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एक्सक्लूसिव: 3500 से ज्यादा खेल उपकरण निर्माता इकाइयों के शटर डाउन, पढ़िए- ये खास रिपोर्ट

Mon, 18 May 2020 05:27 PM IST
कपिल kapil शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 18 May 2020 05:27 PM IST
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Exclusive Amar Ujala Report, 3500 sports showroom has closed in Meerut due to the lockdown
कारीगर - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में मुख्य रूप से क्रिकेट किट, बल्ला, गेंद बनाने का कारोबार होता है।  यहां 3500 से अधिक खेल उपकरण निर्माता इकाइयां हैं। इनमें 10 से ज्यादा बड़ी निर्यातक इकाइयां हैं, जो दुनिया भर में बड़े पैमाने पर खेलों से जुड़े साजो-सामान निर्यात करती हैं। अब ऐसे में इन इकाइयों के शटर डाउन हैं। कारण यह है कि इस कारोबार की पहली अनिवार्यता ही कुशल कारीगर का होना है। लेकिन बड़े पैमाने पर कामगारों के पलायन की वजह से उद्यमी काम शुरू करवाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे। सिर्फ आवश्यक उत्पादों व पीपीई किट से जुड़ी इकाइयां ही चल रही हैं।

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मेरठ में तैयार खेल उपकरणों और बल्लों को दुनिया भर में पसंद किए जाने का प्रमुख कारण यहां के कारीगरों के हाथों का कमाल है। बल्ला, गेंद, फुटबॉल, स्केटिंग से जुड़े आइटम्स, टेबल टेनिस, ट्रैक सूट से लेकर फिटनेस से जुड़े उपकरण, हर्डल, भाले, रिंग सभी कुछ यहां तैयार होते हैं। अब इन इकाइयों में कुशल कामगारों का संकट खड़ा हो गया है। बल्ले के लिए इंग्लिश और कश्मीर विलो नहीं मिल पा रहा। गेंदों के लिए चमड़ा, पॉलिस्टर, केमिकल सहित कच्चे माल की आपूर्ति ठप है। 
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यही नहीं तैयार माल कहां बेचें यह भी संकट है। इकाइयां न खुल पाने का दूसरा बड़ा कारण प्रशासन के आए दिन बदलने वाले नियम भी हैं। कभी उद्योगों को ई-वाहन पास जारी किए जाते हैं तो कभी मैनुअल पास जारी करने की बात होती है। रोजाना बदलते नियमों के कारण भी उद्यमी इकाई खोलने की हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं।
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मेरठ में ये हैं प्रमुख इकाइयां
मेरठ में खेल उपकरणों के अलावा केमिकल, फर्टिलाइजर, कृषि यंत्र, रबड़, गुब्बारा, कालीन, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, धागा, टेक्सटाइल, पेंट, थिनर, बिजली के उपकरण, वाहनों के कल पुर्जे, पेपर इंडस्ट्री, फूड एंड वेबरेज, लड़ाकू विमानों के कलपुर्जे, ट्रेनों के कलपुर्जे, तार, केबल, बैंड बाजा, वाद्ययंत्र, कैंची, लोहे के अन्य सामान बनाने का कारोबार प्रमुखता से होता है।

बड़ा सवाल- तैयार माल कहां बेचें?
मेरठ के आईआईए अध्यक्ष अनुराग अग्रवाल बताते हैं कि जिले में 8000 से अधिक एमएसएमई इकाइयां हैं। इनमें से 500 को खोलने की अनुमति मिली हैं। 500 में से भी 250 ही खुल रही हैं। वह भी आधी अधूरी। क्योंकि इकाइयों के पास श्रमिक नहीं हैं। कच्चे माल का भी संकट है। तैयार माल को बाजार में कहां बेचें, कोई ऑर्डर नहीं है। ऐसे में खाद्य पदार्थों, पीपीई किट, मास्क बनाने से जुड़ी 150 इकाइयां ही हैं जो ठीक से चल रही हैं। इनको भी कभी वाहन पास से जुड़ी समस्याओं, मजदूरों के संकट के साथ ही भाड़ा बढ़ने से जूझना पड़ रहा है।

राहत पैकेज में रिटेलरों को किया दरकिनार 
रिटेलरों ने सरकार द्वारा दिए गए पैकेज में कुछ नहीं मिलने पर विरोध जताया। बेगमपुल व्यापार संघ ने सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। अध्यक्ष राजेश सिंघल ने कहा कि मजदूर, किसान, एमएसएमई इन किसी वर्ग में हम नहीं आते हैं। देश में सबसे ज्यादा रोजगार हम दुकानदार ही देते हैं। महामंत्री पुनीत शर्मा ने बताया कि मेरठ में संयुक्त व्यापार संघ द्वारा घोषित करीब सवा लाख दुकानदार हैं। अगर हर व्यापारी अपने यहां औसतन तीन लोगों को काम देता है तो हम दुकानदार करीब 3,75,000 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। 375000 लोगों के परिवार को मिला दें तो दुकानदार करीब 15 लाख लोगों का भरण पोषण कर रहे हैं। इतने बड़े वर्ग को महत्व न देना निराशाजनक है। सरकार बिजली के बिलों में फिक्स चार्ज की माफी और कम से कम एक साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण दे। सीएम और पीएम को पत्र भेजने वालों में लॉन्ड्री एंड ड्राई क्लीन एसोसिएशन संयोजक राजीव सिंघल, बेगमपुल व्यापार संघ उपाध्यक्ष अशोक महेश्वरी आदि रहे।

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