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क्षमा वीरों का आभूषण होता है : प्रतीक सागर
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उत्तम क्षमा धर्म की हुई पूजा से दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में बुधवार को पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ विधि-विधान के साथ हुआ। 16 से 26 सितंबर तक चलने वाले महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की पूजा-अर्चना की गई।
भगवान मल्लिनाथ के समवशरण में श्री 1008 तीन लोक महामंडल विधान का शुभारंभ मुनि 108 प्रतीक सागर महाराज और मुनि 108 भाव भूषण महाराज के सानिध्य में हुआ। पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में सहयोग किया।
बुधवार को कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। ध्वजारोहण उषा जैन, अशोक जैन, नीरज जैन, पंकज जैन आदि श्रद्धालुओं ने किया। तीन लोक महामंडल विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्रकाश चंद जैन, सुधा जैन, वहीं कुबेर इंद्र के रूप में सुशील जैन राजरानी जैन को प्राप्त हुआ। ईशान इंद्र के रूप में विनय जैन और सविता जैन, ने सहभागिता की।
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मुख्य मंगल कलश विराजमान करने का सौभाग्य प्रकाश चंद जैन, अंजलि जैन, हिमांगी जैन, मीना जैन और नीता जैन को मिला। जिनवाणी स्थापना उषा जैन, पंकज जैन और नीरज जैन ने की। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने दीप जलाया। पहले दिन शांतिधारा का सौभाग्य प्रकाश चंद जैन और सुधा जैन, को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर मुनि प्रतीक सागर महाराज ने कहा कि दशलक्षण पर्व वर्ष में तीन बार चैत, माघ और भाद्रपद मास में आता है। भाद्रपद में श्रद्धालु हर्षोल्लास से पर्व मनाते हैं और संयम, तप व त्याग को अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्यों ने क्षमा को वीरों का आभूषण बताया है।
शाम को उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन, संगीतमय आरती, 48 दीपकों से भक्तामर महिमा पाठ और धार्मिक प्रश्नमंच आयोजित हुआ। कार्यक्रम का संचालन विजय कुमार जैन ने किया। इस अवसर पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित पदाधिकारी और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में बुधवार को पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व का शुभारंभ विधि-विधान के साथ हुआ। 16 से 26 सितंबर तक चलने वाले महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की पूजा-अर्चना की गई।
भगवान मल्लिनाथ के समवशरण में श्री 1008 तीन लोक महामंडल विधान का शुभारंभ मुनि 108 प्रतीक सागर महाराज और मुनि 108 भाव भूषण महाराज के सानिध्य में हुआ। पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप जैन शास्त्री ने भी धार्मिक अनुष्ठानों में सहयोग किया।
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बुधवार को कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। ध्वजारोहण उषा जैन, अशोक जैन, नीरज जैन, पंकज जैन आदि श्रद्धालुओं ने किया। तीन लोक महामंडल विधान में सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य प्रकाश चंद जैन, सुधा जैन, वहीं कुबेर इंद्र के रूप में सुशील जैन राजरानी जैन को प्राप्त हुआ। ईशान इंद्र के रूप में विनय जैन और सविता जैन, ने सहभागिता की।
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मुख्य मंगल कलश विराजमान करने का सौभाग्य प्रकाश चंद जैन, अंजलि जैन, हिमांगी जैन, मीना जैन और नीता जैन को मिला। जिनवाणी स्थापना उषा जैन, पंकज जैन और नीरज जैन ने की। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने दीप जलाया। पहले दिन शांतिधारा का सौभाग्य प्रकाश चंद जैन और सुधा जैन, को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर मुनि प्रतीक सागर महाराज ने कहा कि दशलक्षण पर्व वर्ष में तीन बार चैत, माघ और भाद्रपद मास में आता है। भाद्रपद में श्रद्धालु हर्षोल्लास से पर्व मनाते हैं और संयम, तप व त्याग को अपनाते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्यों ने क्षमा को वीरों का आभूषण बताया है।
शाम को उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन, संगीतमय आरती, 48 दीपकों से भक्तामर महिमा पाठ और धार्मिक प्रश्नमंच आयोजित हुआ। कार्यक्रम का संचालन विजय कुमार जैन ने किया। इस अवसर पर अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन सहित पदाधिकारी और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।