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EXCLUSIVE : एड्स और हेपेटाइटिस के सैकड़ों रोगी भी कर गए रक्तदान

Thu, 22 Jun 2017 02:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर/रणवीर सैनी
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर/रणवीर सैनी Updated Thu, 22 Jun 2017 02:30 PM IST
सार

ब्लड बैंक की जांच में हुआ सनसनीखेज खुलासा, 472 हेपेटाइटिस, 22 एचआईवी पॉजीटिव मिले, रक्तदाताओं को पहले से नहीं था बीमारी की पता       

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EXCLUSIVE ; Aids and Hepatitis patients also donated blood

विस्तार

ब्लड बैंक में रक्तदान करने वाले लोग भी खतरनाक बीमारियों की चपेट में हैं। ब्लड बैंक में डोनेट किए गए रक्त की जांच में यह सनसनीखेज मामला सामने आया है। रक्तदाताओं में 22 एचआईवी, 225 हेपेटाइटिस बी और 247 में हेपेटाइटिस सी पॉजीटिव पाए गए हैं। जिले के ब्लड बैंक में पिछले एक साल में 19,469 लोगों ने शिविरों और सीधे ब्लड बैंक में अपना ब्लड डोनेट किया है।       
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 निजी अस्पताल में सीधे ब्लड चढ़ा देने से लोग एचआईवी, हेेपेटाइटिस जैसी घातक बीमारियों का शिकार होते रहे हैं। केंद्र सरकार ने इन परिस्थितियों को देखते हुए ही प्रत्येक जिला मुख्यालय पर ब्लड बैंक की स्थापना की है। ब्लड बैंक में जो रक्तदाता आते हैं, उन सबके ब्लड की पांच जांच होती हैं। जिला चिकित्सालय में स्थित ब्लड बैंक में एक अप्रैल 2016 से 31 मई 2017 तक 19,469 लोगों ने अपना ब्लड विभिन्न शिविरों और ब्लड बैंक में सीधे डोनेट किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में 22 लोग एचआईवी पॉजीटिव मिले हैं। 225 लोग हेपेटाइटिस बी जैसी घातक बीमारी से ग्रस्त हैं। हेपेटाइटिस एड्स से एक सौ गुना खतरनाक बीमारी बताई गई है। इसी के साथ हेपेटाईटिस सी के 247 मामले सामने आए हैं। वीडीआरएल और मलेरिया किसी रक्तदाता में नहीं पाया गया है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ पीके त्यागी ने बताया कि बीमारियां तो लोगों में पहले भी इतनी ही थी, लेकिन जांच की सुविधा नहीं होने के कारण पता नहीं लग पाता था। रक्त की जांच में जो एचआईवी पॉजीटिव आए हैं, उन्हें बुलाकर उनकी तीन और निशुल्क जांच कराई गई हैं। इसके बाद उपचार के लिए इन लोगों को जिला चिकित्सालय के एफआईएआरटी केंद्र पर भेज दिया जाता है। हेपेटाइटिस का जिले में उपचार नहीं है, इसलिए उन्हें मेरठ अथवा दिल्ली में उपचार के लिए सलाह दी जाती है।             
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कुछ अस्पताल सीधे ही चढ़ा रहे हैं ब्लड

EXCLUSIVE ; Aids and Hepatitis patients also donated blood
blood - फोटो : amarujala
ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ पीके त्यागी ने बताया कि शहर के कुछ निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिनमें अभी बिना जांच के सीधे मरीजों को ब्लड चढ़ाया जा रहा है। यह बहुत ही घातक है। यदि रक्त देने वाले व्यक्ति को एचआईवी, हेपेटाइटिस जैसी बीमारी है तो वह मरीज को भी हो जाएगी। इस मामले को डीएम के सामने रखा गया है। ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार कराई जा रही है, जो ब्लड के लिए मरीजों को जिला चिकित्सालय में नहीं भेजते हैं।             
 

हेपेटाइटिस के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं      
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में जिस तरह एड्स के रोगियों की जांच और उपचार की व्यवस्था है, उस तरह हेपेटाइटिस के मरीजों के उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। जो मरीज सामने आते हैं, उनकी काउंसिलिंग की भी कोई व्यवस्था नहीं है। हेपेटाइटिस बी के मरीज की एक माह की दवाई लगभग 40 हजार की बैठती है, जिसे आम आदमी खरीदने में सक्षम नहीं है। हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या जिस तरह सामने आ रही है, यह बड़ा भयावह आंकड़ा है। 

ब्लड बैंक की जांच में हुआ सनसनीखेज खुलासा, 472 हेपेटाइटिस, 22 एचआईवी पॉजीटिव मिले, रक्तदाताओं को पहले से नहीं था बीमारी की पता       
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