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Meerut News: पानी के बीच से गुजरी शव यात्रा, व्यवस्था पर उठे सवाल
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बस्तोंरा नारंग गांव में गंगा के पानी से निकलती शव यात्रा स्रोत संवाद
- बस्तौरा नारंग में श्मशान नहीं, गांव से 10 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर में हुआ अंतिम संस्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। सरकार भले ही शहरों की तर्ज पर गांव को विकसित करने के दावे करती हो परंतु क्षेत्र के बस्तौरा नारंग गांव की स्थिति अलग ही है। यहां मंगलवार को निकली एक शव यात्रा की तस्वीर हैरान करने वाली है। जो गांव के विकास कार्यों के दावों की पोल खोल रही है।
गंगा के बढ़े जलस्तर और लगातार बारिश के कारण खादर क्षेत्र के गांव बस्तौरा नारंग में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव के चारों ओर मुख्य संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भरा होने के कारण मंगलवार को 80 वर्षीय अतरी पत्नी रघुवर की शव यात्रा ग्रामीणों को पानी के बीच से निकालनी पड़ी। दो से तीन फीट पानी में शव लेकर ग्रामीण करीब 10 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर पहुंचे, जहां मृतका का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने गांव में बुनियादी सुविधाओं और जलभराव की स्थायी समस्या को लेकर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, अतरी की मंगलवार को मृत्यु हो गई थी। गांव के चारों ओर गंगा का पानी भरा होने के कारण परिजनों के सामने अंतिम संस्कार की चुनौती खड़ी हो गई। गांव में श्मशान भी नहीं है। गंगा किनारे अंतिम संस्कार करना संभव नहीं था और गांव से बाहर निकलने वाले संपर्क मार्ग भी जलमग्न थे। ऐसे में ग्रामीणों को शव को पानी के बीच से लेकर हस्तिनापुर आना पड़ा।
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शव यात्रा में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते में कई स्थानों पर दो से तीन फीट तक पानी भरा था। ग्रामीण शव लेकर पानी के बीच से आगे बढ़ते रहे। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों को भी जलभराव के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी। बरसात के चलते गांव के आसपास के रास्तों और जंगलों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीण झेलते हैं परेशानी
शव यात्रा में शामिल रोहन वर्मा, राजपाल, डॉ. राजू, परमानंद, अमरचंद, विजयपाल, ऋषिपाल, भूपेंद्र, शराफत, जमील और सतपाल समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि संपर्क मार्ग लंबे समय से जर्जर है। हर साल बारिश और बाढ़ के दौरान सड़क टूटने से गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि खादर क्षेत्र के लोग लंबे समय से बांध निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों ने कहा कि सामान्य सड़क बनाने के बजाय संपर्क मार्ग को ऊंचा उठाकर मजबूत सीसी सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बाढ़ और बारिश के दौरान भी आवागमन सुचारु रह सके। गांव में श्मशान की व्यवस्था कराने और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
बयान...
गांव में सीसी रोड बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों को लिखा गया परंतु अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। -मनोज कुमार, ग्राम प्रधान, बस्तौरा नारंग
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को पत्र लिखकर सर्वे कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे व्यवस्था की जाएगी। -संतोष कुमार, एसडीएम, मवाना
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। सरकार भले ही शहरों की तर्ज पर गांव को विकसित करने के दावे करती हो परंतु क्षेत्र के बस्तौरा नारंग गांव की स्थिति अलग ही है। यहां मंगलवार को निकली एक शव यात्रा की तस्वीर हैरान करने वाली है। जो गांव के विकास कार्यों के दावों की पोल खोल रही है।
गंगा के बढ़े जलस्तर और लगातार बारिश के कारण खादर क्षेत्र के गांव बस्तौरा नारंग में ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव के चारों ओर मुख्य संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी भरा होने के कारण मंगलवार को 80 वर्षीय अतरी पत्नी रघुवर की शव यात्रा ग्रामीणों को पानी के बीच से निकालनी पड़ी। दो से तीन फीट पानी में शव लेकर ग्रामीण करीब 10 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर पहुंचे, जहां मृतका का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने गांव में बुनियादी सुविधाओं और जलभराव की स्थायी समस्या को लेकर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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ग्रामीणों के अनुसार, अतरी की मंगलवार को मृत्यु हो गई थी। गांव के चारों ओर गंगा का पानी भरा होने के कारण परिजनों के सामने अंतिम संस्कार की चुनौती खड़ी हो गई। गांव में श्मशान भी नहीं है। गंगा किनारे अंतिम संस्कार करना संभव नहीं था और गांव से बाहर निकलने वाले संपर्क मार्ग भी जलमग्न थे। ऐसे में ग्रामीणों को शव को पानी के बीच से लेकर हस्तिनापुर आना पड़ा।
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शव यात्रा में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते में कई स्थानों पर दो से तीन फीट तक पानी भरा था। ग्रामीण शव लेकर पानी के बीच से आगे बढ़ते रहे। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों को भी जलभराव के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी। बरसात के चलते गांव के आसपास के रास्तों और जंगलों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीण झेलते हैं परेशानी
शव यात्रा में शामिल रोहन वर्मा, राजपाल, डॉ. राजू, परमानंद, अमरचंद, विजयपाल, ऋषिपाल, भूपेंद्र, शराफत, जमील और सतपाल समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि संपर्क मार्ग लंबे समय से जर्जर है। हर साल बारिश और बाढ़ के दौरान सड़क टूटने से गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि खादर क्षेत्र के लोग लंबे समय से बांध निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। ग्रामीणों ने कहा कि सामान्य सड़क बनाने के बजाय संपर्क मार्ग को ऊंचा उठाकर मजबूत सीसी सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि बाढ़ और बारिश के दौरान भी आवागमन सुचारु रह सके। गांव में श्मशान की व्यवस्था कराने और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
बयान...
गांव में सीसी रोड बनवाने के लिए कई बार अधिकारियों को लिखा गया परंतु अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। -मनोज कुमार, ग्राम प्रधान, बस्तौरा नारंग
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को पत्र लिखकर सर्वे कराया जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे व्यवस्था की जाएगी। -संतोष कुमार, एसडीएम, मवाना

बस्तोंरा नारंग गांव में गंगा के पानी से निकलती शव यात्रा स्रोत संवाद