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UP: गांधीजी आए मिलने और पंडित नेहरू ने की थी पैरवी, दुनियाभर में प्रसिद्ध हुआ था ये केस, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Mon, 16 Jan 2023 08:18 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 16 Jan 2023 08:18 PM IST
सार

Meerut News : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 27 अक्तूबर 1929 को मेरठ पहुंचे और गिरफ्तार आंदोलनकारियों से उनके बैरकों में मिले। उनके साथ दो घंटे का समय बिताया था।

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Gandhiji came to meet and Pandit Nehru lobbied and Meerut conspiracy case became famous all over the world
मेरठ में जेल के बाहर बैठे बंदी बनाए गए क्रांतिधरा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

एक प्राचीन शहर होने के नाते मेरठ को पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों रूप में पहचाना जाता है। 1857 की क्रांति के प्रारंभिक बिंदु के अलावा मेरठ में साल 1929-1933 के बीच श्रमिक आंदोलनकारियों पर मुकदमा चला, जिसे मेरठ षड्यंत्र केस के नाम से जाना जाता है। यह दुनियाभर में इतना प्रसिद्ध हुआ कि ग्रेट ब्रिटेन के लोग भी इसकी ओर आकर्षित हुए और वहां मैनचेस्टर स्ट्रीट थियेटर समूह द रेड मेगफॉन्स ने 1932 में ‘मेरठ’ नामक एक नाटक भी प्रस्तुत किया।

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श्रमिक आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी की खबर ने भारत में सनसनी फैला दी थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 27 अक्तूबर 1929 को मेरठ पहुंचे और गिरफ्तार आंदोलनकारियों से उनके बैरकों में मिले। उनके साथ दो घंटे का समय बिताया। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू एम ए अंसारी और कैलाशनाथ काटजू ने इनकी वकालत की। 
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वरिष्ठ इतिहासकार और इंदिरा गांधी रेवाड़ी यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर जीआर मलिक बताते हैं कि रूस में संचालित हो रहे कम्युनिस्ट इंटरनेशनल संगठन धीरे-धीरे विश्व के अन्य हिस्सों में भी फैलने लगा था। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व के सभी देशों की मौजूदा सरकारों का पतन करना था। अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए इसने ट्रेड यूनियन, युवा संघ, श्रमिकों और किसानों के दलों आदि का निर्माण किया। 

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ग्रेट ब्रिटेन की साम्यवादी पार्टी का भी गठन किया गया। वहीं, 1921 में कुछ कम्युनिस्टों द्वारा ब्रिटिश भारत में इसकी शाखाओं की स्थापना की गई। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल द्वारा भारत में ब्रिटिश फिलिप स्प्रैट, बीएफ ब्रैडली और लेस्टर हचिंसन को भेजा गया, ताकि वे अपने उद्देश्यों को पूरा कर सकें। उन्होंने कम्युनिस्टों के साथ मिलकर कार्यकर्ता और किसान पार्टी का गठन किया। मेरठ में इसका सम्मेलन आयोजित किया। अप्रैल 1928 से ही भारत के मिल मालिकों ने सरकार पर दबाव डाला कि वह कम्यूनिस्टों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। बंगाल और बंबई (अब मंबई) की सरकारों ने भी केंद्रीय सरकार से कम्युनिस्टों के प्रभाव को रोकने के लिए अनुरोध किया।

सरकार ने 1928 में पब्लिक सेफ्टी (लोक सुरक्षा) और ट्रेड यूनियन डिस्प्यूट बिल का अध्यादेश जारी कर दिया और इसका प्रयोग कम्युनिस्टों के खिलाफ किया गया। 20 मार्च 1929 को सरकार ने देश भर से कम्युनिस्ट और मजदूर संघ के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया और उन षड्यंत्र का मुकदमा चलाने के लिए उन्हें मेरठ लाया गया।

मील का पत्थर है मेरठ षड्यंत्र मामला
वरिष्ठ इतिहासकार और मेरठ कॉलेज के पूर्व इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. केडी शर्मा ने बताया कि मेरठ षड्यंत्र मामला एक मील का पत्थर है जो भारत में कम्युनिस्ट आंदोलन के इतिहास को समेटे हुए है। महात्मा गांधी ने कहा था कि इसका उद्देश्य कम्युनिस्टों को समाप्त करना नहीं बल्कि आतंक फैलाना है। 1929 में विश्वव्यापी आर्थिक मंदी का भी इन कम्युनिस्टों के आंदोलन पर गहरा प्रभाव डाला। भारत में मंदी 1936 तक जारी रही। सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद हो गईं और हजारों श्रमिक रोजगार से हाथ धो बैठे। श्रमिक यूनियनों की संख्या में भी भारी कमी आई।

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कानून व्यवस्था भंग होने के डर से मेरठ में चलाया गया मुकदमा
प्रो. जीआर मलिक ने बताया कि ब्रिटिश अधिकारियों ने इस मुकदमे के लिए मेरठ को चुना क्योंकि बंबई और कलकत्ता (अब कोलकोता) कम्युनिस्टों के गढ़ थे। वहां पर मुकदमा चलाने से ब्रिटिश शासकों को कानून व्यवस्था भंग होने का भय था। मेरठ में इस केस की मजिस्ट्रेट के सामने प्रारंभिक कार्यवाही को लगभग सात महीने लगे थे।

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रामचंद्र शर्मा ने किया चंदा अतर सेन ने अखबार में उठाई आवाज
प्रो. जीआर मलिक ने बताया कि श्रमिक आंदोलनकारियों के समर्थन में मेरठ टाउन हाल में बैठक होती थी। इसके अलावा गांवों में भी लोग उनके समर्थन में पंचायतें करते थे। उनकी मदद के लिए भी तत्पर रहते थे। वामपंथी रामचंद्र शर्मा उनके लिए चंदा करते थे। वह बड़ौत से 251 रुपये चंदा लेकर आए थे। अतर सेन पत्रकार थे, वह अपने अखबार देशभक्त में श्रमिकों की आवाज उठाते थे। श्रमिक आंदोलनकारियों पर ब्रिटिश राज को हटाने की योजना तैयार करने और कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के अभियान की योजनाओं का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था।

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