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Meerut News: हनुमान-भरत मिलाप का प्रसंग सुनकर भावुक हुए श्रद्धालु
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- हनुमान कथा में संजीवनी बूटी लाने के प्रसंग ने रोमांचित भी किया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिल्ली रोड स्थित जगदीश मंडप में चल ही हनुमान कथा में चौथे दिन हनुमान-भरत मिलाप का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। कथा वाचक डॉ. भृगुमणि महाराज ने हनुमान जी की महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए संजीवनी बूटी का प्रसंग भी सुनाया। बूटी की जगह पर्वत उठाकर लाने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु रोमांचित भी हुए।
कथा वाचक ने राम रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूर्छित होने और हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मण अचेत हो गए तो भगवान श्रीराम अत्यंत चिंतित हो उठे। वैद्य सुषेण के निर्देश पर बजरंग बली संजीवनी बूटी लेने गए और पूरा पर्वत ही उठा लाए।
कथा के दौरान भरत-हनुमान मिलाप के प्रसंग ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि मार्ग में भरत ने आकाश में पर्वत ले जाते हुए हनुमान को देखा और उन्हें शत्रु समझकर बाण चला दिया। हनुमान के मुख से श्रीराम का नाम निकला तो भरत जी तुरंत उनके पास पहुंचे। हनुमान से पूरा वृत्तांत सुनकर भरत जी व्यथित हुए और उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया। हनुमान जी की भक्ति और सेवा से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने उन्हें भरत के समान प्रिय बताया।
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कथा में सुग्रीव व श्रीराम मित्रता और बाली वध के प्रसंग का भी वर्णन किया गया। इस अवसर पर डाॅ. महेश योगी, अमित अग्रवाल, पुनीत गोयल, आनंद प्रकाश गर्ग, पवन गर्ग, प्रशांत जैन, शुभम कक्कड़ आदि रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिल्ली रोड स्थित जगदीश मंडप में चल ही हनुमान कथा में चौथे दिन हनुमान-भरत मिलाप का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। कथा वाचक डॉ. भृगुमणि महाराज ने हनुमान जी की महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए संजीवनी बूटी का प्रसंग भी सुनाया। बूटी की जगह पर्वत उठाकर लाने का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु रोमांचित भी हुए।
कथा वाचक ने राम रावण युद्ध के दौरान लक्ष्मण के मूर्छित होने और हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब मेघनाद की शक्ति से लक्ष्मण अचेत हो गए तो भगवान श्रीराम अत्यंत चिंतित हो उठे। वैद्य सुषेण के निर्देश पर बजरंग बली संजीवनी बूटी लेने गए और पूरा पर्वत ही उठा लाए।
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कथा के दौरान भरत-हनुमान मिलाप के प्रसंग ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि मार्ग में भरत ने आकाश में पर्वत ले जाते हुए हनुमान को देखा और उन्हें शत्रु समझकर बाण चला दिया। हनुमान के मुख से श्रीराम का नाम निकला तो भरत जी तुरंत उनके पास पहुंचे। हनुमान से पूरा वृत्तांत सुनकर भरत जी व्यथित हुए और उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया। हनुमान जी की भक्ति और सेवा से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने उन्हें भरत के समान प्रिय बताया।
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कथा में सुग्रीव व श्रीराम मित्रता और बाली वध के प्रसंग का भी वर्णन किया गया। इस अवसर पर डाॅ. महेश योगी, अमित अग्रवाल, पुनीत गोयल, आनंद प्रकाश गर्ग, पवन गर्ग, प्रशांत जैन, शुभम कक्कड़ आदि रहे।