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यूपी: कैसे बचे बेटियों की जान, शासन नहीं दे रहा जरा भी ध्यान, मुखबिर योजना को लग रहा 'पलीता' 

Tue, 03 Sep 2019 11:55 AM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 03 Sep 2019 11:55 AM IST
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government Informant plan for saving Girl child is being fall by the government
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ठगी
बेटियां बचाने के लिए दो साल पहले चलाई गई मुखबिर योजना शासन की तरफ से ही धड़ाम हो रही है। 11 सफल स्टिंग ऑपरेशन, भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों का भंडाफोड़ और दो दर्जन से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन इन ऑपरेशनों के 22 लाख रुपये में से एक भी मुखबिरों को नहीं मिला है। स्वास्थ्य विभाग कई बार इसके लिए रिमाइंडर भी भेज चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर भ्रूण लिंग जांच पर रोक लगाने के लिए पहले से ही पीसी एंड पीएनडीटी (पूर्व गर्भाधान एवं पूर्व प्रसव निदान तकनीक) में प्रावधान किए गए हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर इस आशय के नोटिस भी चस्पा किए गए हैं, लेकिन हकीकत में इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है। चोरी-छिपे कुछ केंद्रों पर अवैध लिंग जांच की जाती है। इसे देखते हुए एक जुलाई 2017 से शासन की ‘मुखबिर योजना’ लागू हुई थी।
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मुखबिर के रूप में ऐसे केंद्रों की सूचना देने वाले को 60 हजार रुपये इनाम दिया जाएगा, जबकि मिथ्या ग्राहक के रूप में किसी गर्भवती महिला को एक लाख और उसके सहयोग को 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। कुल दो लाख रुपये एक सफल स्टिंग ऑपेरशन के तहत दिए जाने हैं।
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ऑपरेशन के तहत स्वास्थ्य विभाग ऐसे लोगों को दबोचता है। वहीं शासन ही इस योजना को गंभीरता से नहीं ले रहा है। अभी तक किए गए 11 सफल स्टिंग ऑपरेशन की धनराशि जारी नहीं की गई है। यह हाल तब हैं जब मेरठ में वैसे ही स्वास्थ्य विभाग को भ्रूण हत्या रोकने के मकसद से किए जाने वाले स्टिंग ऑपरेशन के लिए बड़ी मुश्किल से मुखबिर मिलते हैं।

इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ दें तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की टीम से मदद लेनी पड़ती है। मेरठ की टीम अब तक मवाना, अमरोहा, मोदीनगर, परतापुर, भावनपुर, ब्रह्मपुरी, मेरठ कोतवाली और संभल आदि स्थानों पर भ्रूण लिंग परीक्षण पकड़ चुकी है। सूत्रों का कहना है कि पैसे न मिलने से नाराज मुखबिर स्वास्थ्य विभाग की मदद करने से इनकार करने लगे हैं।

पांच साल तक की सजा का प्रावधान
इसमें दोष सिद्ध होने पर पांच साल कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। डॉक्टर और जांच कराने वाले व्यक्तियों (महिला-पुरुष) को समान कैद और जुर्माना हो सकता है।

पकड़े गए मामले
13 जून 2019- मेडिकल क्षेत्र में भ्रूण लिंग परीक्षण का खुलासा, चिकित्सक समेत दो पकड़े
03 मार्च 2019- कोतवाली क्षेत्र में भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों भंडाफोड़, एक पकड़ा
16 जनवरी 2019- भावनपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
05 जनवरी 2019- मवाना में चल रहे भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार
16 नवंबर 2018- मोहिउद्दीनपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, चार गिरफ्तार

शासन से किया जा रहा है पत्राचार
मुखबिर योजना केतहत 22 लाख रुपये शासन से आने हैं, मगर अभी तक एक भी किस्त जारी नहीं की गई है। इसके लिए शासन को रिमाइंडर भी भेजे जा चुके हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही किस्त जारी होगी। -डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
 
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