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सीसीएसयू: बीए अर्थशास्त्र में भी चौधरी चरण सिंह के आर्थिक विचार पढ़ेंगे छात्र-छात्राएं

Thu, 03 Jun 2021 11:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Thu, 03 Jun 2021 11:03 AM IST
सार

अब छात्र-छात्राएं बीए अर्थशास्त्र में भी पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के आर्थिक विचारों को पढ़ेंगे। बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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Economic thoughts of Chaudhary Charan Singh will also be studied in BA Economics
सीसीएसयू

विस्तार

राजनीति विज्ञान के साथ ही बीए अर्थशास्त्र में भी छात्र-छात्राएं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के आर्थिक विचारों को पढ़ेंगे। बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई है।

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अर्थशास्त्र विषय की बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की बैठक बुधवार को ऑनलाइन हुई। प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला की अध्यक्षता में हुई बैठक में डीन फैकल्टी ऑफ आर्ट्स प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी दी। संचालन प्रो. दिनेश कुमार अध्यक्ष अर्थशास्त्र विभाग विवि परिसर ने किया। बीए अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम को सभी ने सर्वसम्मति से कुछ संशोधनों के साथ पारित कर दिया। पाठ्यक्रम के प्रश्नपत्र आर्थिक विचारों के इतिहास में एक सदस्य के सुझाव पर चौ. चरण सिंह के आर्थिक विचारों को पढ़ाने पर स्वीकृति प्रदान की।
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इनके अलावा दीनदयाल उपाध्याय के विचार, प्रो. अमर्त्य सेन एवं प्रो. जगदीश भगवती के आर्थिक विचारों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। बैठक में प्रो. अतवीर यादव, विषय विशेषज्ञ प्रो. एसपी राना गढ़वाल विवि, प्रो. राजेंद्र गुप्ता, जम्मू एवं प्रो. बागलकोटी कर्नाटक से रहे। बैठक में कॉलेजों से डॉ. दुष्यंत कुमार लखावटी, डॉ. नीना बत्रा, डॉ. सीमा मिश्रा, डॉ. अमिता अग्रवाल, प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार डीन कॉमर्स आदि मौजूद रहे।
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पश्चिमी यूपी की फसलों को पढ़ेंगे छात्र
सीसीएसयू में संचालित उद्यान विज्ञान विषय की बोर्ड ऑफ स्ट्डीज की बैठक में सिलेबस फाइनल किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा जारी किए गए सिलेबस में से सिर्फ पांच फीसदी में ही बदलाव किया गया है। कोर्स के सातवें सेमेस्टर में रूरल एग्रीकल्चर वर्क एक्सपीरियंस के अंतर्गत छात्र किसानों के बीच गांवों में और एग्रो इंडस्ट्रियल अटैचमेंट के अंतर्गत विभिन्न कृषि इंडस्ट्रीज में जाकर प्रशिक्षण लेंगे।


इसके अलावा जो फसलें और फल पश्चिमी यूपी की जलवायु के अनुकूल नहीं हैं, उनको सिलेबस से हटाकर इनकी जगह यहां की फसल फूल और फल को जगह दी गई है। पश्चिमी यूपी में गन्ना, गेहूं, आलू, तमाम सब्जियां और फलों में आम को शामिल किया गया है। गुलाब और गेंदा के फूलों की खेती भी शामिल रहेगी। बेमौसम सब्जी एवं पुष्प उत्पादन उपलब्धता के लिए संरक्षित खेती और हाईटेक हॉर्टिकल्चर के कोर्स छात्रों के लिए रोजगारपरक होंगे।

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