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मैनेजमेंट के छात्र, बिजनेस ठगी का
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
Updated Thu, 05 Nov 2015 03:04 AM IST
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ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का साइबर क्राइम सेल ने बुधवार को भंडाफोड़ किया है। इस आठ सदस्यीय गिरोह में सरगना समेत तीन शातिर सदस्य दबोचे गए हैं, जिनमें दो आरोपी एमबीए के छात्र हैं।
जो बैंकों से लोन दिलाने और मकान फाइनेंस कराने का झांसा देकर ठगी करते आ रहे थे। इनके कब्जे से फर्जी आईडी, पासबुक और चेकबुक के अलावा फर्जी मुहर, पेन कार्ड, आधार कार्ड, स्टांप पेपर और लैपटॉप बरामद हुए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि यह गिरोह करीब 10 माह में 200 से ज्यादा लोगों को ठग चुका है।
एसएसपी डीसी दूबे ने बुधवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों युवक इंटरनेट के जरिये लोगों से ठगी करते थे। इन्होंने फर्जी आईडी से ‘एडिशन फाइनेंस डॉट कॉम’ नाम से वेबसाइट बना रखी थी। जिसमें बैंक से लोन या मकान पर फाइनेंस करने के नाम पर ठगी की जाती थी। इस गिरोह का धंधा अंतर्राज्यीय स्तर पर चलता था।
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ये हुए गिरफ्तार
इस गिरोह ने 10 माह पहले वेस्टर्न कचहरी रोड स्थित एक कांपलेक्स में फाइनेंस ऑफिस खोला था। जहां साइबर क्राइम सेल और सिविल लाइन थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से की गई छापामारी में रिहान अख्तर उर्फ समीर उर्फ आकाश पुत्र अख्तर नवाज उर्फ गोपाल शिंदे निवासी पुरानी तहसील कोतवाली, अब्दुल बारी उर्फ दीपक कुमार पुत्र जसीमुद्दीन उर्फ रमेश कुमार निवासी शिव चौक बागपत गेट, सैयद बिलाल उर्फ समी मलिक पुत्र सैयद शाकिर उर्फ सारिक निवासी खैरनगर, देहली गेट को गिरफ्तार कर लिया।
यह हुई बरामदगी
तीन लैपटॉप, एक प्रिंटर, एडिशन फाइनेंस, एपेक्स फाइनेंस सोल्यूशन, जानवी फाइनेंस की 21 छोटी-बड़ी मुहरें। विभिन्न राज्यों के स्टांप पेपर, लेटर टाइपशुदा स्टांप पेपर, छह मोबाइल फोन, दो वाकी-टाकी, 15 बैंकों की चेक बुक, 18 एटीएम कार्ड, दो शॉपिंग कार्ड, छह पेन कार्ड, पांच वोटर आईडी, दो आधार कार्ड, कई कंपनियों के नाम से कागजात।
ऐसे करते थे ठगी
एसएसपी के अनुसार गिरोह के सरगना रिहान अख्तर और बिलाल एमबीए के छात्र हैं। जबकि अब्दुल बारी इंटर पास है। इस गिरोह में एमबीए के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। एमबीए कोर्स करते करते छात्र-छात्राओं को नौकरी दिलाने के बहाने उनको अपने साथ जोड़ लेते हैं।
इन छात्र-छात्राओं से फर्जी नाम और आईडी बताकर लोगों को कॉलिंग कराई जाती थी। बैंक से लोन दिलाने या मकान आदि फाइनेंस कराने के नाम पर एडवांस रकम फर्जी आईडी के खातों में जमा करा ली जाती थी। जिसके बाद खाते बंद कर यह रकम हड़प ली जाती थी।
महानगर में बड़ा नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया कि फर्जी आईडी पर करीब एक दर्जन से अधिक फाइनेंसरों ने अलग-अलग कंपनियों के नाम से महानगर में ऐसे ऑफिस खोल रखे हैं। पूछताछ में युवकों ने कई कंपनियों के नाम भी बताए। रोहटा रोड पर एक कंपनी के ऑफिस में एक दर्जन से अधिक छात्र-छात्राएं लोगों से ऑनलाइन ठगी करते हैं।
आरबीआई ने की थी शिकायत
एसएसपी ने बताया कि आरबीआई ने डीजीपी के पास ऑनलाइन ठगी की दर्जनों शिकायत भेजी थीं। जिस पर साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की जनपदों में छापेमारी चल रही है। इस खुलासे पर डीआईजी आशुतोष कुमार ने साइबर सेल और सिविल लाइन पुलिस को 12 हजार रुपये का ईनाम दिया है।
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जो बैंकों से लोन दिलाने और मकान फाइनेंस कराने का झांसा देकर ठगी करते आ रहे थे। इनके कब्जे से फर्जी आईडी, पासबुक और चेकबुक के अलावा फर्जी मुहर, पेन कार्ड, आधार कार्ड, स्टांप पेपर और लैपटॉप बरामद हुए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि यह गिरोह करीब 10 माह में 200 से ज्यादा लोगों को ठग चुका है।
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एसएसपी डीसी दूबे ने बुधवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों युवक इंटरनेट के जरिये लोगों से ठगी करते थे। इन्होंने फर्जी आईडी से ‘एडिशन फाइनेंस डॉट कॉम’ नाम से वेबसाइट बना रखी थी। जिसमें बैंक से लोन या मकान पर फाइनेंस करने के नाम पर ठगी की जाती थी। इस गिरोह का धंधा अंतर्राज्यीय स्तर पर चलता था।
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ये हुए गिरफ्तार
इस गिरोह ने 10 माह पहले वेस्टर्न कचहरी रोड स्थित एक कांपलेक्स में फाइनेंस ऑफिस खोला था। जहां साइबर क्राइम सेल और सिविल लाइन थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से की गई छापामारी में रिहान अख्तर उर्फ समीर उर्फ आकाश पुत्र अख्तर नवाज उर्फ गोपाल शिंदे निवासी पुरानी तहसील कोतवाली, अब्दुल बारी उर्फ दीपक कुमार पुत्र जसीमुद्दीन उर्फ रमेश कुमार निवासी शिव चौक बागपत गेट, सैयद बिलाल उर्फ समी मलिक पुत्र सैयद शाकिर उर्फ सारिक निवासी खैरनगर, देहली गेट को गिरफ्तार कर लिया।
यह हुई बरामदगी
तीन लैपटॉप, एक प्रिंटर, एडिशन फाइनेंस, एपेक्स फाइनेंस सोल्यूशन, जानवी फाइनेंस की 21 छोटी-बड़ी मुहरें। विभिन्न राज्यों के स्टांप पेपर, लेटर टाइपशुदा स्टांप पेपर, छह मोबाइल फोन, दो वाकी-टाकी, 15 बैंकों की चेक बुक, 18 एटीएम कार्ड, दो शॉपिंग कार्ड, छह पेन कार्ड, पांच वोटर आईडी, दो आधार कार्ड, कई कंपनियों के नाम से कागजात।
ऐसे करते थे ठगी
एसएसपी के अनुसार गिरोह के सरगना रिहान अख्तर और बिलाल एमबीए के छात्र हैं। जबकि अब्दुल बारी इंटर पास है। इस गिरोह में एमबीए के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा है। एमबीए कोर्स करते करते छात्र-छात्राओं को नौकरी दिलाने के बहाने उनको अपने साथ जोड़ लेते हैं।
इन छात्र-छात्राओं से फर्जी नाम और आईडी बताकर लोगों को कॉलिंग कराई जाती थी। बैंक से लोन दिलाने या मकान आदि फाइनेंस कराने के नाम पर एडवांस रकम फर्जी आईडी के खातों में जमा करा ली जाती थी। जिसके बाद खाते बंद कर यह रकम हड़प ली जाती थी।
महानगर में बड़ा नेटवर्क
पूछताछ में सामने आया कि फर्जी आईडी पर करीब एक दर्जन से अधिक फाइनेंसरों ने अलग-अलग कंपनियों के नाम से महानगर में ऐसे ऑफिस खोल रखे हैं। पूछताछ में युवकों ने कई कंपनियों के नाम भी बताए। रोहटा रोड पर एक कंपनी के ऑफिस में एक दर्जन से अधिक छात्र-छात्राएं लोगों से ऑनलाइन ठगी करते हैं।
आरबीआई ने की थी शिकायत
एसएसपी ने बताया कि आरबीआई ने डीजीपी के पास ऑनलाइन ठगी की दर्जनों शिकायत भेजी थीं। जिस पर साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की जनपदों में छापेमारी चल रही है। इस खुलासे पर डीआईजी आशुतोष कुमार ने साइबर सेल और सिविल लाइन पुलिस को 12 हजार रुपये का ईनाम दिया है।