दूसरी बार 1500-1500 रुपये, जबकि तीसरी बार 2000 रुपये दिए गए। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम कहां से भेजी गई। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार मीरा ने भी समीर को रकम दी है।
एसपी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि समीर को गिरोह की ओर से तीन बार में कुल पांच हजार रुपये दिए गए थे। पहली और दूसरी बार 1500-1500 रुपये, जबकि तीसरी बार 2000 रुपये दिए गए। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम कहां से भेजी गई। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार मीरा ने भी समीर को रकम दी है।
नाम बदलकर बचने की कोशिश
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आईएसआई हैंडलर अब अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक व्हाट्सएप ग्रुप 'सरदार' नाम से भी संचालित किया जा रहा था। बताया गया कि सरफराज ने खुद का नाम बदलकर 'सरदार' रख लिया था और कुछ सदस्य ऑनलाइन मीटिंग के दौरान माथे पर टीका लगाकर भी लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आईएसआई हैंडलर अब अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक व्हाट्सएप ग्रुप 'सरदार' नाम से भी संचालित किया जा रहा था। बताया गया कि सरफराज ने खुद का नाम बदलकर 'सरदार' रख लिया था और कुछ सदस्य ऑनलाइन मीटिंग के दौरान माथे पर टीका लगाकर भी लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करते थे।