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Meerut News: किसानों को जैविक खाद अपनाने के लिए किया जागरूक
Sat, 27 Jun 2026 06:35 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 27 Jun 2026 06:35 PM IST
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लावड़ - महल गांव में आयोजित किसान गोष्ठी में शामिल किसान। स्रोत: स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
लावड़। स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के तत्वावधान में शुक्रवार को महल गांव में किण्वित जैविक खाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम एवं किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती और जैविक खाद के उपयोग से होने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि केंद्र के निदेशक प्रसार डॉ. सतेंद्र कुमार ने कहा कि किसानों को अपने खेतों में इसका प्रयोग शुरू करना चाहिए, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत में भी कमी आएगी। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि इससे फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ने से उत्पादन में भी वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि यह पर्यावरण के अनुकूल जैविक खाद है, जिससे जल प्रदूषण की समस्या भी नहीं होती। डॉ. जितेंद्र कुमार आर्य ने किसानों को बताया कि किण्वित जैविक खाद किण्वन (फर्मेंटेशन) प्रक्रिया से तैयार की जाती है। वैज्ञानिक डॉ. वीना यादव ने किसानों से परिवार के बेहतर स्वास्थ्य और जैविक पोषण के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने तथा एफओएम के अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया। विभा साहू ने सभी अतिथियों और किसानों का आभार व्यक्त किया।
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लावड़। स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के तत्वावधान में शुक्रवार को महल गांव में किण्वित जैविक खाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम एवं किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती और जैविक खाद के उपयोग से होने वाले लाभों की विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि केंद्र के निदेशक प्रसार डॉ. सतेंद्र कुमार ने कहा कि किसानों को अपने खेतों में इसका प्रयोग शुरू करना चाहिए, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत में भी कमी आएगी। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि इससे फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ने से उत्पादन में भी वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि यह पर्यावरण के अनुकूल जैविक खाद है, जिससे जल प्रदूषण की समस्या भी नहीं होती। डॉ. जितेंद्र कुमार आर्य ने किसानों को बताया कि किण्वित जैविक खाद किण्वन (फर्मेंटेशन) प्रक्रिया से तैयार की जाती है। वैज्ञानिक डॉ. वीना यादव ने किसानों से परिवार के बेहतर स्वास्थ्य और जैविक पोषण के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने तथा एफओएम के अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया। विभा साहू ने सभी अतिथियों और किसानों का आभार व्यक्त किया।
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