नेताजी सुभाष चंद्र बोस का क्रांतिधरा से भी पुराना नाता रहा है। वह अविस्मरणीय पल आज भी यहां के लोगों के जेहन और दस्तावेजों में ताजा हैं। जब पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रांतिधरा मेरठ आए थे तो हजारों की भीड़ उनके स्वागत के लिए रेलवे स्टेशन पर जुट गई थी। उनकी एक झलक पाने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था।
क्या आप जानते हैं नेताजी से जुड़ी ये खास बातें? क्रांतिधरा में एक झलक पाने को उमड़ गई थी भीड़
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आजादी की लड़ाई उस वक्त जोरों पर थी। हर कोई उसमें शिरकत करने को बेताब था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस उस समय आजादी की लड़ाई के लिए एक बड़ा नाम बन चुके थे, हर व्यक्ति उनसे मिलना चाहता था।
वरिष्ठ इतिसहार डॉ. केके शर्मा बताते हैं कि आजादी की लड़ाई के उस दौर में वर्ष 1939 में गांधीजी से मतभेद होने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। जब नेताजी के समर्थकों को इस बात का पता चला तो कांग्रेस के कुछ पदाधिकारी पार्टी से अलग होने लगे। जैसे ही पता चला कि नेताजी मेरठ आ रहे हैं तो पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी गईं। क्रांतिधरा पर नेताजी के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए रात भर तैयारी की गई। उस समय घोड़ा बग्घी का बड़ा क्रेज था। नेताजी के लिए लिए खंदक बाजार से एक रईस व्यक्ति की बग्घी मांगी गई। दो घोड़ों की इस बग्घी को दुल्हन की तरह सजाया गया था। बग्घी को सजाकर रेलवे स्टेशन पर ले जाया गया।
रेलवे स्टेशन पर उस समय हजारों की भीड़ एकत्र हो चुकी थी। मेरठ कॉलेज के छात्रों ने भी हिस्सा लिया। बग्घी के आगे चलने के लिए ढोल नगाड़ों के साथ बैंड भी था। रेलवे स्टेशन पर नेताजी का पूरे जोश के साथ स्वागत कर सजी हुई बग्घी में बैठाया गया। आगे नेताजी की बग्घी थी और पीछे-पीछे हजारों का कारवां। उन्हें टाऊन हॉल में लाया गया, जहां हजारों लोगों को संबोधित कर नेताजी ने आजादी के लिए चिंगारी पैदा की थी। नेताजी की यादें आज भी यहां की फिजाओं में हैं। शहर का प्रमुख स्मारक घंटाघर द्वार नेताजी के नाम पर है। वहीं, चौधरी चरण सिंह विवि कैंपस में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर प्रेक्षागृह भी है।
पूरे जोश के साथ मिलाते थे हाथ
डॉ. केडी शर्मा बताते हैं कि हजारों की भीड़ नेताजी के पीछे थी। देश भक्ति के नारे गूंज रहे थे। उस समय पंडित प्यारेलाल शर्मा के अलावा कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता साथ में थे। शांति त्यागी ने एक बैठक में सभी का परिचय कराया। इसके बाद जनसभा की तैयारी की गई। इसमें नेताजी का संबोधन होना था। भाषण के लिए घंटाघर स्थित टाउन हॉल चुना गया। नेताजी जिससे भी हाथ मिलाते थे, पूरे जोश के साथ मिलाते थे। टाउन हॉल के बाद नेताजी जीआईसी भी गए थे। बेगमबाग के मैदान में भी उन्होंने सभा की।