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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Doctors Day 2021: Read the story of many corona warrior doctors from Meerut

डॉक्टर्स डे: पढ़िए ऐसे योद्धाओं की कहानी... जो कोरोना काल भी डटे रहें और बचाई लोगों की जिंदगियां

Thu, 01 Jul 2021 01:21 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 01 Jul 2021 01:21 PM IST
सार

आज राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस है। आइए आज हम भी आपको कुछ ऐसे डॉक्टरों के बारे में बताते हैं, जो कोरोना काल में भी डटे रहें और लोगों जिंदगियां बचाईं।

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Doctors Day 2021: Read the story of many corona warrior doctors from Meerut
मेरठ के डॉक्टर्स। - फोटो : amar ujala

विस्तार

चिकित्सकों के पास कई ऐसे मरीज भी आते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि इनकी जान बचाना अब नामुमकिन है, लेकिन डॉक्टर अपने ज्ञान और दवाओं के जरिए उस मरीज को एक नई जिंदगी देते हैं। बच्चे को जन्म देना हो या किसी को बचाना हो डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ती है। यही एक पेशा है जहां दवा और दुआ का अनोखा संगम देखने को मिलता है। सेहत के रखवालों ने कोरोना महामारी में भी जान जोखिम में डालकर हजारों जिंदगियां बचाई हैं। डॉक्टर्स के सम्मान में ही हर साल एक जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है।

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डॉक्टर को यूं ही भगवान के समान दर्जा नहीं दिया जाता है। एक व्यक्ति जब बीमार होता है, उसके साथ कोई दुर्घटना होती है या फिर कोरोना जैसे हालात से गुजरना हो तो ऐसे मुश्किल वक्त में डॉक्टर ही मदद करते हैं। कोरोना संक्रमण के बीच दुनिया ने देखा कि कैसे चिकित्सकों ने दिन-रात काम करके मरीजों की जान बचाई। 
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मेरठ में दोनों लहर में 65 हजार से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आए। इनमें से 836 लोगों की मौत हुई, बाकी को बचा लिया गया। चिकित्सक खुद और परिवार की चिंता के बगैर दिन-रात काम कर रहे हैं। परिवार से दूर रहना, घंटों पसीने में नहाए रहना, दमघोंटू पीपीई किट में ड्यूटी करना, मरीज का इलाज करना, खुद को संक्रमण से बचाना... यह हर डॉक्टर की कहानी है। यही वजह है कि इस बार का राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस कोरोना योद्धाओं के नाम है।
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बच्चों से दूर रहकर की कोरोना ड्यूटी

मेडिसन विभाग में सह आचार्य डॉ. श्वेता शर्मा ने कोविड-19 आईसीयू में कई बार ड्यूटी की। घर में दो बच्चे होने के कारण अधिकतर समय उनसे अलग रहना पड़ता था। बच्चों को देखने के लिए वीडियो कॉल करनी पड़ती थी। गंभीर मरीजों का इलाज करना तो चुनौती थी। फिर भी ईश्वर ने मरीजों की सेवा और उनकी जिंदगी बचाने का मौका दिया।

मां को कोरोना में खोया, खुद कोविड वार्ड में की ड्यूटी
- फिजियोथेरेपिस्ट सौरभ त्यागी ने पिछले साल कोविड डयूटी के दौरान अपनी स्टाफ नर्स मां को खोया था। अब उन्होंने कोविड वार्ड में ड्यूटी की। वह गंभीर मरीजों को चेस्ट थेरेपी देते हैं। यह थेरेपी मरीजों को निमोनिया होने पर सांस लेने में दिक्कत होने पर दी जाती है, जिससे मरीजों के फेफड़ों में जमे बलगम को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

लैब में जान जोखिम में...घर में रहकर भी अपनों से दूर 
- मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब में हर रोज छह हजार से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। इसके प्रभारी डॉ. अमित गर्ग जान जोखिम में डालकर टेस्ट करते हैं और घर में रहने के बावजूद अपनों से दूर रहते हैं। घर के बाहर के कमरे में अपना ठिकाना बनाया हुआ है। पिछले दिनों उनकी माता की मृत्यु हो गई थी, इसके बावजूद वह अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। अब तक मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी लैब में लाखों लोगों की जांच कर चुके हैं। मेरठ के अलावा अन्य जिलों के सैंपलों की भी जांच करते हैं।

ब्लैक फंगस के 40 से ज्यादा मरीजों के ऑपरेशन किए
दूसरी लहर में ब्लैक फंगस का भी हमला रहा। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. वीपी सिंह ने न सिर्फ 40 से ज्यादा मरीजों को ऑपरेशन कर ठीक किया, बल्कि इन मरीजों पर शोध भी कर रहे हैं। 150 से ज्यादा मरीज इस अध्ययन में शामिल हैं। यह शोध और चिकित्सकों की भी मदद करेगा। इस बीमारी से निजात दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।

इसलिए मनाया जाता है दिवस
भारत में प्राचीन काल से ही वैद्य परंपरा रही है। जैसे- चरक, धनवन्तरि, जीवक और सुश्रुत आदि। वहीं हर साल भारत में डॉक्टर बिधानचंद्र राय के जन्मदिन के रूप में एक जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। बिधानचंद्र राय एक महान चिकित्सक के अलावा पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। साल 1991 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाने की शुरुआत की थी। डॉक्टर बिधानचंद्र राय का जन्मदिन और पुण्यतिथि दोनों ही एक जुलाई को होती है। इस दिन चिकित्सकों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है।

लॉकडाउन में फैमिली डॉक्टर से मजबूत हुआ रिश्ता

निजी अस्पतालों में चिकित्सा के अधिक व्यावसायीकरण के चलते हाल के कुछ वर्षों में चिकित्सकों और मरीजों के बीच भरोसा कम जरूर हुआ है, लेकिन कोरोना काल और लॉकडाउन के बीच कई चिकित्सक ऐसे रहे जिन्होंने नाजुक समय में विश्वास को और बढ़ाया है। इनमें भी फैमिली डॉक्टर ने तो अपनों की तरह चिकित्सा सेवा और मदद की है। ऐसे चिकित्सकों ने ऑनलाइन ही अपने मरीजों को नियमित रूप से निशुल्क परामर्श देकर उनकी जिंदगी बचाने का काम किया है। ऐसे ही कुछ चिकित्सकों और मरीजों से बातचीत कर उनके बीच विश्वास और संबंध की स्थिति जानने की कोशिश की गई।

कोरोना में डॉक्टर ने हौसला बढ़ाया
- मेरे फैमिली डॉक्टर विवेक यादव का ईव्ज चौराहे पर अस्पताल है। कोविड के दौरान मुझे और बेटे को बुखार हुआ तो पूरा परिवार चिंतित था। वीडियो कालिंग और अन्य माध्यम से वे लगातार संपर्क में रहे। मेल पर भेजते रहे। कई बार उन्होंने स्वयं भी फोन किया। इससे हौसला बढ़ा और हम ठीक हो गए। - सुधांशु निवासी पांडव नगर। 

डिप्रेशन के समय पूरा सहयोग मिला
- विवाह के 10 साल बाद डिप्रेशन की समस्या हो गई थी। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि राणा से संपर्क हुआ। वह अब हमारे फैमिली डॉक्टर हैं। चिकित्सा संबंधी किसी भी समस्या में उनका परामर्श अनिवार्य रूप से लिया जाता है। लॉकडाउन में भी कोविड ग्रस्त होने पर उनका पूरा सहयोग मिला। घर में दवाओं से पूर्व स्वस्थ हो गई। - सोनम वर्मा निवासी सोमदत्त विहार।
जरूरत में पूरा साथ दिया

- लॉकडाउन के दौरान पत्नी सारिका सिंघल के संक्रमित होने पर फैमिली डॉक्टर नवीन गोयल ने पूरा ट्रीटमेंट किया। पिता की उम्र 77 वर्ष है। पिता को कुछ भी समस्या होने पर डॉक्टर को फोन करना पड़ता है। लखनऊ में जीजा जी के अस्वस्थ होने पर उन्हें निशुल्क परामर्श मिला। - विपुल सिंघल निवासी जगन्नाथपुरी।  

चिकित्सक नहीं, दोस्त की तरह दिया साथ
-हमारे फैमिली डॉक्टर पंकज गोयल वैसे तो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसके साथ ही वह हमारे दोस्त भी हैं। मई माह में जब भाई और भाभी संक्रमित हो गए तब डॉक्टर भी पॉजिटिव थे। बीमारी में भी उन्होंने हमें उचित सलाह दी। जब बेटे में और मुझमें कोविड के लक्षण दिखे तो हमारी नियमित रूप से निगरानी की। - विनेश जैन निवासी सदर।

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