UP: पुलिस ने किया तमंचा फैक्टरी का भंडाफोड़, मौके से दो कारीगर दबोचे, आरोपियों ने पूछताछ में खोले बड़े राज
पुलिस ने तमंचा फैक्टरी का भंडाफोड़ करते हुए दो शातिरों को दबोचा है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में अवैध हथियार भी बरामद किए हैं।
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मेरठ में परीक्षितगढ़ के पूठी गांव के पास खादर में पुलिस ने तमंचे बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी। पुलिस ने तमंचा बनाने वाले राधना के दो कारीगर साबू उर्फ साबुद्दीन और फकीरा को गिरफ्तार कर लिया। फैक्टरी से 11 तमंचे, तीन बंदूक, 12 अधबने तमंचे-बंदूक और औजार बरामद हो गए हैं।
एसपी देहात केशव कुमार और सीओ सदर देहात पूनम सिरोही ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर दोनों आरोपियों को मीडिया से रूबरू कराया है। आरोपी साबू उर्फ साबूद्दीन पर पांच और फकीरा पर किठौर थाने में छह मुकदमे दर्ज हैं। एसपी देहात के मुताबिक मुखबिर की सूचना पर परीक्षितगढ़ की पुलिस ने पूठी गांव के जंगल में तमंचा बनाने वाली फैक्टरी में छापा मारा। आरोपियों ने बताया कि वह राधना से आकर 1000-1000 रुपये की मजदूरी पर तमंचे बनाते हैं।
दोनों आरोपी कई साल से तमंचे बनाने का काम करते है। पुलिस दोनों को पहले भी चार बार जेल भेज चुकी है। जेल से बाहर आते ही तमंचा बनाने में लग जाते है। पुलिस ने उनके अन्य साथियों के नाम पते पूछे और कई जगह पर दबिश दी। पुलिस का कहना है कि दो-दो हजार रुपये में तमंचे बेचे जा रहे थे। ये दोनों शातिर अपराधी सलमान के कहने पर यहां तमंचे बना रहे थे। सलमान भी राधना गांव का रहने वाला है। पुलिस के पहुंचने से पांच मिनट पहले ही वह फैक्टरी से गया था।
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दस हजार से ज्यादा बना चुके तमंचे
पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि वह दस हजार से ज्यादा तमंचे बना चुके है। एक कारीगर तीन तमंचे रोजाना आसानी से बना देता है। फैक्टरी में तीन-चार लोग तमंचे बनाने का काम करते हैं। जबकि कई लोग तमंचे सप्लाई के लिए लगे हैं। देहात इलाके में तमंचे की डिमांड ज्यादा आती है। चुनाव के दौरान तमंचे और बंदूक की डिमांड बढ़ जाती है।
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तमंचे बनाने वालों का गढ़ है राधना
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक तमंचे-पिस्टल और बंदूक बनाने में किठौर का राधना गांव बदनाम है। पुलिस ने शिकंजा कसा तो राधना के कारीगर लिसाड़ीगेट सहित देहात में कई अलग-अलग जगह पर जाकर तमंचे बनाने का काम करते है। तमंचों को सप्लाई करने वालों का पता लगाने के लिए पुलिस टीम लगी है। तमाम प्रयास के बावजूद भी राधना के कारीगरों का नेटवर्क पुलिस नहीं तोड़ पाई।