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तनाव के संकेतों को नजरअंदाज न करें : प्रिया पाल
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- सीसीएसयू में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सीसीएसयू के जंतु विज्ञान विभाग में मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम किया गया। मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, मनोविज्ञान विभाग और मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के सहयोग से हुए कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने, समस्याओं पर खुलकर बात करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए जागरूक किया।
मुख्य वक्ता परामर्श मनोवैज्ञानिक प्रिया पाल ने कहा कि युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है। विद्यार्थी बिना झिझक अपनी परेशानियां साझा करें। तनाव के संकेतों को नजरअंदाज न करें ताकि समय पर विशेषज्ञ की मदद ले सकें। मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने कहा कि लगातार उदासी, असहायता की भावना, चिड़चिड़ापन, ऊर्जा में कमी, सामाजिक दूरी या अकेले रहने की प्रवृत्ति जैसे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना, उसके साथ खड़ा रहना और जरूरत पड़ने पर उसे उचित मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान विभाग में मानसिक स्वास्थ्य एवं वेल बीइंग सेंटर वर्ष 2018 से संचालित है। विद्यार्थी यहां मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। संचालन एवं समन्वय मनोवैज्ञानिक शिवानी शर्मा और सागर तोमर ने किया। एमए मनोविज्ञान के विद्यार्थियों ने जागरूकता पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की। इसके माध्यम जरूरतमंद व्यक्ति के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने का संदेश दिया गया। सत्र में जंतु विज्ञान और मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने सहभागिता की और मानसिक स्वास्थ्य, तनाव व भावनात्मक कठिनाइयों से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना कमजोरी नहीं बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी का संकेत है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सीसीएसयू के जंतु विज्ञान विभाग में मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता कार्यक्रम किया गया। मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र, मनोविज्ञान विभाग और मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के सहयोग से हुए कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को तनाव के शुरुआती संकेत पहचानने, समस्याओं पर खुलकर बात करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए जागरूक किया।
मुख्य वक्ता परामर्श मनोवैज्ञानिक प्रिया पाल ने कहा कि युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है। विद्यार्थी बिना झिझक अपनी परेशानियां साझा करें। तनाव के संकेतों को नजरअंदाज न करें ताकि समय पर विशेषज्ञ की मदद ले सकें। मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने कहा कि लगातार उदासी, असहायता की भावना, चिड़चिड़ापन, ऊर्जा में कमी, सामाजिक दूरी या अकेले रहने की प्रवृत्ति जैसे बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना, उसके साथ खड़ा रहना और जरूरत पड़ने पर उसे उचित मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
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उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान विभाग में मानसिक स्वास्थ्य एवं वेल बीइंग सेंटर वर्ष 2018 से संचालित है। विद्यार्थी यहां मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। संचालन एवं समन्वय मनोवैज्ञानिक शिवानी शर्मा और सागर तोमर ने किया। एमए मनोविज्ञान के विद्यार्थियों ने जागरूकता पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की। इसके माध्यम जरूरतमंद व्यक्ति के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने का संदेश दिया गया। सत्र में जंतु विज्ञान और मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने सहभागिता की और मानसिक स्वास्थ्य, तनाव व भावनात्मक कठिनाइयों से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना कमजोरी नहीं बल्कि जागरूकता और जिम्मेदारी का संकेत है।
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