फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Exclusive: youth are suffering from black jaundice in western UP, 9395 people are being treated in the medical college

एक्सक्लूसिव: चौंकाने वाली रिपोर्ट, काला पीलिया की चपेट में 9395 लोग, इन कारणों से होती है ये बीमारी

Fri, 24 Jun 2022 03:19 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 24 Jun 2022 03:19 PM IST
सार

मेडिकल कॉलेज से एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में पता चला कि युवा काला पीलिया की चपेट में आ रहे हैं। इस समय भी मेडिकल में 9395 मरीजों का इलाज चल रहा है।

विज्ञापन
Exclusive: youth are suffering from black jaundice in western UP, 9395 people are being treated in the medical college
फाइल फोटो। - फोटो : amar ujala

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवा काला पीलिया (हेपेटाइटिस सी) की चपेट में आ रहे हैं। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 9395 मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें 75 प्रतिशत से ज्यादा 20 से 40 साल उम्र के हैं। ये मरीज मेरठ के अलावा गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा आदि जिलों के हैं। 

विज्ञापन


यह तो वह संख्या है जो मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आए। इनके अलावा ऐसे मरीज भी बड़ी संख्या में हैं, जिनका अपने जिले में इलाज चल रहा है। हालांकि जांच मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब में ही होती है, कुछ सैंपल जिलों से सीधे जांच के लिए आते हैं। उनकी रिपोर्ट संबंधित जिले को भेज दी जाती है।
विज्ञापन


मेडिकल में इलाज के लिए मरीज को 18 नंबर में लिवर ओपीडी में दिखाना होता है, यहां से उसका सैंपल जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजा जाता है। जांच में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि होने पर इलाज शुरू किया जाता है। तीन माह दवाइयां खानी पड़ती हैं, फिर जांच होती है, सही होने पर दवाइयां बंद कर दी जाती हैं। नहीं तो दवाइयां अगले तीन माह के लिए जारी रखी जाती हैं। ठीक होने तक यही प्रक्रिया अपनाई जाती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह है हेपेटाइटिस-सी
हेपेटाइटिस सी (यकृतशोथ ग) इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है।

यह भी पढ़ें: PHOTOS: गुरमीत राम रहीम के आश्रम पर पसरा सन्नाटा, हर गेट पर पुलिस तैनात, श्रद्धालुओं ने मानी बाबा की ये बात

इलाज से ठीक हो जाती है बीमारी
मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग ने बताया कि इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता। इस कारण यह जानलेवा हो जाती है। मेडिकल में इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है। 

इन कारणों से होती है ये बीमारी
दूषित सिरिंज का उपयोग करना
दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल
दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा
दूषित सुईं से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना
असुरक्षित यौन संबंध

सतर्क रहें तो नहीं है खतरा 
मेडिकल के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है। अगर सावधानी बरतें, तो इन बीमारियों से बचे रह सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed