फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Deoband: Madani leaves a debate over his resignation,matter reach to Pakistan via social media

देवबंद: पाकिस्तान में भी मदनी के इस्तीफे की चर्चा, खुद को क्यों लिखा नकारा, छिड़ी बड़ी बहस 

Thu, 17 Jan 2019 11:35 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 17 Jan 2019 11:35 AM IST
विज्ञापन
Deoband: Madani leaves a debate over his resignation,matter reach to Pakistan via social media
मौलाना सैय्यद महमूद मदनी
देवबंद में जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। अचानक लिए गए इस फैसले से सभी हैरान है। यहां तक कि पाकिस्तान में भी मदनी के इस्तीफे को लेकर हलचल मच गई। हालांकि इस्तीफा देने की क्या वजह रही इसके बारे में न तो मदनी कुछ कहने को तैयार हैं और न ही कारी उस्मान कुछ ही बता पा रहे हैं।
विज्ञापन


मुसलमानों की सबसे बड़ी जमात जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना सैय्यद महमूद मदनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने मंगलवार की रात्रि अध्यक्ष कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को अपना इस्तीफा एक बंद लिफाफे में भेजा। जिसे पढ़कर कारी उस्मान मंसूरपुरी काफी परेशान हुए।
विज्ञापन


मदनी ने जो त्यागपत्र कारी उस्मान को भेजा उसमें कुछ शब्दों का इस्तेमाल किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। मदनी ने इस्तीफे में स्वयं को नकारा लिखा है। मदनी द्वारा भेजे गए इस्तीफे की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो इस्लामिक हल्कों में चर्चाओं का बाजार भी गरम हो गया। इस संबंध में मौलाना महमूद मदनी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्होंने इस्तीफा दिया है, लेकिन इसकी वजह क्या है इस पर मदनी ने केवल इतना ही कहा कि उन्होंने इस्तीफे में सब कुछ लिखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, जमीयत अध्यक्ष कारी उस्मान मंसूरपुरी ने बताया कि मंगलवार की रात्रि उन्हें मदनी का इस्तीफा मिल गया। अचानक इस्तीफा देने के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि मौलाना महमूद मदनी कई बार मौखिक रूप से अपनी मजबूरियां जाहिर कर चुके हैं। बता दें कि मौलाना महमूद मदनी वर्ष 2001 से जमीयत में महासचिव पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके पद से इस्तीफा देने को लेकर इस्लामिक हल्कों में बहस छिड़ी हुई है।  

जमीयत पर मदनी परिवार का ही रहा कब्जा 
जमीयत उलमा-ए-हिंद का गठन वर्ष 1919 में हुआ था। गठन के बाद से ही जमीयत पर मदनी परिवार काबिज रहा है। यही वजह है कि इसमें अध्यक्ष और महासचिव पद मदनी परिवार के किसी सदस्य को हो चुना गया है। देशभर के मुसलमानों की स्थिति में सुधार लाने और दीन इस्लाम का परचम बुलंद करने के लिए वर्ष 1919 में जमीयत उलमा-ए-हिंद का गठन किया गया। जिसमें देश के प्रमुख उलमा को शामिल किया गया। गठन के साथ ही जमीयत ने पूरे मुल्क में अपना दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया।

यही वजह है कि चंद सदस्यों से शुरू हुई जमीयत उलमा आज करीब एक करोड़ सदस्यों को साथ लेकर चल रही है। समय गुजरने के साथ ही जमीयत पर हक जताने को लेकर विवाद भी शुरू हो गया। यह विवाद वर्ष 2007 में तब जगजाहिर हुआ जब चाचा मौलाना अरशद मदनी और भतीजे मौलाना महमूद मदनी के बीच जमीयत को लेकर आपसी मनमुटाव हो गया। धीरे धीरे समय गुजरा तो विवाद की जड़ें भी गहरी होती चली गई। जिसके चलते वर्ष 2008 में जमीयत दो फाड़ हो गई।

एक जमीयत पर अरशद मदनी काबिज हुए और उसका सदर बन गए। जबकि दूसरी जमीयत पर मौलाना महमूद मदनी ने अपना कब्जा जमा लिया और मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी को अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। यह बात भी गौर करने वाली है कि मौलाना महमूद मदनी शुरू से ही जमीयत में महासचिव पद पर रहे और आज तक वो इसी पद पर चले आ रहे थे। 

17 साल बाद मदनी के इस्तीफे की क्या वजह रही
मौलाना महमूद मदनी पिछले करीब 17 वर्षों से जमीयत उलमा-ए-हिंद में राष्ट्रीय महासचिव के पद पर नियुक्त चले आ रहे हैं। आखिर ऐसी कौन सी वजह बनी जो अचानक उन्हें इतने पुराने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। वर्ष 1992 में मौलाना महमूद मदनी ने दारुल उलूम से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। जिसके बाद वह सामाजिक कार्यों में जुट गए। इस दौरान बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना हुई तो मौलाना महमूद मदनी पीड़ितों की सहायता के लिए सड़क पर निकल पड़े।

उन्होंने स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक कार्यालयों के आसपास बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ घेराबंदी की और तुरंत न्याय के लिए अपनी मांगों पर झुकने के लिए मजबूर कर दिया। 24 दिसंबर 2001 को उन्हें जमीयत में महासचिव पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि इस दौरान वह सदस्य के रुप में संगठन में बने रहे। संगठन में कोई भी ऐसा नहीं जो मदनी से किसी प्रकार की नाराजगी रखता हो। लेकिन अचानक उनका इस्तीफा दिया जाना सभी को हैरान करने वाला है। वजह क्या है इस पर जमीयत के पदाधिकारी से लेकर सदस्य तक चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि हर कोई जानना चाहता है कि आखिर मौलाना मदनी ने इस्तीफा क्यों दिया।

पाकिस्तान में भी इस्तीफे की चर्चा
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी के इस्तीफे को लेकर हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि सरहद पार भी चर्चाएं हो रही हैं। दरअसल मौलाना महमूद मदनी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में अच्छी पकड़ रखते हैं। कई बार मदनी का पाकिस्तान में भव्य स्वागत भी किया गया। यही वजह है कि बुधवार को उनके इस्तीफे को लेकर पाकिस्तान में भी चर्चा हो रही है।

इस्लामिक और राजनीति हल्कों में मजबूत पकड़ रखने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना महमूद मदनी ने बुधवार को महासचिव पद से त्यागपत्र दिया तो इसकी गूंज पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी सुनने को मिली। इस्तीफे को लेकर जहां मुल्क के भीतर तरह तरह की चर्चाएं होने लगी।  वहीं यह इस्तीफा सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हुआ तो सीधा पाकिस्तान तक जा पहुंचा। पाकिस्तान में इस्तीफे पर चर्चा होने को लेकर संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर जानकारी दी है।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed