{"_id":"68c025351beee3420a089992","slug":"education-is-the-biggest-basis-for-the-strength-of-a-nation-prof-sangeeta-shukla-meerut-news-c-72-1-mrt1063-140202-2025-09-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"राष्ट्र की मजबूती का सबसे बड़ा आधार है शिक्षा : प्रो. संगीता शुक्ला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राष्ट्र की मजबूती का सबसे बड़ा आधार है शिक्षा : प्रो. संगीता शुक्ला
विज्ञापन
- दीक्षोत्सव पर राष्ट्र एवं समाज विषय पर हुई निबंध प्रतियोगिता
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। राष्ट्र और समाज के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सर्वोपरि है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, मूल्यबोध और कर्तव्यनिष्ठा की आधारशिला है। जब समाज शिक्षित होता है, तो उसमें जागरूकता, समानता और सहयोग की भावना स्वतः विकसित होती है। यदि प्रत्येक नागरिक शिक्षा के महत्व को समझे और उसे जीवन में उतारे, तो राष्ट्र में प्रगति, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। राष्ट्र और समाज की मजबूती का सबसे बड़ा आधार शिक्षा ही है। यह बात मंगलवार को दीक्षोत्सव समारोह में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित निबंध प्रतियोगिता के दौरान कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कही। निर्णायक मंडल में डॉ. वाईपी सिंह, डॉ. ईश्वर सिंह, प्रो. दुष्यंत कुमार चौहान रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के अभिव्यक्ति कौशल, विचारों की मौलिकता एवं प्रस्तुतीकरण के आधार पर मूल्यांकन किया। संचालन विभाग समन्वयक डॉ. विजेता गौतम एवं सह-समन्वयक डॉ. अंशु चौधरी ने किया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। राष्ट्र और समाज के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सर्वोपरि है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, मूल्यबोध और कर्तव्यनिष्ठा की आधारशिला है। जब समाज शिक्षित होता है, तो उसमें जागरूकता, समानता और सहयोग की भावना स्वतः विकसित होती है। यदि प्रत्येक नागरिक शिक्षा के महत्व को समझे और उसे जीवन में उतारे, तो राष्ट्र में प्रगति, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। राष्ट्र और समाज की मजबूती का सबसे बड़ा आधार शिक्षा ही है। यह बात मंगलवार को दीक्षोत्सव समारोह में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित निबंध प्रतियोगिता के दौरान कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कही। निर्णायक मंडल में डॉ. वाईपी सिंह, डॉ. ईश्वर सिंह, प्रो. दुष्यंत कुमार चौहान रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों के अभिव्यक्ति कौशल, विचारों की मौलिकता एवं प्रस्तुतीकरण के आधार पर मूल्यांकन किया। संचालन विभाग समन्वयक डॉ. विजेता गौतम एवं सह-समन्वयक डॉ. अंशु चौधरी ने किया।