ममता और आस्था की मिसाल: मौसी ने भांजे संग उठाया 21 लीटर गंगाजल, दिव्यांग रीता तीन बेटियों संग लाई 36वीं कांवड़
हरिद्वार से मेरठ तक मौसी-भांजे की 21 लीटर की कांवड़ और दिव्यांग रीता की 36वीं यात्रा ने सबका मन छू लिया। रीता व्हीलचेयर से अपनी तीन बेटियों के साथ गंगाजल लेकर पहुंचीं।
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मौसी-भांजे की जोड़ी बनी प्रेरणा
मेरठ निवासी सलोनी ने अपने भांजे कार्तिक के साथ हरिद्वार से 21 लीटर गंगाजल की कलश कांवड़ उठाई। वे 16 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल लेकर यात्रा पर निकली थीं और आज मेरठ पहुंचीं। शिवरात्रि पर शिव का जलाभिषेक करेंगी। सलोनी कहती हैं कि यह उनकी पहली कांवड़ है। अपने अनुभव को लेकर उन्होंने कहा कि भक्ति में जब अपने साथ हों, तो थकान नहीं लगती।
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व्हीलचेयर पर कांवड़-36वीं बार कांवड़ लाईं दिव्याग रीता
गाजियाबाद निवासी दिव्यांग महिला रीता की कहानी भावुक कर देने वाली है। उन्होंने अपनी व्हीलचेयर पर बैठकर हरिद्वार से 36वीं बार कांवड़ यात्रा पूरी की। उनके साथ तीन बेटियां-सिया (8), आंचल (12) और चंचल (15) भी पैदल यात्रा करती रहीं हैं और हरिद्वार से गंगाजल लेकर मेरठ तक आईं। वह आज गाजियाबाद पहुंच जाएंगी।
रीता ने बताया कि उनके पति पैरालिसिस के शिकार हैं, इसलिए वे इस बार साथ नहीं आ सके। लेकिन रीता ने हार नहीं मानी, व्हीलचेयर खुद चलाकर और बेटियों की मदद से हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव को समर्पित करने का संकल्प पूरा किया।
रीता की ससुराल मेरठ में है और वे गाजियाबाद में रहती हैं। शादी से पहले से ही वे कांवड़ ला रही हैं, यह उनकी 36वीं यात्रा है। रीता बताती हैं कि उनकी बड़ी बेटी की भी यह सातवीं कांवड़ है।