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Meerut News: मेरठ में डिजिटल संग्रहालय की तैयार, भारतीय ज्ञान परंपरा का होगा संरक्षण
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मेरठ: भारतीय ज्ञान परंपरा की गौरवशाली विरासत और स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में मेरठ को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मेरठ में डिजिटल संग्रहालय की स्थापना की घोषणा करते हुए कहा कि यह संस्थान इतिहास, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा।
मेरठ कॉलेज और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन दिवस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इससे नई पीढ़ी को अपने इतिहास और परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा। कहा कि जैसे ही प्रशासन की ओर से भूमि का प्रस्ताव मिलेगा, संग्रहालय के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मेरठ कॉलेज ने भी संग्रहालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वाचस्पति मिश्र ने भी भरोसा दिलाया कि कॉलेज सरकार के इस प्रयास में पूरा सहयोग देगा।
जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों ने सदियों पहले सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना के साथ विश्व को मानव कल्याण का मार्ग दिखाया। यह सनातन परंपरा किसी एक धर्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण के लिए ज्ञान का प्रसार करती रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मुस्लिम और अंग्रेज शासकों के अधीन रहने के बाद देश को अब वैचारिक स्वतंत्रता भी मिली है। वर्तमान सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए नीति स्तर पर कई प्रयास कर रही है।
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ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शांतनु त्यागी ने कहा कि भारतीय ऋषियों ने विश्व को अनेक महत्वपूर्ण ज्ञान दिए। ब्रह्मगुप्त ने शून्य की अवधारणा दी, शुल्बसूत्र में ज्यामिति का उल्लेख मिलता है, ऋषि कणाद ने वैशेषिक दर्शन के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर विचार प्रस्तुत किए और ऋषि सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि आज दुनिया इन ज्ञान परंपराओं को अपनाकर आधुनिकता का दावा करती है, जबकि औपनिवेशिक काल में भारत की छवि को जानबूझकर कमजोर दिखाया गया।
पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लॉर्ड मैकाले की नीतियों ने भारत की शिक्षा, संस्कृति और न्याय व्यवस्था को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर हीनभावना को समाप्त किया जा सकता है। कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव विवेक गर्ग ने शिक्षा में सनातन मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया। वहीं, प्राचार्य डॉ. युद्धवीर सिंह ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन से जुड़ी कुछ व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि निजी व्यवस्थाओं की आवश्यकता और अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ जैसे मुद्दों पर पुनर्विचार होना चाहिए।
समारोह के दौरान विभिन्न विषयों की मेधावी छात्राओं को पांच हजार रुपये के चेक, मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बरनावा और अनूपशहर के गुरुकुलों के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष विवेक रस्तोगी, पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, प्रो. अल्पना रस्तोगी, प्रो. रेखा राणा, डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. चंद्रशेखर भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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मेरठ कॉलेज और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन दिवस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इससे नई पीढ़ी को अपने इतिहास और परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा। कहा कि जैसे ही प्रशासन की ओर से भूमि का प्रस्ताव मिलेगा, संग्रहालय के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। मेरठ कॉलेज ने भी संग्रहालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वाचस्पति मिश्र ने भी भरोसा दिलाया कि कॉलेज सरकार के इस प्रयास में पूरा सहयोग देगा।
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जयवीर सिंह ने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों ने सदियों पहले सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना के साथ विश्व को मानव कल्याण का मार्ग दिखाया। यह सनातन परंपरा किसी एक धर्म तक सीमित नहीं रही, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण के लिए ज्ञान का प्रसार करती रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मुस्लिम और अंग्रेज शासकों के अधीन रहने के बाद देश को अब वैचारिक स्वतंत्रता भी मिली है। वर्तमान सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए नीति स्तर पर कई प्रयास कर रही है।
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ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शांतनु त्यागी ने कहा कि भारतीय ऋषियों ने विश्व को अनेक महत्वपूर्ण ज्ञान दिए। ब्रह्मगुप्त ने शून्य की अवधारणा दी, शुल्बसूत्र में ज्यामिति का उल्लेख मिलता है, ऋषि कणाद ने वैशेषिक दर्शन के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर विचार प्रस्तुत किए और ऋषि सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि आज दुनिया इन ज्ञान परंपराओं को अपनाकर आधुनिकता का दावा करती है, जबकि औपनिवेशिक काल में भारत की छवि को जानबूझकर कमजोर दिखाया गया।
पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लॉर्ड मैकाले की नीतियों ने भारत की शिक्षा, संस्कृति और न्याय व्यवस्था को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर हीनभावना को समाप्त किया जा सकता है। कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव विवेक गर्ग ने शिक्षा में सनातन मूल्यों को अपनाने पर जोर दिया। वहीं, प्राचार्य डॉ. युद्धवीर सिंह ने नई शिक्षा नीति (एनईपी) के क्रियान्वयन से जुड़ी कुछ व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि निजी व्यवस्थाओं की आवश्यकता और अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ जैसे मुद्दों पर पुनर्विचार होना चाहिए।
समारोह के दौरान विभिन्न विषयों की मेधावी छात्राओं को पांच हजार रुपये के चेक, मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बरनावा और अनूपशहर के गुरुकुलों के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष विवेक रस्तोगी, पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, प्रो. अल्पना रस्तोगी, प्रो. रेखा राणा, डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. चंद्रशेखर भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।