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Meerut News: किसान 105 दिन से धरने पर, सुनवाई नहीं
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खरखौदा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए दूसरे चरण में 300 हेक्टेयर कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में 105 दिन से चार गांवों के किसान लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।
औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में छतरी मोड़ पर चल रहे धरने पर किसान 105 दिन से बैठे हैं। प्रशासन की ओर से भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन किसानों द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। गांव छतरी, खड़खड़ी, गोविंदपुर व खरखौदा के करीब 800 किसानों की 300 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। किसानों ने अपनी मांग जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी है। धरने में क्षेत्र के अधिकतर ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख व किसान यूनियन सहित सभी का समर्थन किसानों को मिल चुका है। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी किसानों की पीड़ा को जानने का प्रयास नहीं कर रहा है। एक तरफ जहां शासन ने महाकुंभ तक गंगा एक्सप्रेसवे के सभी निर्माण कार्य पूरे करने के दावे किए थे, लेकिन सभी दावे हवा हवाई साबित हुए। अभी जिले के कई बड़े अधिकारी कुंभ मेले में लगे हैं, इस कारण औद्योगिक गलियारे व गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का भी का मामला शांत है।
धरने में शामिल किसान नेता मामचंद नागर व संघर्ष समिति के अध्यक्ष शौराज त्यागी सहित धरना दे रहे किसानों का कहना है कि अधिकारी अधिग्रहण को लेकर बेशक शांत हों, लेकिन किसान लगातार धरने पर बैठे हैं। अब महाकुंभ भी अपने समापन की ओर है। अब देखना है कि धरनारत किसानों की मांगें मानी जाएगी या नहीं।
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औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में छतरी मोड़ पर चल रहे धरने पर किसान 105 दिन से बैठे हैं। प्रशासन की ओर से भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की गई थी, लेकिन किसानों द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। गांव छतरी, खड़खड़ी, गोविंदपुर व खरखौदा के करीब 800 किसानों की 300 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। किसानों ने अपनी मांग जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी है। धरने में क्षेत्र के अधिकतर ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख व किसान यूनियन सहित सभी का समर्थन किसानों को मिल चुका है। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी किसानों की पीड़ा को जानने का प्रयास नहीं कर रहा है। एक तरफ जहां शासन ने महाकुंभ तक गंगा एक्सप्रेसवे के सभी निर्माण कार्य पूरे करने के दावे किए थे, लेकिन सभी दावे हवा हवाई साबित हुए। अभी जिले के कई बड़े अधिकारी कुंभ मेले में लगे हैं, इस कारण औद्योगिक गलियारे व गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण का भी का मामला शांत है।
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धरने में शामिल किसान नेता मामचंद नागर व संघर्ष समिति के अध्यक्ष शौराज त्यागी सहित धरना दे रहे किसानों का कहना है कि अधिकारी अधिग्रहण को लेकर बेशक शांत हों, लेकिन किसान लगातार धरने पर बैठे हैं। अब महाकुंभ भी अपने समापन की ओर है। अब देखना है कि धरनारत किसानों की मांगें मानी जाएगी या नहीं।
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