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रैपिड रेल का काम चलने के बावजूद बनाया डिवाइडर महीने भर में ही टूटा

Wed, 05 Aug 2020 01:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2020 01:57 AM IST
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Despite the work of the rapid rail, the dividers were broken within a month
रैपिड रेल का काम चलने के बावजूद बनाया डिवाइडर महीने भर में ही टूटा
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मेरठ। हाईवे पर पीडब्ल्यूडी की ओर से बनाया गया डिवाइडर महीने भर में ही टूटने लगा है। उसमें जगह जगह दरारें नजर आ रही हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि डिवाइडर निर्माण में लाखों की बंदरबाट हुई है। दूूसरी ओर एनसीआरटीसी का निर्माण कार्य मोहिउद्दीनपुर पुलिस चौकी तक पहुंच गया है। एनसीआरटीसी इंजीनियरों का दावा है कि बनाया गया डिवाइडर जल्द तोड़ा जाएगा।
परतापुर तिराहे से आगे दिल्ली-देहरादून हाईवे पर मोहिउद्दीनपुर चौकी से भूड़बराल तक डिवाइडर का निर्माण एक माह पहले किया गया। अमर उजाला ने उस समय भी 50 लाख रुपये की लागत से बेवजह बनाए जा रहे डिवाइडर पर सवाल उठाए थे। यह मामला प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा के सामने भी रखा था। इस पर प्रभारी मंत्री ने डीएम को अवगत कराने का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी किसी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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रैपिड रेल पिलर के लिए बैरिकेडिंग शुरू
कादराबाद पुलिस चौकी से मोहिउद्दीनपुर पुलिस चौकी तक एनसीआरटीसी द्वारा बैरिकेडिंग लगाने का काम शुरू हो गया है। एक तरफ बैरिकेडिंग लगा दी गई है। कुछ दिनों में दूसरी तरफ बैरिकेडिंग लगाकर डिवाइडर को तोड़ने का काम किया जाएगा। निर्माण के दौरान पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार ने कहा था कि एनसीआरटीसी की सहमति के बाद ही यहां डिवाइडर बनाया जा रहा है। साढ़े तीन किमी के इस डिवाइडर पर लगभग 50 लाख रुपये खर्च होंगे।
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अमर उजाला ने बताया था विकल्प
अमर उजाला ने उस समय खबर में पीडब्ल्यूडी को विकल्प दिया था। जिसमें एनसीआरटीसी के साथ समन्वय बनाते हुए डिवाइडर के स्थान पर बैरिकेडिंग लगाने के लिए कहा था। बैरिकेडिंग को शताब्दीनगर के ही कास्टिंग यार्ड में बनाया जा रहा है। डिवाइडर के स्थान पर इन्हें आसानी से लगाया जा सकता था।
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