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Meerut News: किसान हरियाली बाजार और पेट्रोल पंप की जमीन के बैनामे में फर्जीवाड़ा

Thu, 11 Apr 2024 03:31 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 03:31 AM IST
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Fraud in land deeds of Kisan Hariyali Market and petrol pump
मेरठ। मवाना तहसील के अंतर्गत किसान हरियाली बाजार और पेट्रोल पंप की जमीन के बैनामे में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। इसका पर्दाफाश 4 साल बाद डीएम दीपक मीणा के निर्देश पर सहायक आयुक्त स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार ने किया है। फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने शासन को पत्र लिखा है। इसकी अनुमति मिलने पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जिला प्रशासन ने इसकी लिखापढ़ी शुरू कर नोटिस जारी कर दिए है।
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बिजनौर-मवाना मार्ग स्थित सैफपुर फिरोजपुर गांव के बाहर आठ हजार 290 वर्ग मीटर जमीन में डीसीएम श्रीराम लिमिटेड ने करीब 20 साल पहले किसान हरियाली बाजार बनाया था। इसी परिसर में पेट्रोल पंप भी बना है। आरोप है कि चार साल पहले साउथ दिल्ली निवासी पल्लवी शर्मा ने किसान हरियाली बाजार और पेट्रोल पंप की जमीन पर फसल होना बताकर खरीद लिया। इसमें 36 लाख 17 हजार के स्टांप कम लगाए। इसकी शिकायत लगातार जिला प्रशासन के अधिकारियों से हो रही थी। मवाना तहसील द्वारा जांच की गई थी, बावजूद कार्रवाई नहीं हो पाई। चार साल से कोई जांच नहीं की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मवाना तहसील के तत्कालीन अधिकारियों की फर्जीवाड़े में भूमिका होने का आरोप लगाया था। डीएम ने सहायक आयुक्त स्टांप से जांच रिपोर्ट मांगी। मवाना तहसीलदार ने अपनी आख्या में प्रमाणित कर दिया कि किसान हरियाली बाजार, पेट्रोल पंप की जमीन के बैनामे में फर्जीवाड़ा हुआ है। जमीन पर खेतीबाड़ी नहीं होती है।
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खंडहर बाजार, पेट्रोल पंप भी नहीं चलता
स्थानीय लोगों की मानें तो किसान हरियाली बाजार करीब दस साल से बंद है। इसके चलते उसकी बिल्डिंग खंडहर हो गई है। पेट्रोल पंप भी बंद है। लोगों ने बताया कि करीब 20 साल पूर्व किसान हरियाली बाजार बनाया गया था। इसमें गांव-गांव से किसान अपनी खेती संबंधित सामान खरीदने आते थे। डीएम दीपक मीणा ने बताया है कि कई बार जांच करने के बाद ही बैनामे में हुए फर्जीवाड़े की पोल खुली है।
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शासन की अनुमति मिलते ही मुकदमा होगा
सहायक आयुक्त स्टांप ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मामला चार साल पहला है। कई बार जांच हुई, जिसमें जमीन ही नहीं मिलती थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर एक महीने पहले जांच शुरू हुई है। मवाना तहसीलदार द्वारा जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद मुकदमा दर्ज करने की तैयारी हो गई है। यह मामला 4 साल पुराना होने के चलते शासन से अनुमति मांगी गई है। उसके बाद फर्जीवाड़ा करने वालों पर मुकदमा दर्ज होगा।
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