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मेडिकल में मौतें रोकने के लिए एचआरसीटी पर जोर
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मेडिकल में मौतें रोकने के लिए एचआरसीटी पर जोर
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में कोरोना मरीजों की मौतों को रोकने के लिए अब हाई रेजोल्यूशन सीटी (एचआरसीटी) स्कैन पर ज्यादा जोर रहेगा। दरअसल मेडिकल कॉलेज में 1400 मरीजों पर की गई स्टडी में यह बात सामने आई है। यह तकनीक कोरोना मरीजों को बचाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है।
प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि जिन मरीजों के एक्सरे में कोरोना के लक्षण पाए गए उन सभी मरीजों का एचआरसीटी किया गया। अध्ययन में पाया गया है कि छाती के एक्सरे में लक्षण न होने पर भी एचआरसीटी में बीमारी के लक्षण पाए गए। लिहाजा एचआरसीटी से मरीज में होने वाली जटिलताओं का शुरू में ही पता लगाया जा सकता है। मरीज की बीमारी की वृद्धि का पता भी जल्दी चल जाता है। मरीज का जल्द इलाज शुरू कर होने वाली जटिलताओं को भी रोका जा सकता है।
एसोसिएट प्रोफेसर विभागाध्यक्ष रेडियो डायग्नोसिस डॉ. यासमीन उस्मानी ने बताया कि एचआरसीटी से मरीज के फेफड़े की सही स्थिति का जल्द पता चल सकता है। मरीज को वक्त रहते बेहतर इलाज और दवाई दी जा सकती हैं। मरीज की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार मरीज की रिपोर्ट लैब से नेगेटिव आने के बाद भी एचआरसीटी में फेफड़े की मामूली सी परेशानी का भी पता चल जाता है। यह फेफड़े की अत्यंत उच्च छवियों को प्रदर्शित करता है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में पिछले 15 दिन में 45 लोगों की मौत हो चुकी है। मौत के आंकड़े को कम करने की कवायद की जा रही है।
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में कोरोना मरीजों की मौतों को रोकने के लिए अब हाई रेजोल्यूशन सीटी (एचआरसीटी) स्कैन पर ज्यादा जोर रहेगा। दरअसल मेडिकल कॉलेज में 1400 मरीजों पर की गई स्टडी में यह बात सामने आई है। यह तकनीक कोरोना मरीजों को बचाने में बेहद कारगर साबित हो सकती है।
प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि जिन मरीजों के एक्सरे में कोरोना के लक्षण पाए गए उन सभी मरीजों का एचआरसीटी किया गया। अध्ययन में पाया गया है कि छाती के एक्सरे में लक्षण न होने पर भी एचआरसीटी में बीमारी के लक्षण पाए गए। लिहाजा एचआरसीटी से मरीज में होने वाली जटिलताओं का शुरू में ही पता लगाया जा सकता है। मरीज की बीमारी की वृद्धि का पता भी जल्दी चल जाता है। मरीज का जल्द इलाज शुरू कर होने वाली जटिलताओं को भी रोका जा सकता है।
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एसोसिएट प्रोफेसर विभागाध्यक्ष रेडियो डायग्नोसिस डॉ. यासमीन उस्मानी ने बताया कि एचआरसीटी से मरीज के फेफड़े की सही स्थिति का जल्द पता चल सकता है। मरीज को वक्त रहते बेहतर इलाज और दवाई दी जा सकती हैं। मरीज की मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई बार मरीज की रिपोर्ट लैब से नेगेटिव आने के बाद भी एचआरसीटी में फेफड़े की मामूली सी परेशानी का भी पता चल जाता है। यह फेफड़े की अत्यंत उच्च छवियों को प्रदर्शित करता है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में पिछले 15 दिन में 45 लोगों की मौत हो चुकी है। मौत के आंकड़े को कम करने की कवायद की जा रही है।
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