{"_id":"5fee35568ebc3e3dcf01de77","slug":"funeral-pyre-of-three-friends-burnt-together-kithor-news-mrt518319740","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक साथ जलीं तीनों दोस्तों की चिताएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक साथ जलीं तीनों दोस्तों की चिताएं
विज्ञापन
खरखौदा। हापुड़ से किसी कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे बाइक सवार अतराड़ा निवासी तीन युवकों की बुधवार रात रंजीत देवता के सामने सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इन तीनों दोस्तों की अर्थियां बृहस्पतिवार को एक साथ उठीं तो कोहराम मच गया। वहीं, श्मशान में एक साथ मुखाग्नि दी गई। इस दौरान भीड़ को संभालनेेे के लिए पुलिस को हापुड़-किठौर मार्ग पर यातायात रोकना पड़ा।
गांव अतराड़ा निवासी निखिल उर्फ छोटू (22) पुत्र राकेश त्यागी, प्रद्युमन (30) पुत्र परशुराम व मनीष (18) पुत्र देवराज शर्मा बुधवार को हापुड़ से किसी कार्यक्रम में शामिल होकर एक ही बाइक से लौट थे। हापुड़-किठौर रोड पर गांव अतराड़ा में रंजीत देवता के सामने सीमेंट से लदी खराब ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी थी। युवकों की बाइक इससे टकरा गई। जिससे बाइक पर पीछे बैठे प्रद्युमन की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं, निखिल व मनीष ने हापुड़ स्थित निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। प्रद्युमन के शव का मेरठ तथा मनीष व निखिल के शव का हापुड़ में पोस्टमार्टम रात में ही हुआ। निखिल व मनीष का शव पहलेे तथा कुछ देर बाद प्रद्युमन का शव गांव पहुंचा। वहीं, इस मामले में निखिल के ताऊ द्वारा रिपोर्ट दर्ज कर्राई गई है।
तीनों युवकों में गहरी दोस्ती के चलते ग्रामीणों ने उनके शवों को एक साथ श्मशान ले जाने का निर्णय किया। इस पर तीनों की अर्थियां एक साथ उठीं। उनके पीछे हजारों की भीड़ थी। इसके चलते पुलिस को मेरठ-किठौर मार्ग पर यातायात रोक देना पड़ा। तीनों शवों का काली नदी किनारे स्थित श्मशान में अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
तीनों को एक साथ दी मुखाग्नि
अतराड़ा गांव के श्मशान में एक ही टिन शेड है। इसके चलते ग्रामीणों ने तीनों दोस्तों की चिताएं नदी किनारे एक-दूसरे के बगल में लगा दीं। तीनों दोस्तों के शवों को मुखाग्नि भी एक ही साथ दी गई।
बुझ गया इकलौता चिराग
देवराज शर्मा के परिवार में पुत्र मनीष, एक पुत्री तथा पत्नी गुड्डी हैं। देवराज की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उसने कृषि भूमि का कुछ हिस्सा बेचकर बेटी का विवाह कर दिया था। उसने बचे रुपयों से इकलौते बेटे के लिए मकान बनाना शुरू किया। पैसा खत्म हो जाने पर मकान अधूरा रह गया। कई वर्ष पहले चारा काटने समय देवराज का एक हाथ मशीन में आकर कट गया था। अब मनीष माता के जागरण में भजन गाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। मनीष की मौत से परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया। वहीं, माता-पिता के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन
गांव अतराड़ा निवासी निखिल उर्फ छोटू (22) पुत्र राकेश त्यागी, प्रद्युमन (30) पुत्र परशुराम व मनीष (18) पुत्र देवराज शर्मा बुधवार को हापुड़ से किसी कार्यक्रम में शामिल होकर एक ही बाइक से लौट थे। हापुड़-किठौर रोड पर गांव अतराड़ा में रंजीत देवता के सामने सीमेंट से लदी खराब ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी थी। युवकों की बाइक इससे टकरा गई। जिससे बाइक पर पीछे बैठे प्रद्युमन की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं, निखिल व मनीष ने हापुड़ स्थित निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। प्रद्युमन के शव का मेरठ तथा मनीष व निखिल के शव का हापुड़ में पोस्टमार्टम रात में ही हुआ। निखिल व मनीष का शव पहलेे तथा कुछ देर बाद प्रद्युमन का शव गांव पहुंचा। वहीं, इस मामले में निखिल के ताऊ द्वारा रिपोर्ट दर्ज कर्राई गई है।
विज्ञापन
तीनों युवकों में गहरी दोस्ती के चलते ग्रामीणों ने उनके शवों को एक साथ श्मशान ले जाने का निर्णय किया। इस पर तीनों की अर्थियां एक साथ उठीं। उनके पीछे हजारों की भीड़ थी। इसके चलते पुलिस को मेरठ-किठौर मार्ग पर यातायात रोक देना पड़ा। तीनों शवों का काली नदी किनारे स्थित श्मशान में अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
तीनों को एक साथ दी मुखाग्नि
अतराड़ा गांव के श्मशान में एक ही टिन शेड है। इसके चलते ग्रामीणों ने तीनों दोस्तों की चिताएं नदी किनारे एक-दूसरे के बगल में लगा दीं। तीनों दोस्तों के शवों को मुखाग्नि भी एक ही साथ दी गई।
बुझ गया इकलौता चिराग
देवराज शर्मा के परिवार में पुत्र मनीष, एक पुत्री तथा पत्नी गुड्डी हैं। देवराज की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। उसने कृषि भूमि का कुछ हिस्सा बेचकर बेटी का विवाह कर दिया था। उसने बचे रुपयों से इकलौते बेटे के लिए मकान बनाना शुरू किया। पैसा खत्म हो जाने पर मकान अधूरा रह गया। कई वर्ष पहले चारा काटने समय देवराज का एक हाथ मशीन में आकर कट गया था। अब मनीष माता के जागरण में भजन गाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। मनीष की मौत से परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया। वहीं, माता-पिता के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।