{"_id":"cc0a72ca6084d67d73be666e6a1752b7","slug":"gender-test-case-in-meerut-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉ. सविता पर आरोप सिद्ध तो लगे रासुका : सरोजिनी अग्रवाल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉ. सविता पर आरोप सिद्ध तो लगे रासुका : सरोजिनी अग्रवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 20 Dec 2015 02:17 AM IST
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लिंग परीक्षण मामले में फंसी डॉ. सविता गर्ग की पैरवी करने उतरी उनकी बहन एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से घसीटा जा रहा है। शनिवार को अपने आवास पर बुलाई प्रेस वार्ता में डॉ. सरोजिनी ने कहा कि अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो फिर डॉ. सविता के ऊपर रासुका लगा दी जाए। हालांकि उन्होंने हरियाणा टीम के साथ आए सब इंस्पेक्टर पर तीन लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया।
डॉ. सरोजिनी ने कहा कि जिस वक्त डॉ. सविता गर्ग के क्लीनिक पर छापा मारा गया वो स्वयं लखनऊ में थी। उस दौरान डॉ. सविता के बेटे विदित ने फोन कर उन्हें जानकारी दी कि पुलिस की वर्दी में आए कुछ लोग मम्मी पापा को ले गए हैं, जिसके बाद मेरी तरफ से एसएसपी को फोन कर सारे मामले की जानकारी दी गई थी। क्योंकि मुझे आशंका थी कि कहीं पुलिस की वर्दी में बदमाश तो उठाकर नहीं ले गए हैं।
थोड़ी देर बाद थानाध्यक्ष सिविल लाइन ने फोन कर मुझे जानकारी दी कि वह गाड़ी ट्रेस हो गई है जिसमें डॉ. सविता और उनके पति हैं। हरियाणा की पुलिस ने लिंग परीक्षण के मामले में उठाया है और उनके खिलाफ जींद में केस भी दर्ज है। डॉ. सरोजिनी का कहना है कि उसके बाद न तो हमने किसी पुलिस अधिकारी को फोन किया और न ही थानाध्यक्ष से डॉ. सविता को थाने से छोड़ने को कहा।
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हरियाणा पुलिस ने छोड़ने के लिए थे तीन लाख
डॉ. सरोजिनी अग्रवाल ने हरियाणा पुलिस पर आरोप लगाया है कि डॉ. सविता और उनके पति को छोड़ने की एवज में विदित से तीन लाख रुपये लिए थे। तीन लाख रुपये लेने पुलिस के तीन लोग विदित से मिले थे। बाद में थाना सिविल लाइन पुलिस के सामने हरियाणा पुलिस के दरोगा कुलवंत ने पैसे वापस कतर दिए थे। इसका प्रत्यक्षदर्शी सपा मनोनीत पार्षद नरेश डाबका है। इस दौरान मीडिया के सामने नरेश डाबका ने भी बताया कि हरियाणा पुलिस के दरोगा कुलवंत ने तीन लाख रुपये वापस किए। हालांकि सवाल खड़ा होता है कि अगर डॉ. सविता गर्ग लिंग परीक्षण नहीं कर रहीं थी तो फिर उन्होंने तीन लाख रुपये क्यों दिए। अगर पैसे दिए गए थे तो उसी वक्त पार्षद नरेश डाबका ने रिश्वत देने का मामला क्यों नहीं उठाया, जो सारे मामले को लेकर थाने में चार घंटे तक पैरवी करने में लगे थे। उधर, सारे मामले साफ हो जाता है कि सत्ता के दबाव में सिविल लाइन पुलिस दोनों पक्षों में में मध्यस्ता की भूमिका निभाती रही। अब रिश्वत देने के आरोप में पुलिस की भी जांच होनी चाहिए।
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डॉ. सरोजिनी ने कहा कि जिस वक्त डॉ. सविता गर्ग के क्लीनिक पर छापा मारा गया वो स्वयं लखनऊ में थी। उस दौरान डॉ. सविता के बेटे विदित ने फोन कर उन्हें जानकारी दी कि पुलिस की वर्दी में आए कुछ लोग मम्मी पापा को ले गए हैं, जिसके बाद मेरी तरफ से एसएसपी को फोन कर सारे मामले की जानकारी दी गई थी। क्योंकि मुझे आशंका थी कि कहीं पुलिस की वर्दी में बदमाश तो उठाकर नहीं ले गए हैं।
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थोड़ी देर बाद थानाध्यक्ष सिविल लाइन ने फोन कर मुझे जानकारी दी कि वह गाड़ी ट्रेस हो गई है जिसमें डॉ. सविता और उनके पति हैं। हरियाणा की पुलिस ने लिंग परीक्षण के मामले में उठाया है और उनके खिलाफ जींद में केस भी दर्ज है। डॉ. सरोजिनी का कहना है कि उसके बाद न तो हमने किसी पुलिस अधिकारी को फोन किया और न ही थानाध्यक्ष से डॉ. सविता को थाने से छोड़ने को कहा।
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हरियाणा पुलिस ने छोड़ने के लिए थे तीन लाख
डॉ. सरोजिनी अग्रवाल ने हरियाणा पुलिस पर आरोप लगाया है कि डॉ. सविता और उनके पति को छोड़ने की एवज में विदित से तीन लाख रुपये लिए थे। तीन लाख रुपये लेने पुलिस के तीन लोग विदित से मिले थे। बाद में थाना सिविल लाइन पुलिस के सामने हरियाणा पुलिस के दरोगा कुलवंत ने पैसे वापस कतर दिए थे। इसका प्रत्यक्षदर्शी सपा मनोनीत पार्षद नरेश डाबका है। इस दौरान मीडिया के सामने नरेश डाबका ने भी बताया कि हरियाणा पुलिस के दरोगा कुलवंत ने तीन लाख रुपये वापस किए। हालांकि सवाल खड़ा होता है कि अगर डॉ. सविता गर्ग लिंग परीक्षण नहीं कर रहीं थी तो फिर उन्होंने तीन लाख रुपये क्यों दिए। अगर पैसे दिए गए थे तो उसी वक्त पार्षद नरेश डाबका ने रिश्वत देने का मामला क्यों नहीं उठाया, जो सारे मामले को लेकर थाने में चार घंटे तक पैरवी करने में लगे थे। उधर, सारे मामले साफ हो जाता है कि सत्ता के दबाव में सिविल लाइन पुलिस दोनों पक्षों में में मध्यस्ता की भूमिका निभाती रही। अब रिश्वत देने के आरोप में पुलिस की भी जांच होनी चाहिए।