Eid Ul Azha 2023: अल्लाह की राह में अपनी मुहब्बत की कुर्बानी देना है बकरीद, तीन हजार वर्ष पहले शुरू हुई रस्म
हजरत इब्राहिम ने कहा कि प्यारे बेटे मैं तुम्हारी कुर्बानी देने जा रहा हूं। इस्माईल ने कहा कि अब्बू जब आप मुझे जिबह करो, तो मेरा मुंह दूसरी तरफ फेर देना, नहीं तो तुम्हें प्यार आ जाएगा। हजरत इब्राहिम ने कुर्बानी की कोशिश की, तभी अल्लाह ने दुंबा पेश किया। तभी से कुर्बानी की परंपरा शुरू हो गई।
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29 जून (कल) बकरीद का त्योहार है। बकरीद पर कुर्बानी की रस्म बहुत पुरानी है। कुर्बानी के त्योहार को लेकर मुस्लिमों की अपनी मान्यताएं हैं, जिसमें अल्लाह की राह में अपनी मुहब्बत और जान से प्यारे जानवर की कुर्बानी देना ही बकरीद है। एक जानवर की कुर्बानी करने का सवाब (पुण्य) इकलौते बेटे को कुर्बान करने जितना है।
इस्लामिक स्कॉलर व सदर बाजार स्थित मदरसा इमदादुल इस्लाम के प्रधानाचार्य मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने बताया कि हजरत इब्राहिम के ख्वाब और अल्लाह के हुक्म की तामील ने इस कुर्बानी की सुन्नत को हम तक पहुंचाया है, इसलिए अल्लाह की राह में कुर्बानी करना इस्लाम में सबसे अहम माना गया है।
बताया कि करीब तीन हजार साल पहले की बात है। पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अल्लाह के प्यारे और करीबी थे। उन्हें अल्लाह ने 86 साल की उम्र में औलाद दी, नाम इस्माईल रखा।
किशोर अवस्था में हजरत इब्राहिम ने ख्वाब में देखा कि वह लाड़ प्यार से पाले गए बेटे इस्माईल को जिबह ( हलाल ) कर रहे हैं। दूसरे दिन हजरत इब्राहिम ने फिर वही ख्वाब देखा। इब्राहिम समझ गए कि अल्लाह चाहते हैं कि वह अपने प्यारे बेटे इस्माईल की कुर्बानी दें।
अगले दिन सुबह इब्राहिम बीवी हाजरा को बिना बताए इकलौते बेटे को कुर्बानी के लिए अपने साथ लेकर चल दिए। रास्ते में शैतान ने उन्हें रोकने की कोशिश की और कहा कि कि तुम पागल हो गए हो, जो अपने इकलौते बेटे को जिबह करने जा रहे हो। हजरत इब्राहिम समझ गए कि शैतान गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
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उन्होंने शैतान को कंकर मारा, तो वह भाग गया (इसी सिलसिले में हज के अरकान शैतान को कंकर मारते हैं)। हजरत इब्राहिम के न मानने पर शैतान उनकी बीवी हाजरा के पास गया और बात बताई। बीबी हाजरा का ईमान भी पक्का था। उन्होंने कहा कि अगर अल्लाह का ऐसा ही हुक्म है, तो कोई बात नहीं। इसके बाद शैतान वहां से चला गया। हजरत इब्राहिम सुनसान जगह पर बेटे को लेकर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि प्यारे बेटे मैं तुम्हारी कुर्बानी देने जा रहा हूं। इस्माईल ने कहा कि अब्बू जब आप मुझे जिबह करो, तो मेरा मुंह दूसरी तरफ फेर देना, नहीं तो तुम्हें प्यार आ जाएगा। हजरत इब्राहिम ने कुर्बानी की कोशिश की, तभी अल्लाह ने दुंबा पेश किया। अल्लाह देखना चाहते थे कि बेटे की कुर्बानी कर पाएंगे िक नहीं। तभी से जानवरों की कुर्बानी की जा रही है।
एक हिस्सा ही रखें परिवार के लिए
फलावदा के शहरकाजी मौलाना सलमान कासमी ने बताया कि कुर्बानी के बकरे के तीन हिस्से होते हैं, जिसमें एक हिस्सा अपने पास रखें। दूसरा पड़ोस में उनको बांटे, तीसरा हिस्सा गरीबों में बांट दें। इसी तरह बड़े जानवर के सात हिस्से होते हैं, जिसमें सात लोग हिस्सा ले सकते हैं। उसमें भी प्रत्येक एक हिस्से में से तीन-तीन हिस्से कर एक खुद रखें और दो हिस्से तकसीम कर दें, ताकि समाज के हर तबके के लोगों तक कुर्बानी का हिस्सा पहुंच जाए।
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29 जून: मेरठ में बकरीद की नमाज का समय
-दिल्ली रोड शाही ईदगाह में नमाज : सुबह 7:00 बजे।
-फैज ए आम इंटर कॉलेज के मैदान में नमाज : सुबह 6:30 बजे।
-लिसाड़ी ईदगाह में नमाज : सुबह 6:45 बजे।
-रजबन बाजार मेरठ कैंट बागो वाली मस्जिद में नमाज : सुबह 7:15 बजे।
-मरकज होज वाली मस्जिद में नमाज : सुबह 7:15 बजे।
-खैरनगर चोपड़ा पत्थर वाली मस्जिद में नमाज : सुबह 6:00 बजे।
-अख्तर मस्लिद में नमाज : सुबह 5:50 बजे।
-हजरत बाले मियां ईदगाह में नमाज : सुबह 7:15 बजे।
-हापुड रोड मदरसा जामिया मदनिया में नमाज : सुबह 6:00 बजे।
शिया समाज की बकरीद की नमाज
-रेलवे रोड मनसबिया में नमाज: सुबह 7:30 बजे।
-मस्जिद अल मुर्तजा में नमाज: सुबह 8:30 बजे।
-शिया मस्जिद दरबारे हुसैनी में नमाज: सुबह 8:00 बजे।
-मस्जिद अबु तालिब लोहियानगर में नमाज: सुबह 8:30 बजे।