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UP: मुनव्वर राणा के निधन से वेस्ट यूपी में छाया शोक, पूरी दुनिया में थी मकबूलियत, कभी भूल नहीं पाएंगे लोग

Mon, 15 Jan 2024 12:21 PM IST
कपिल kapil राजन शर्मा, अमर उजाला, मेरठ
राजन शर्मा, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 15 Jan 2024 12:21 PM IST
सार

Meerut News : नामचीन शायर मुनव्वर राणा के निधन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शोक छा गया। बताया गया कि मुनव्वर राणा की मकबूलियत पूरी दुनिया में थी।

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Famous poet Munawwar Rana passes away and wave of mourning runs in West UP
मेरठ के एक मुशायरे में शायर पापुलर मेरठी के साथ मुनव्वर राणा। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लो अब इस गांव से रिश्ता हमारा खत्म होता है

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फिर आंखें खोल ली जाएं कि सपना खत्म होता है।।


रविवार की देर रात नामचीन शायर मुनव्वर राणा ने हमेशा के लिए इस तरह आंखें बंद कर ली कि इस नींद में सपने का तसव्वुर ही नहीं रहा, लेकिन यह भी सच है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्रदान उनकी याद में हमेशा सपने देखते रहेंगे। दरअसल, मुनव्वर राणा की मकबूलियत पूरी दुनिया में थी, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों से उनके खास जज्बाती रिश्ते थे। 

मुनव्वर के शेरों से यहां के कवि सम्मेलन और मुशायरे अमूमन मुनव्वर अर्थात जगमगाते रहते थे। मेरठ में नौचंदी मेले के अलावा दीगर जगह आयोजित मुशायरों में उनकी शिरकत को शायरी के कद्रदान हमेशा याद करते हैं। नामचीन शायर मुनव्वर राणा के इंतकाल की खबर सुनकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अदबी इदारे में गम पसर गया।

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वहीं, ओज के प्रसिद्ध कवि हरिओम पंवार को जब ये खबर दी गई तो हक्के-बक्के रह गए। वो अपने अजीज दोस्त की याद में खो गए। फिर कुछ संभले और बोले कि हर शख्स इस दुनिया से जाने के लिए आता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जीते भी अपने अलग अंदाज और पहचान से हैं और गुजरने के बाद भी ऐसा नकश छोड़ जाते हैं कि सदियों तक याद किए जाते हैं। मुनव्वर राणा ऐसी ही शख्सियत थे।

नामचीन शायर नवाज देवबंदी का कहना है कि मुनव्वर राणा की शायरी देश-दुनिया का दर्द समेटे हुए समाजिक सरोकारों को साकार करती नजर आती है। मां और बेटियों पर उन्होंने भावनात्मक शायरी की। मुनव्वर के शेर जज्बाती लफ्जों की बेहतरीन नक्काशी है।

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मजाहिया शायर पापुलर मेरठी का कहना है कि साहित्य के क्षेत्र में मुनव्वर साहब की भरपाई कर पाना नामुमकिन है। वो इंसान भी लाजवाब थे और शायर भी शानदार थे। ऐसे शायर सदियों में पैदा होते हैं। दुनियाभर के अदबी सफर में हम दोनों साथ रहे। बाहर से बेहद संजीदा और अंदर से नाजुक मिजाज थे मुनव्वर साहब।

शायरी के मयार को हमेशा कायम रखा
‘किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई, मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई।’ रिश्तों के ताने बाने में मुनव्वर राणा नसीहत का जाल भी अनूठे अंदाज में बुनते थे। उन्होंने ताउम्र शायरी के मयार को गिरने नहीं दिया। सादगी के लबादे में लिपटी मुनव्वर की गजल पाकीजगी का वो मुजस्समा है जो अदब की तमाम उठापटक के बीच ताजमहल की खूबसूरती और लालकिले की मजबूती लिए बड़े शान से खड़ी नजर आती है। वह समाजी और सियासी मसाइल को बड़ी संजीदगी से इस तरह झकझोरते हैं कि दिल और दिमाग पर नशा तारी हो जाता है। मुनव्वर जब शायरी पढ़ते थे तो लगता था कि मानो तितलियों से खेल रहे हों।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश से था जज्बाती रिश्ता
मुनव्वर राणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शायरों, कवियों और शायरी के कद्रदानों के बीच काफी मकबूल व लोकप्रिय थे। मेरठ और आसपास के जिलों में आयोजित महफिलों में वो अक्सर आते रहते थे। यहां के अनगिनत लोग उनसे अपनत्व का भाव रखते थे। दरअसल, मुनव्वर साहब हर उम्र और हर तबके के शख्स से दोस्ताना रिश्ता कायम कर लेते थे। मेरठ में कवि हरिओम पंवार, पापुलर मेरठी और अजहर इकबाल, मुजफ्फरनगर में रियाज सागर, आलिम व शायर खालिद जाहिद, बिजनौर में अतहर शकील और शकील जमाली, सहारनपुर में शब्बीर शाद व नवाज देवबंदी से उनके करीबी रिश्ते थे। खालिद जाहिद बताते हैं कि मुनव्वर साहब खाने के बेहद शौकीन थे।

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