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Meerut News: खेल कारोबारी और परिजनों पर दर्ज दुष्कर्म के मामले में आपराधिक कार्यवाही खारिज

Sat, 25 Nov 2023 02:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Nov 2023 02:08 AM IST
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Criminal proceedings dismissed in rape case registered against sports businessman and his family
मेरठ। एक महिला अधिवक्ता की ओर से खेल कारोबारी और उनके परिवार पर वर्ष 2021 में दर्ज कराए गए दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए आपराधिक कार्यवाही खारिज कर दी है। परिवादी पक्ष ने कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।
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शहर की एक महिला अधिवक्ता ने मार्च 2021 में मोहनपुरी में रहने वाले आरुणि मित्तल, पिता अजय मित्तल, बहन और मां के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा सिविल लाइन थाने में दर्ज कराया था। इस मामले में सिविल लाइन थाने के विवेचक भूपेंद्र सिंह ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। मामले में पुलिस ने आरुणि की बहन को भी जेल भेज दिया था। आरुणि मित्तल ने आरोप लगाया था कि महिला अधिवक्ता उनसे पांच करोड़ रुपये ऐंठना चाहती हैं। इसलिए उनके खिलाफ दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। बाद में उनसे डेढ़ करोड़ रुपये की मांग की गई, लेकिन मांग पूरी न होने पर जेल भिजवाने की धमकी दी गई थी।
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इस प्रकरण को लेकर आरुणि मित्तल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। दोनों पक्षों ने इस मामले में अपने गवाह और साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही खारिज कर दी है। आरुणि मित्तल का कहना है कि दुष्कर्म के मुकदमे में लोगों को गलत फंसाया जा रहा है। उन्हें इंसाफ मिला है।
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अदालत ने अपने फैसले में दी छह नजीर
शहर के इस बहचर्चित मामले में अदालत ने छह नजीर भी अपने फैसले में शामिल की हैं। महाराष्ट्र के प्रमोद सूर्यभान पंवार बनाम महाराष्ट्र सरकार, झारखंड के महेश्वर तिग्गा बनाम झारखंड सरकार, नईम अहमद बनाम दिल्ली सरकार, दिलीप सिंह बनाम बिहार सरकार, दीपक गुलाटी बनाम हरियाणा, डॉ. ध्रुवारम मुरलीधर सोनार बनाम महाराष्ट्र सरकार के फैसले की नजीर को शामिल किया गया है।

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महिला थाने में दर्ज हुआ था एक मुकदमा
आरुणि मित्तल ने बताया कि उनके खिलाफ एक मुकदमा महिला थाने में भी दर्ज कराया गया था। इसमें उन पर महिला अधिवक्ता की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए थे। उस समय एसएसपी के समक्ष पेश होकर मुकदमे का विरोध जताया गया था। तब इस मामले को पुलिस ने एक्सपंज कर दिया था।
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यदि आदेश हमारे पक्ष में नहीं होगा तो हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। -वादी, महिला अधिवक्ता।
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